तेल के 'कुबेर' देश में दिखी पीएम मोदी की धमक, स्वागत के लिए नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने तोड़े सारे नियम

व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे और उम्मीद की जा रही है कि इस दौरे में 30 से ज्यादा बड़े समझौते हो सकते हैं। अब इसमें सबसे अहम है ग्रीन टेक्नोलॉजी और एलपीजी सप्लाई की डील। नॉर्वे की एडवांस समुद्री ड्रिलिंग तकनीक और भारत का विशाल बाजार।
ओस्लो का वो एयरपोर्ट जहां 43 साल बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री कदम रख रहा है। लेकिन दुनिया देखती रह गई। प्रोटोकॉल तोड़कर नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर खुद एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत करने पहुंचे। यह सिर्फ एक स्वागत नहीं है बल्कि दुनिया की उभरती शक्ति भारत का सम्मान है। यूएई हो, नीदरलैंड हो या फिर स्वीडन सबकी सफल यात्रा के बाद पीएम मोदी अब अपने पांच देशों के दौरे के चौथे पड़ाव यानी कि नॉर्वे पहुंच चुके हैं। 2 दिन की इस यात्रा में एजेंडा बहुत बड़ा है और डील उससे भी बड़ी है। दरअसल नॉर्वे यह वह देश है दोस्तों जिसे तेल और गैस का कुबेर कहा जाता है। जिस वक्त मिडिल ईस्ट और ईरान के तनाव से दुनिया में एनर्जी की कीमतें आसमान छू रही है। वहां नॉर्वे एक उम्मीद बनकर उभरा है। नॉर्वे के पास करीब 7 अरब बैरल का तेल भंडार है। तेल और गैस उत्पादन के वहां पर कुल 97 एक्टिव क्षेत्र हैं। अकेले 2026 में नौवे का तेल गैस राजस्व 78 बिलियन से ज्यादा होने का अनुमान है। जैसे कि रिपोर्ट में बताया गया।
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व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे और उम्मीद की जा रही है कि इस दौरे में 30 से ज्यादा बड़े समझौते हो सकते हैं। अब इसमें सबसे अहम है ग्रीन टेक्नोलॉजी और एलपीजी सप्लाई की डील। नॉर्वे की एडवांस समुद्री ड्रिलिंग तकनीक और भारत का विशाल बाजार। यह जुगलबंदी दुनिया के एनर्जी सेक्टर की तस्वीर बदल सकती है। इतना ही नहीं नॉर्वे के सरकारी फंड का भारत के शेयर बाजार में पहले से ही 28 अरब डॉलर का निवेश है। इस दौरे में नए निवेश की बड़ी घोषणाएं हो सकती है। नॉर्वे सिर्फ तेल के लिए नहीं बल्कि अपनी खूबसूरती और खुशहाली के लिए भी जाना जाता है। यह वो देश है दोस्तों, जहां कुछ इलाकों में 6 महीने सूरज ढलता ही नहीं है और बाकी समय अंधेरा रहता है। कम आबादी के बावजूद यह दुनिया के सबसे अमीर और खुशहाल देशों में टॉप पर है।
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ओस्लो में 19 मई को पीएम मोदी तीसरे भारत नडे शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और यहां डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत होगी। बता दें पीएम मोदी का मिशन साफ है। भारत को एनर्जी के मामले में आत्मनिर्भर बनाना और इतना ही नहीं वैश्विक मंच पर भारत की पकड़ को और मजबूत करना। खैर नॉर्वे के प्रधानमंत्री का एयरपोर्ट पर आना यह बताता है कि यूरोप के लिए भारत कितना जरूरी हो चुका है। पीएम मोदी की यह यात्रा भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तकनीक के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर साबित होगी।
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