Operation Epic Fury | अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान खत्म करने का किया ऐलान

Marco Rubio
ANI
रेनू तिवारी । May 6 2026 11:25AM

रूबियो के मुताबिक, 28 फरवरी को US और इज़राइल द्वारा शुरू किए गए इस ऑपरेशन का मकसद रणनीतिक मिलिट्री लक्ष्य हासिल करना था, जो उनके मुताबिक अब पूरे हो चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस इलाके में US की हालिया मिलिट्री गतिविधियां रक्षात्मक थीं, आक्रामक नहीं।

मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक और सैन्य खबर सामने आई है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपना आक्रामक सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) समाप्त कर दिया है। रूबियो के अनुसार, इस मिशन के रणनीतिक लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया गया है। रूबियो ने साफ किया कि हालांकि बड़े पैमाने के ऑपरेशन खत्म हो गए हैं, फिर भी हालात अभी भी संवेदनशील हैं और ईरान की हरकतों के आधार पर बदल सकते हैं। रूबियो के मुताबिक, 28 फरवरी को US और इज़राइल द्वारा शुरू किए गए इस ऑपरेशन का मकसद रणनीतिक मिलिट्री लक्ष्य हासिल करना था, जो उनके मुताबिक अब पूरे हो चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस इलाके में US की हालिया मिलिट्री गतिविधियां रक्षात्मक थीं, आक्रामक नहीं।

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उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि वॉशिंगटन आगे कोई टकराव नहीं चाहता, बल्कि इस इलाके में स्थिरता चाहता है।

ध्यान अब होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर केंद्रित

US, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़े प्रयासों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है; यह दुनिया का एक अहम तेल शिपिंग मार्ग है। रूबियो ने कहा कि US चाहता है कि ईरान इस जलडमरूमध्य को पूरी तरह से फिर से खोल दे, और चेतावनी दी कि लगातार लगी पाबंदियों से दुनिया के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन की कार्रवाइयों का मकसद आम नागरिकों के जहाज़ों की सुरक्षा करना और फंसे हुए जहाज़ों की मदद करना है।

हालांकि करीब एक महीने पहले ही संघर्ष-विराम का ऐलान कर दिया गया था, फिर भी इस इलाके में अनिश्चितता बनी हुई है। US का कहना है कि वह सिर्फ़ खतरों के जवाब में कार्रवाई कर रहा है, जबकि ईरान ने खाड़ी इलाके में हाल ही में हुए हमलों के आरोपों से इनकार किया है।

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अब तक, US की निगरानी वाले इस मार्ग से बहुत कम संख्या में ही व्यापारिक जहाज़ सुरक्षित गुज़र पाए हैं, जबकि सुरक्षा चिंताओं के चलते कई अन्य जहाज़ फ़ारसी खाड़ी में ही फंसे हुए हैं। रूबियो ने कहा कि US अब भी कूटनीति को ही प्राथमिकता देता है और चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगी पाबंदियों को स्वीकार करे, साथ ही जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही को भी बिना किसी रोक-टोक के जारी रहने दे।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि चीन जैसे देशों को अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके ईरान पर दबाव डालना चाहिए, और यह तर्क दिया कि दुनिया का व्यापार काफी हद तक इस इलाके की स्थिरता पर ही निर्भर करता है।


तनाव खत्म होने के अभी कोई साफ संकेत नहीं

हालांकि "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" के खत्म होने का ऐलान कर दिया गया है, फिर भी US के अधिकारियों ने इस बात से इनकार नहीं किया है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो वे आगे भी कार्रवाई कर सकते हैं। फिलहाल, यह इलाका हाई अलर्ट पर है, और यहां मिलिट्री तैयारियां तथा कूटनीतिक प्रयास, दोनों ही साथ-साथ जारी हैं।

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