Shaksgam Valley Dispute Explained: PoK में पाकिस्तान की 1963 वाली वो हरकत, जिसको लेकर आज भारत-चीन भिड़े

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अभिनय आकाश । Jan 13 2026 7:57PM

चीन ने एक बार फिर से भारत के इलाके पर दावा करके विवाद पैदा कर दिया है। भारत के जम्मू-कश्मीर का हिस्सा शक्सगाम घाटी पर चीन ने दावा ठोक दिया है। इसके चलते दोनों देशों के बीच एक बार फिर से तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।

चाहे साउथ चाइना सी हो, डोकलाम हो, गलवान हो या फिर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर हो। चीन सिर्फ एक ही पॉलिसी को अपनाता है वो है डिनाई, डिले एंड डोमिनेट। चीन के इस पैटर्न को हम सभी ने काफी करीब से समझा है। जहां पर चीन एक तरफ तो हमसे पीसफुल हाथ बढ़ाएगा। दूसरी तरफ कोई ना कोई डिस्टरबेंस क्रिएट करने की कोशिश करता रहता है। जिस तरीके से भारत और अमेरिका के बीच में रिश्ते तल्खियों पर चल रहे थे। जिस तरीके से चीन और अमेरिका के रिश्ते तनावपूर्ण हैं। जिसके बाद से कहा जा रहा था कि भारत और चीन के बीच रिश्ते अच्छे हो सकते हैं। वहीं पर ही चीन ने एक और काम कर दिया है। चीन ने एक बार फिर से भारत के इलाके पर दावा करके विवाद पैदा कर दिया है। भारत के जम्मू-कश्मीर का हिस्सा शक्सगाम घाटी पर चीन ने दावा ठोक दिया है। इसके चलते दोनों देशों के बीच एक बार फिर से तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।

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1963 में इस इलाके को चीन को सौंप दिया

शक्सगाम घाटी भारत के जम्मू-कश्मीर का हिस्सा रहा है। किंतु 1947-48 की जंग के दौरान पाकिस्तान ने इस इलाके पर अवैध कब्जा जमा लिया था। पाकिस्तान ने 1963 में इस इलाके को चीन को सौंप दिया था, जो वास्तव में भारत का हिस्सा है। इसका क्षेत्रफल 5,180 वर्ग किलोमीटर है। इसे पाकिस्तान ने सिनो पाकिस्तान बार्डर एंग्रीमेंट करार दिया था। भारत इस एग्रीमेंट को खारिज करता है। वजह यह कि पूरा इलाका संवैधानिक तौर पर भारत का ही है।

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भारत का स्टैंड

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा हम तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को भी मान्यता नहीं देते, क्योंकि यह भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरता है जिसपर पाकिस्तान का अवैध और जबरन कब्जा है। जायसवाल की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, “सबसे पहले तो जिस क्षेत्र का आप उल्लेख कर रहे हैं, वह चीन का हिस्सा है।” उन्होंने कहा, “अपने ही क्षेत्र में चीन की बुनियादी ढांचा गतिविधियां बिल्कुल उचित हैं। माओ ने कहा कि चीन और पाकिस्तान ने 1960 के दशक में सीमा समझौता किया था और दोनों देशों के बीच सीमा तय की गई थी। उन्होंने कहा कि यह संप्रभु देशों के रूप में चीन और पाकिस्तान का अधिकार है। हम तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को भी मान्यता नहीं देते, क्योंकि यह भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिसपर पाकिस्तान का अवैध और जबरन कब्जा है। जायसवाल ने कहा कि पूरा जम्मू कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि यह बात पाकिस्तानी और चीनी अधिकारियों को कई बार स्पष्ट रूप से बता दी गई है।

बौखलाया चीन

जायसवाल की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सबसे पहले तो जिस क्षेत्र का आप उल्लेख कर रहे हैं, वह चीन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अपने ही क्षेत्र में चीन की बुनियादी ढांचा गतिविधियां बिल्कुल उचित हैं। माओ ने कहा कि चीन और पाकिस्तान ने 1960 के दशक में सीमा समझौता किया था और दोनों देशों के बीच सीमा तय की गई थी। उन्होंने कहा कि यह संप्रभु देशों के रूप में चीन और पाकिस्तान का अधिकार है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) को लेकर भारत द्वारा आलोचना किए जाने पर माओ ने बीजिंग के पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि यह एक आर्थिक पहल है, जिसका उद्देश्य स्थानीय आर्थिक व सामाजिक विकास करना और लोगों की जीवन में सुधार लाना है। उन्होंने कहा, “इस तरह के समझौते और सीपीईसी से कश्मीर मुद्दे पर चीन के रुख पर कोई असर नहीं पड़ेगा और इस मामले में चीन का रुख अपरिवर्तित है।

शक्सगाम में चीन की अवैध गतिविधियाँ

खबरों के मुताबिक, चीन ने शक्सगाम से होकर एक बारहमासी सड़क का निर्माण शुरू कर दिया है, जबकि नई दिल्ली इस क्षेत्र में चीनी गतिविधियों पर लगातार आपत्ति जताती रही है। भूटान के डोकलाम में 2017 के गतिरोध के बाद शक्सगाम में बीजिंग की निर्माण गतिविधियों में तेजी आई है। कहा जाता है कि यह नई सड़क दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर से 49 किलोमीटर से भी कम दूरी पर है और इससे इस क्षेत्र में भारत की रक्षा स्थिति पर कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है। 2021 में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने रिपोर्ट किया था कि पाकिस्तान चीन के साथ नए जमीनी सीमा चौकियों का निर्माण करने की योजना बना रहा है, जिससे लद्दाख और शेष कश्मीर में भारतीय सेनाओं के खिलाफ उनकी सैन्य समन्वय क्षमता को संभावित रूप से बढ़ावा मिलेगा।

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