पाकिस्तान ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के टीके को दी आपात इस्तेमाल की मंजूरी

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 17, 2021   17:54
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पाकिस्तान ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के टीके को दी आपात इस्तेमाल की मंजूरी

पाकिस्तान ने आक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका कोविड-19 टीके के आपातकालील इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है।डा. सुलतान ने शुक्रवार को कहा था कि पाकिस्तान कोविड-19 टीके की खरीद के लिए चीन और अन्य कंपनियों के साथ सम्पर्क में है।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका कोविड​​-19 टीके के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दे दी है और सरकार को उम्मीद है कि वर्ष की पहली तिमाही तक टीका उपलब्ध करा दिया जाएगा। पाकिस्तान में कोविड-19 संक्रमितों की संख्या बढ़कर 519,291 हो गई है। ‘जियो टीवी’ की एक खबर के अनुसार स्वास्थ्य मामले पर प्रधानमंत्री इमरान खान के विशेष सहायक डॉ. फैसल सुल्तान ने शनिवार को इसकी पुष्टि की कि पाकिस्तान औषधि नियामक प्राधिकरण (डीआरएपी) ने देशभर में ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका कोरोना वायरस टीके के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दे दी है। ‘जियो टीवी’के अनुसार योजना मंत्री असद उमर ने कहा कि टीके को मार्च तक उतारा जाएगा।

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उमर देश के कोरोना वायरस नियंत्रण निकाय ‘नेशनल कमांड एंड ऑपरेशंस सेंटर’ (एनसीओसी)के प्रमुख भी हैं। उमर ने कहा कि पहले चरण में, टीका स्वास्थ्य कर्मियों और 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को दिया जाएगा। टीके को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया है और यह एस्ट्राज़ेनेका द्वारा निर्मित है, जो एक ब्रिटिश-स्वीडिश बहुराष्ट्रीय दवा और बायोफर्मासिटिकल कंपनी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा मंत्रालय के अनुसार पाकिस्तान में पिछले 24 घंटे में 43 लोगों की संक्रमण से मौत हो गई, जिससे देश में मृतक संख्या बढ़कर 10,951 हो गई। पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 2,521 नए मामले सामने आने से देश में कुल मामलों की संख्या बढ़कर 519,291 हो गई। डा. सुलतान ने शुक्रवार को कहा था कि पाकिस्तान कोविड-19 टीके की खरीद के लिए चीन और अन्य कंपनियों के साथ सम्पर्क में है।





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‘यूरोप मैथ ओलंपियाड’ के लिए चुनी गई भारतीय मूल की छात्रा ब्रितानी टीम की सबसे कम उम्र की सदस्य

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 7, 2021   10:48
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‘यूरोप मैथ ओलंपियाड’ के लिए चुनी गई भारतीय मूल की छात्रा ब्रितानी टीम की सबसे कम उम्र की सदस्य

मैथ ओलंपियाड के विजेता रह चुके अपने पिता अमित गोयल के मार्गदर्शन से उसने ईजीएमओ के लिए चुनी जाने वाली ब्रितानी टीम का हिस्सा बनने के लिए ‘यूके मैथेमैटिक्स ट्रस्ट’ (यूकेएमटी) द्वारा आयोजित परीक्षाओं पर ध्यान केंद्रित किया।

लंदन। जॉर्जिया में अगले महीने होने वाले प्रतिष्ठित ‘यूरोपियन गर्ल्स मैथेमैटिकल ओलंपियाड’ (ईजीएमओ) के लिए चुनी गई भारतीय मूल की 13 वर्षीय छात्रा ब्रितानी टीम की अब तक की सबसे कम उम्र की सदस्य है। लंदन में डलविच के एलयंस स्कूल की छात्रा आन्या गोयल ने गणित के सवाल सुलझाने के अपने जुनून को पूरा करने के लिए पिछले साल लागू लॉगडाउन का भरपूर इस्तेमाल किया। मैथ ओलंपियाड के विजेता रह चुके अपने पिता अमित गोयल के मार्गदर्शन से उसने ईजीएमओ के लिए चुनी जाने वाली ब्रितानी टीम का हिस्सा बनने के लिए ‘यूके मैथेमैटिक्स ट्रस्ट’ (यूकेएमटी) द्वारा आयोजित परीक्षाओं पर ध्यान केंद्रित किया। 

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आन्या ने कहा, ‘‘ओलंपियाड के सवाल सुलझाने के लिए रचनात्मक होने और गहराई से सोचने की आवश्यकता होती है। कई बार एक ही सवाल को सुलझाने में कई दिन लग जाते हैं, लेकिन आपको हार नहीं माननी होती और नए विचारों के साथ सवाल सुलझाने होते हैं।’’ यूकेएमटी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए हर साल पूरे ब्रिटेन में माध्यमिक विद्यालयों के छह लाख से अधिक छात्र आवेदन करते हैं, जिनमें से हर साल नवंबर में होने वाले ‘ब्रिटिश मैथेमैटिकल ओलंपियाड’ के लिए शीर्ष 1,000 छात्रों को आमंत्रित किया जाता है। इनमें से ‘ब्रिटिश मैथेमैटिकल ओलंपियाड’ के दूसरे दौर के लिए शीर्ष 100 छात्र चुने जाते हैं। आन्या ने ईजीएमओ में भाग लेने वाली ब्रितानी टीम में चुनी गई शीर्ष चार लड़कियों में स्थान बनाया और इसी के साथ वह इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सबसे कम उम्र की छात्रा बन गई है। इससे पहले यह रिकॉर्ड 15 वर्षीय एक छात्रा के नाम था। आन्या को उसकी आदर्श एवं दुनिया की सर्वश्रेष्ठ महिला गणितज्ञ मानी जानी वाली युहका माचिनो के साथ टीम में चुना गया है।





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पाकिस्तान में विपक्ष ने इमरान खान की अलोचना की, विश्वास मत को बताया निरर्थक

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 6, 2021   20:17
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पाकिस्तान में विपक्ष ने इमरान खान की अलोचना की, विश्वास मत को बताया निरर्थक

पीडीएम के प्रमख मौलाना फजलुर रहमान ने कहा, “यह एक विश्वास मत नहीं था। हम जानते हैं कि किन एजेंसियों द्वारा रात भर सदस्यों के घरों पर नजर रखी जा रही थी। (हम जानते हैं) किसने प्रत्येक सदस्य की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिये उनके दरवाजों पर दस्तक दी।”

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रमुख विपक्षी नेताओं ने शनिवार को प्रधानमंत्री इमरान खान से इस्तीफा देने और नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की। नेशनल असेंबली (संसद) में खान के विश्वास मत हासिल करने के ठीक बाद विपक्षी नेताओं ने यह मांग की। राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के निर्देश पर बुलाए गए विशेष सत्र के दौरान खान ने संसद के 342 सदस्यीय निचले सदन में 178 सदस्यों का समर्थन हासिल किया। विश्वास मत की प्रक्रिया विपक्ष की मौजूदगी के बगैर हुई क्योंकि 11 दलों के गठबंधन-पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) – ने मतदान का बहिष्कार किया था। पीडीएम के प्रमख मौलाना फजलुर रहमान ने सबसे पहले प्रतिक्रिया दी और सिंध प्रांत के सुक्कूर में मीडियाकर्मियों को बताया कि इस विश्वास मत का कोई मतलब नहीं है। 

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उन्होंने कहा, “यह एक विश्वास मत नहीं था। हम जानते हैं कि किन एजेंसियों द्वारा रात भर सदस्यों के घरों पर नजर रखी जा रही थी। (हम जानते हैं) किसने प्रत्येक सदस्य की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिये उनके दरवाजों पर दस्तक दी।” उनका संदर्भ उन खबरों को लेकर था जिनमें कहा गया था कि सरकार ने अपने सदस्यों को इस्लामाबाद में लॉज में कड़ी निगरानी में रखा था जिससे शक्ति परीक्षण के दौरान वे सभी संसद में मौजूद रहें। रहमान ने आरोप लगाया कि सांसदों को प्रधानमंत्री खान के पक्ष में मतदान के लिये मजबूर किया गया।

उन्होंने प्रधानमंत्री को चुनौती दी कि “साहस दिखाएं और नए चुनाव कराकर जनता से विश्वास मत हासिल करें।” पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की नेता मरियम नवाज ने पीडीएम की बैठक के बाद कहा कि खान के दिन अब गिनती के बचे हैं। उन्होंने कहा, “अब यह बस समय की बात है कि वह कब जाते हैं।” उन्होंने खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के “उपद्रवियों” द्वारा पीएमएल-एन की प्रवक्ता मरियम औरंगजेब, पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खकान अब्बासी और पूर्व गृह मंत्री अहसन इकबाल समेत अन्य नेताओं के साथ बदसलूकी को लेकर भी उन पर निशाना साधा। 

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मरियम ने कहा, “मेरा सिर यह देखकर फख्र से ऊंचा हो गया कि आपने कैसे भाड़े के कुछ दर्जन गुंडों का मुकाबला किया और उन्हें भागने पर मजबूर कर दिया।” उन्होंने हालांकि औरंगजेब पर हुए “हमले” पर दुख जताया। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने पीडीएम की बैठक के बाद अपने संबोधन में कहा कि सीनेट की सीट हारने के बाद खान का पर्दाफाश हो गया और विश्वास मत निरर्थक था। उन्होंने कहा कि हम पहले ही जीच चुके हैं और बदलाव का वक्त आ गया है। इन प्रतिक्रियाओं से साफ है कि खान और विपक्षी नेताओं के बीच सियासी प्रतिद्वंद्विता खान के विश्वास मत हासिल करने के बावजूद खत्म नहीं होने जा रही है।





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ISI प्रमुख से मिले थे इमरान खान, विपक्षी पार्टी ने की कार्रवाई की मांग

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 6, 2021   18:25
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ISI प्रमुख से मिले थे इमरान खान, विपक्षी पार्टी ने की कार्रवाई की मांग

विपक्ष ने सेना-आईएसआई प्रमुख से मिलने के लिए प्रधानमंत्री इमरान खान की आलोचना की है।आईएसआई के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल फैज हामीद भी बैठक के दौरान मौजूद थे। बैठक आंतरिक और बाहरी स्थिति की समीक्षा करने के लिए आयोजित की गई थी।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के विपक्ष ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी की अपमानजनक हार के बाद पाकिस्तानी सेना और देश की शक्तिशाली जासूसी एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के प्रमुखों से मुलाकात करने के लिए प्रधानमंत्री इमरान खान की आलोचना की और कहा कि ‘‘संस्थानों’’ को स्वयं को संवैधानिक और कानूनी भूमिका तक सीमित रखनी चाहिए। डॉन अखबार की खबर के अनुसार, राष्ट्रीय मुद्दों पर असैन्य और सैन्य नेतृत्व के बीच बातचीत के तहत सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने प्रधानमंत्री खान से बृहस्पतिवार को मुलाकात की। आईएसआई के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल फैज हामीद भी बैठक के दौरान मौजूद थे। बैठक आंतरिक और बाहरी स्थिति की समीक्षा करने के लिए आयोजित की गई थी।

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हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा कोई इस पर बयान जारी नहीं किया गया, जो आमतौर पर इस तरह की बैठकों पर प्रेस विज्ञप्ति जारी करता है। रिपोर्ट के अनुसार, सीनेट चुनाव के बाद लोग इस बैठक को देश के नवीनतम राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देख रहे हैं। मुख्य विपक्षी दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ की उपाध्यक्ष मरियम नवाज़ ने कहा कि सैन्य नेतृत्व को सीनेट के चुनाव के घटनाक्रम के बाद प्रधानमंत्री खान के साथ नहीं मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उसी दिन अपने आधिकारिक आवास के लॉन में संस्थानों के प्रमुखों को बुलाया और उनसे मुलाकात की जिस दिन उन्हें अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा था। रिपोर्ट में उन्हें उद्धृत करते हुए कहा गया, क्या वह संस्थानों को राजनीति में नहीं घसीट रहे हैं? उन्होंने कहा कि इस स्थिति में इस बैठक से अच्छा संदेश नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा, संस्थानों को प्रधानमंत्री खान का समर्थन करना बंद करना चाहिए, अगर उन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया है। उन्हें खुद को संवैधानिक और कानूनी भूमिका तक सीमित रखना चाहिए।





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