ताशकंद में PM का ग्रैंड वेलकम, दूर-दूर तक गूंजता मोदी-मोदी का नारा

Modi
@narendramodi
अभिनय आकाश । Aug 29 2026 7:57PM

पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान का यह चौथा दौरा है। लेकिन इस बार की गर्मजोशी कुछ अलग है। राष्ट्रपति शौकत के विशेष निमंत्रण पर पहुंचे पीएम मोदी का ताशकंद एयरपोर्ट पर अभूतपूर्व स्वागत किया गया। ग्रैंड वेलकम किया गया। उज्बेकिस्तान की संस्कृति की झलक पेश करते हुए पीएम मोदी का स्वागत वहां के पारंपरिक अंदाज में किया गया। यह स्वागत केवल शिष्टाचार नहीं है। यह दिखा रहा है कि उज़्बेकिस्तान भारत को अपना सबसे भरोसेमंद साथी मानता है।

मध्य एशिया के दिल ताशकंद की जमीन पर आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विमान उतरा तो नजारा देखने लायक था। दूर-दूर तक गूंजता मोदी मोदी का नारा पारंपरिक उजबेकिस्तान संगीत की धुनें और खुद राष्ट्रपति शौकत मार्जिए के विशेष दूतों की मौजूदगी। यह सिर्फ एक आधिकारिक दौरा नहीं है पीएम मोदी का बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत का सबूत है। दरअसल पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान का यह चौथा दौरा है। लेकिन इस बार की गर्मजोशी कुछ अलग है। राष्ट्रपति शौकत के विशेष निमंत्रण पर पहुंचे पीएम मोदी का ताशकंद एयरपोर्ट पर अभूतपूर्व स्वागत किया गया। ग्रैंड वेलकम किया गया। उज्बेकिस्तान की संस्कृति की झलक पेश करते हुए पीएम मोदी का स्वागत वहां के पारंपरिक अंदाज में किया गया। यह स्वागत केवल शिष्टाचार नहीं है। यह दिखा रहा है कि उज़्बेकिस्तान भारत को अपना सबसे भरोसेमंद साथी मानता है। 

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ताशकंद की सड़कों पर भारत और उज़्बेकिस्तान के झंडे लहरा रहे हैं जो एक नई दोस्ती की गवाही दे रहे हैं। पीएम मोदी और राष्ट्रपति शौकत के बीच होने वाली डेलीगेशन लेवल की बातचीत में कई अहम मुद्दे शामिल हैं। पहला मुद्दा है व्यापार और निवेश। भारत और उज़्बेकिस्तान अपने द्विपक्षी व्यापार को कई गुना बढ़ाना चाहते हैं। दूसरा मुद्दा है डिफेंस और सुरक्षा का आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बनाने पर चर्चा होगी और तीसरा है डिजिटल कनेक्टिविटी। भारत का यूपीआई और डिजिटल इंडिया मॉडल अब उज़्बेकिस्तान में भी काम आएगा। 

चौथा मुद्दा है ऊर्जा और शिक्षा का। उज्बेकिस्तान की यूरेनियम सप्लाई और भारतीय छात्रों की वहां की शिक्षा दोनों देशों के लिए विनविन सिचुएशन है। सेंट्रल एशिया भारत के लिए सिर्फ व्यापार का केंद्र नहीं है बल्कि यह सुरक्षा का गेटवे है।

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उज़्बेकिस्तान के जरिए भारत यूरोप और रूस तक अपनी पहुंच आसान करना चाहता है। चाबहार पोर्ट की अहमियत यहां फिर से उभरती है और इस क्षेत्र में बढ़ते चीन के प्रभाव के बीच पीएम मोदी की यह यात्रा भारत की मौजूदगी को और मजबूत करती है। भारत का लक्ष्य साफ है कि जब तक हम आजादी के 100 साल मनाएं तब तक मध्य एशिया हमारे प्रमुख आर्थिक पार्टनर्स में से एक हो। खैर ताशकंद में पीएम मोदी का यह जोरदार स्वागत केवल एक शुरुआत है। 

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