खतरे में है पुतिन की गद्दी! पश्चिमी प्रतिबंधों से अधिकारियों में मायूसीV, जंग जारी रही तो हो सकता है तख्तापलट

खतरे में है पुतिन की गद्दी!  पश्चिमी  प्रतिबंधों से अधिकारियों में मायूसीV, जंग जारी रही तो हो सकता है तख्तापलट

पुतीन यूक्रेन पर कब्जा करने में सफलता नहीं मिलने पर एफएसबी को दोष दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एफएसबी के अधिकारी पश्चिमी देशों के लगाए गए प्रतिबंधों से मायूस हो रहे हैं। आपको बता दें एसएफबी अधिकारियों को किसी भी औसत रूसी से ज्यादा भुगतान किया जाता है। ब

रूस और यूक्रेन के बीच 30 दिनों से जंग लगातार जारी है। अभी तक दोनों देश किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं। एक तरफ रूसी हमले के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति ने जिस तरह पुतिन का मुकाबला किया है उसकी हर ओर तारीफ हो रही है। वहीं दूसरी ओर पुतिन गद्दी खतरे में हैं।मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से ये कहा जा रहा कि पुतिन को लेकर एफएसबी (Federal Security Service) के भीतर असंतोष की स्थिति पैदा हो रही है।

डेलीमेल के एक खबर के मुताबिक जब पुतिन ने यूक्रेन पर हमले का फैसला किया तो ये माना जा रहा था कि यूक्रेनी राष्ट्रपति कुछ दिनों में हार मान लेंगे पर ऐसा हुआ नहीं। और अब रूस सैन्य अभियान में फंस चुका है। रूस से निर्वासित किए गए मानवाधिकार कार्यकर्ता व्लदीमिर ओसेकिन ने द टाइम्स को बताया कि एक अज्ञात  सूत्र से मिली जानकारी के मुताबिक रूस की एफएसबी में पुतिन को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।

खबरों के मुताबिक पुतीन यूक्रेन पर कब्जा करने में सफलता नहीं मिलने पर एफएसबी को दोष दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एफएसबी के अधिकारी पश्चिमी देशों के लगाए गए प्रतिबंधों से मायूस हो रहे हैं। आपको बता दें एसएफबी अधिकारियों को किसी भी औसत रूसी से ज्यादा भुगतान किया जाता है। बता दें पुतिन 1998-99 तक एसएफबी के निदेशक राह चुके हैं जिसके बाद वो रूस की राष्ट्रपति की गद्दी पर बैठे थे।

ओसिकिन ने बताया कि प्रतिबंधों से रूस की आर्थिक सेहत पर प्रभाव पड़ा है और रूबल की कीमत भी लगातार घट रही है। उन्होंने कहा कि एसएफबी के अधिकारियों को अच्छा जीवन जीने की आदत पड़ चुकी है और वो वापस सोवियत संघ में नहीं जाना चाहते हैं। अगर उन्हें रूस की व्यवस्था बदलने की जरूरत महसूस हुई तो वो उसके लिए भी तैयार हैं। अगर ये जंग जारी रहती है तो पुतिन के खिलाफ विद्रोह के बीज पनप सकते हैं।