बड़बोले ट्रंप से बिदका सऊदी अरब, रूस को किया फोन

सऊदी अरब ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया भले ही ना दी हो लेकिन इसके बाद उसने जो कदम उठाए उससे वैश्विक राजनीति में एक नया संकेत आया है। ट्रंप से आहत हुए मोहम्मद बिन सलमान ने पुतिन से पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात पर विस्तार से चर्चा की। दोनों नेताओं ने ईरान के साथ जारी संघर्ष, लोगों की मौत और अहम बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर चिंता जताई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सनक भरी हरकतें इस युद्ध में उन्हें लगातार अकेला कर रही हैं। ट्रंप के बड़बोले बयान से ही दुनिया के सबसे ताकतवर सैन्य अलायंस नाटो के टूटने की आशंका पैदा हो गई है। इसी तरह लंबे समय तक अमेरिका का करीबी सहयोगी रहने वाला सऊदी अरब भी अब उनसे किनारा करता दिख रहा है। खुद अमेरिका के लोग भी अब ट्रंप के फैसलों पर सवाल उठाने लगे हैं। यह जंग अब सिर्फ मिसाइलें और सैन्य कार्यवाही तक नहीं रह गई। बल्कि इस जंग की वजह से कूटनीति भी तेजी से करवट ले रही है। इस बदलती नीति का ताजा उदाहरण सऊदी अरब है। ध्यान रहे सऊदी अरब लंबे समय तक अमेरिका का करीबी रहा है। कहना चाहिए सहयोगी तो अब भी है लेकिन ट्रंप के बड़बोलेपन से सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को ऐसे हर्ट किया कि उन्होंने अमेरिका के प्रतिद्वंदी रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन से फोन कॉल पर बात की। इस फोन कॉल ने वैश्विक राजनीति में नए संकेत दे दिए हैं।
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बता दें कि ट्रंप ने हाल ही में क्राउन प्रिंस को लेकर सार्वजनिक रूप से बेहद विवादित टिप्पणी की थी। अपने बड़बोलेपन में ट्रंप ने बताया कि सऊदी अरब नेतृत्व अब उनके दबाव में है और उन्हें अच्छा व्यवहार करना होगा। इस बयान पर सऊदी अरब ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया भले ही ना दी हो लेकिन इसके बाद उसने जो कदम उठाए उससे वैश्विक राजनीति में एक नया संकेत आया है। ट्रंप से आहत हुए मोहम्मद बिन सलमान ने पुतिन से पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात पर विस्तार से चर्चा की। दोनों नेताओं ने ईरान के साथ जारी संघर्ष, लोगों की मौत और अहम बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर चिंता जताई। पुतिन ने साफ संदेश दिया कि वह सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ खड़े हैं। इन दोनों शीर्ष नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर बातचीत की। दोनों देशों ने तेल की कीमतें नियंत्रित रखने और बाजार में संतुलन बनाए रखने के उपाय तलाशे। सबसे अहम बात यह रही कि दोनों नेताओं ने सैन्य समाधान की बजाय कूटनीतिक रास्ते पर जोर दिया। उन्होंने तत्काल युद्ध विराम और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की जरूरत बताई। यह रुख अमेरिका की मौजूदा आक्रामक रणनीति से काफी अलग नजर आता है।
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जाहिर है सऊदी अरब और रूस के बीच हुई बातचीत महज एक फोन कॉल नहीं बल्कि सऊदी अरब की बदलती विदेश नीति का संकेत भी है। सऊदी अरब अब संतुलन की रणनीति अपनाता दिख रहा है। वह एक तरफ अमेरिका से रिश्ते बनाए रखना चाहता है। लेकिन दूसरी तरफ वह रूस और चीन जैसे वैश्विक ताकतों के साथ भी अपने संबंध मजबूत कर रहा है। ट्रंप ने जो सऊदी अरब पर दबाव में होने का बड़बोला दावा किया था तो उसके प्रिंस ने दिखा दिया कि सऊदी अरब किसी के दबाव में नहीं है बल्कि वह एक धड़े पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहेगा।
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