Nepal Elections 2026: रैपर बालेन की कहानी, जिसने नेपाल जीत लिया

पुष्प कमल दहल प्रचंड की बात कर लेते हैं। परकुम पूर्व एक सीट से नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार थे वो। 6778 वोटों से वह चुनाव जीत गए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री जिन्होंने नाम में ही नेपाल लगा लिया। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी यूनिफाइड सोशलिस्ट के नेता माधव कुमार इस बार के चुनाव में वो रौतहट एक निर्वाचन क्षेत्र से खड़े थे। उन्हें बुरी तरह हार मिली है।
भारत के पड़ोसी नेपाल में जंजी प्रोटेस्ट का सबसे बड़ा चेहरा जो खुद तो मैदान में नहीं उतरा लेकिन सरकार गिरा देने वाले इस प्रदर्शन की बैकबोन बना। नाम बालेंद्र शाह जिन्हें बालन शाह बुलाया जाता है और जिनका पीएम बनना अब तय है। बालन नेपाल की झापा पांच सीट से जीत गए हैं। उन्हें कुल 68348 वोट्स मिले हैं। इस सीट पर उनके विरोध में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल यूनिफाइड मार्क्स लेनिस्ट सीपीएन यूएमएल के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली थे। ओली जो चार बार नेपाल के पीएम रह चुके हैं। बाले ने ओली को 49614 वोट से हरा दिया है और जीत गए हैं इस सीट पर चुनाव। पीएम मोदी ने उन्हें एक्स हैंडल पर बधाई दी। उन्होंने लिखा मैं नेपाल के लोगों और सरकार को चुनाव के सफल आयोजन पर दिल से बधाई देता हूं। नेपाली भाइयों और बहनों को अपने डेमोक्रेटिक अधिकारों का इतने जोश के साथ इस्तेमाल करते देखना बहुत अच्छा लग रहा है। भारत नेपाल के लोगों और उनकी नई सरकार के साथ मिलकर काम करने के अपने वादे पर कायम है। नेपाल पॉलिटिक्स के दूसरे बड़े चेहरों का क्या हुआ?
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पूर्व पीएम का क्या हुआ?
पुष्प कमल दहल प्रचंड की बात कर लेते हैं। परकुम पूर्व एक सीट से नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार थे वो। 6778 वोटों से वह चुनाव जीत गए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री जिन्होंने नाम में ही नेपाल लगा लिया। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी यूनिफाइड सोशलिस्ट के नेता माधव कुमार इस बार के चुनाव में वो रौतहट एक निर्वाचन क्षेत्र से खड़े थे। उन्हें बुरी तरह हार मिली है। चुनाव में उन्हें तीसरा स्थान भी नहीं मिल पाया है। एक और पूर्व प्रधानमंत्री और प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी के नेता डॉ. बाबूराम भट्टराय ने पहले गोरखा दो से अपनी उम्मीदवारी दाखिल की थी। लेकिन बाद में उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया। इनके अलावा दो अन्य पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देवबा और झालानाथ खनाल इस बार चुनाव नहीं लड़े। सात बार चुनाव जीतने वाले देवबा को तो पार्टी से टिकट ही नहीं मिला। वहीं खनाल ने खुद फैसला किया कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे।
काठमांडू के मेयर के रूप मे पहचान
साल 2022 में बालेन शाह ने काठमांडू महानगर के मेयर का चुनाव एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में लड़ा और बड़ी जीत हासिल कर सबको चौंका दिया। उनका चुनावी नारा "Time for Change" यानी "बदलाव का समय" था। इस नारे के साथ उन्होंने भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और पुरानी राजनीतिक सोच के खिलाफ अभियान चलाया। जीत के बाद उन्होंने शहर में अवैध निर्माण हटाने, ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और प्रशासन को ज्यादा पारदर्शी बनाने जैसे कदम उठाए।
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राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ती भूमिका
पिछले साल दिसंबर में उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) जॉइन की। यह पार्टी पूर्व टीवी एंकर और नेता रबी लामिछाने (Rabi Lamichhane) के नेतृत्व में है। पार्टी ने बालेन शाह को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार भी बनाया, जिसके बाद उनकी राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा और तेज हो गई। चुनाव प्रचार के दौरान वह अक्सर डार्क सनग्लासेस और दाढ़ी वाले अपने खास अंदाज में अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचार करते दिखाई देते है। नेपाल में उनकी लोकप्रियता खासकर युवाओ यानी Gen-Z के बीच काफी मजबूत मानी जाती है।
GenZ आंदोलन का प्रमुख चेहरा
बालेन शाह को नेपाल में उभर रहे Gen-Z या युवा बदलाव आदोलन का प्रमुख चेहरा भी माना जाता है। उन्होंने युवाओं को राजनीति में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया और सोशल मीडिया के जरिए सीधे संवाद कर एक नया राजनीतिक मॉडल पेश किया।
विवाद से रहा है नजदीकी नाता
उनके कार्यकाल के दौरान कुछ विवाद भी सामने आए। सड़को को खाली कराने पर मानवाधिकार संगठनों ने आलोचना की। उनके दफ्तर में लगाए गए 'ग्रेटर नेपाल' के नक्शे को लेकर भी विवाद हुआ, जिसमें भारत के कुछ इलाकों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था।
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