रक्षा और असैन्य परमाणु क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे हैं भारत-अमेरिका: अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री

Prabhasakshi Image

अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री एस. पॉल कपूर ने कहा है कि भारत और अमेरिका रक्षा तथा असैन्य परमाणु क्षेत्र में अपना सहयोग बढ़ा रहे हैं। इस साझेदारी में अर्थव्यवस्था को गति देने वाली विभिन्न उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाना भी शामिल है। इससे दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाएं मजबूत हो रही हैं।

(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 28 जुलाई अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री एस. पॉल कपूर ने कहा है कि अमेरिका और भारत रक्षा तथा असैन्य परमाणु क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे हैं जिसमें विश्वसनीय कृत्रिम मेधा (एआई) तथा अर्थव्यवस्था को गति देने वाली अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाना भी शामिल है। कपूर ने यह बात हूवर इंस्टीट्यूशन में भारत पर आयोजित एक गोलमेज सम्मेलन के दौरान कही। इस कार्यक्रम में अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस और भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत डेविड सी. मुलफोर्ड ने भी भाग लिया।

कपूर ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “इस (ट्रंप) प्रशासन में भारत के साथ अमेरिका की बढ़ती भागीदारी से देश में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। साथ ही, ऐसी आपूर्ति शृंखलाएं भी सुदृढ़ हो रही हैं जो अमेरिका और पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं।” उन्होंने कहा, “हम रक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग का विस्तार कर रहे हैं और इसमें विश्वसनीय कृत्रिम मेधा तथा अर्थव्यवस्था को गति देने वाली अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।” पिछले वर्ष भारत और अमेरिका ने थल, जल, आकाश, अंतरिक्ष तथा साइबर क्षेत्र में संबंध मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्त्वपूर्ण रक्षा साझेदारी मसौदे पर हस्ताक्षर किए थे। वर्ष 2002 के बाद से भारत ने अमेरिका से अनेक आधुनिक रक्षा प्रणालियां खरीदी हैं।

इनमें अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर, सी-17 तथा सी-130जे परिवहन विमान, पी-8आई समुद्री गश्ती विमान और एम777 होवित्जर तोपें प्रमुख हैं। अमेरिका की परमाणु ऊर्जा कंपनियां भारत के असैन्य परमाणु क्षेत्र में निवेश और सहयोग की संभावनाओं को लेकर उत्साहित हैं। इस वर्ष की शुरुआत में नयी दिल्ली द्वारा ‘शांति’ कानून के माध्यम से दायित्व संबंधी प्रावधानों में ढील दिए जाने के बाद, निजी क्षेत्र के साथ सहयोग की संभावनाएं तलाशने के उद्देश्य से परमाणु उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भारत आया था।

All the updates here:

अन्य न्यूज़