Prabhasakshi NewsRoom: Sheikh Hasina का गुस्सा फूटा, Muhammad Yunus को विदेशी कठपुतली और सत्ता का भूखा गद्दार करार दिया

Sheikh Hasina
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शेख हसीना ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति को संप्रभुता और संविधान के अस्तित्व की लड़ाई बताया। उन्होंने अपने समर्थकों से आह्वान किया कि वह विदेशी हितों की सेवा करने वाली कठपुतली सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए एकजुट हों।

भारत में निर्वासन के बाद पहली बार किसी सार्वजनिक मंच से बोलते हुए बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस पर तीखा और आक्रामक हमला बोला है। दिल्ली के फॉरेन कॉरेसपॉन्डेन्ट्स क्लब में आयोजित कार्यक्रम में शेख हसीना का पहले से रिकॉर्ड किया गया ऑडियो संदेश सुनाया गया। ऑडियो संदेश के जरिये संबोधित करते हुए शेख हसीना ने यूनुस के नेतृत्व को अवैध, हिंसक और विदेशी ताकतों की कठपुतली करार दिया। हम आपको बता दें कि सेव डेमोक्रेसी इन बांग्लादेश शीर्षक से आयोजित इस कार्यक्रम में अवामी लीग सरकार के कई पूर्व मंत्री और बांग्लादेशी प्रवासी समुदाय के सदस्य मौजूद थे। मंच पर शेख हसीना स्वयं उपस्थित नहीं थीं, लेकिन उनका संदेश खचाखच भरे हाल में गूंजता रहा। ढाका से नयी दिल्ली आने के 17 महीने बाद भारत में अपने पहले सार्वजनिक भाषण में अवामी लीग की नेता शेख हसीना ने यह भी कहा कि बांग्लादेश को संयुक्त राष्ट्र से पिछले वर्ष की घटनाओं की निष्पक्ष जांच करने का आग्रह करना चाहिए।

शेख हसीना ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति को संप्रभुता और संविधान के अस्तित्व की लड़ाई बताया। उन्होंने अपने समर्थकों से आह्वान किया कि वह विदेशी हितों की सेवा करने वाली कठपुतली सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए एकजुट हों। शेख हसीना ने कहा कि आज बांग्लादेश एक खाई के किनारे खड़ा है। अपने भाषण की शुरुआत उन्होंने मुक्ति संग्राम और अपने पिता शेख मुजीबुर रहमान की विरासत को याद करते हुए की। उन्होंने कहा कि देश को एक विशाल कारागार, मृत्युभूमि और भय की घाटी में बदल दिया गया है। शेख हसीना ने कहा कि पांच अगस्त 2024 को उन्हें सत्ता से हटाया जाना किसी सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी।

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शेख हसीना ने आरोप लगाया कि उस दिन के बाद से बांग्लादेश आतंक के युग में धकेल दिया गया है और लोकतंत्र को निर्वासन में भेज दिया गया है। मानवाधिकार रौंद दिए गए हैं, प्रेस की स्वतंत्रता समाप्त कर दी गई है और महिलाओं तथा अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को खुली छूट दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि आज देश में न जीवन सुरक्षित है न संपत्ति। कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। राजधानी से लेकर गांवों तक भीड़ की हिंसा, लूट और वसूली का बोलबाला है।

अपने भाषण के सबसे तीखे शब्द शेख हसीना ने व्यक्तिगत रूप से यूनुस के लिए सुरक्षित रखे थे। उन्होंने यूनुस को हत्यारा फासीवादी, सूदखोर, धन शोधन करने वाला और सत्ता का भूखा गद्दार बताया। हसीना ने आरोप लगाया कि यूनुस देश को आर्थिक रूप से खोखला कर रहे हैं और विदेशी हितों के बदले जमीन तथा संसाधन सौंपकर बांग्लादेश को बहुराष्ट्रीय टकराव की आग में झोंक रहे हैं। उनका कहना था कि राष्ट्र से विश्वासघात कर यूनुस मातृभूमि को विनाश की ओर ले जा रहे हैं। उन्होंने इसे संप्रभुता पर सीधा हमला और एक विश्वासघाती षड्यंत्र करार दिया।

शेख हसीना ने मुक्ति संग्राम समर्थक सभी लोकतांत्रिक और प्रगतिशील ताकतों से एकजुट होने की अपील की और शहीदों के रक्त से लिखे संविधान को बहाल करने का संकल्प दोहराया। भाषण का समापन जोय बांग्ला और जोय बांगबंधु के नारों से हुआ। शेख हसीना ने अवामी लीग को देश की लोकतांत्रिक और बहुलतावादी परंपराओं का एकमात्र वैध संरक्षक बताते हुए कहा कि यही पार्टी जनता को उनका छीना हुआ समृद्ध देश वापस दिला सकती है।

शेख हसीना ने अपने भाषण के दौरान राजनीतिक रूप से पांच मांगें भी रखीं। पहली, यूनुस प्रशासन को हटाकर लोकतंत्र की बहाली और निष्पक्ष चुनाव का रास्ता खोलना। दूसरी, सड़क हिंसा और अराजकता का तत्काल अंत। तीसरी, अल्पसंख्यकों और महिलाओं की सुरक्षा की पक्की गारंटी। चौथी, राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही कानूनी कार्रवाइयों का अंत और न्यायपालिका की विश्वसनीयता की बहाली। पांचवीं और अंतिम मांग थी पिछले एक वर्ष की घटनाओं की संयुक्त राष्ट्र से निष्पक्ष जांच।

देखा जाये तो शेख हसीना का भाषण केवल एक निर्वासित नेता का आक्रोश नहीं था, बल्कि यूनुस के नैतिक आवरण पर सीधा प्रहार था। जिस व्यक्ति को दुनिया ने सूक्ष्म ऋण और मानवीय अर्थशास्त्र का प्रतीक माना, वही आज अपने ही देश को भय, हिंसा और अस्थिरता में झोंक रहा है। यूनुस की छवि लंबे समय से एक ऐसे बुद्धिजीवी की रही है जो राजनीति से ऊपर खड़ा है। लेकिन सत्ता का स्वाद लगते ही यही छवि चकनाचूर होती दिख रही है। यह साफ दिख रहा है कि यूनुस ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तिलांजलि देकर विदेशी हितों और निजी महत्वाकांक्षा को प्राथमिकता दी है। इसमें कोई दो राय नहीं कि यूनुस को सत्ता की जिद छोड़कर जनता के प्रति जवाबदेह होना होगा। अन्यथा इतिहास उन्हें सुधारक नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के रूप में याद रखेगा जिसने नैतिकता की आड़ में एक पूरे राष्ट्र को संकट में डाल दिया।

हम आपको यह भी बता दें कि शेख हसीना का यह संदेश बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनावों के लिए प्रचार शुरू होने के एक दिन बाद आया है। अवामी लीग पार्टी को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है। अगस्त 2024 में सरकार विरोधी व्यापक आंदोलन के कारण 78 वर्षीय शेख हसीना को ढाका छोड़कर भारत आना पड़ा था। तब से वह भारत में रह रही हैं।

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