जयशंकर को चीन पर कौन सी चिट्ठी मिली, भारत अब क्या बड़ा कदम उठाने जा रहा है?

लेटर में कहा गया कि अगर बलचिस्तान की रक्षा और सेनाओं की क्षमता को और मजबूत नहीं किया गया और उन्हें पुराने तौरतरीकों के अनुसार अनदेखा नहीं किया जा रहा है तो यह पूरी तरह संभव है कि चीन आने वाले कुछ महीनों में बलोचिस्तान में अपनी सैन्य टुकड़ियां तैनात कर देगा। उन्होंने कहा कि 6 करोड़ बलोच लोगों की इच्छा के बिना बलोचिस्तान की धरती पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलोचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए एक अकल्पनीय खतरा और चुनौती होगी।
पाकिस्तान में एक इलाका है बलूचिस्तान। हालातों को देखते हुए कुछ एक्सपर्ट्स कहने लगे हैं कि हो सकता है किसी दिन ये दुनिया का 196वां देश बन जाए। बहरहाल बलूचिस्तान के नेता मीरियार बलोच ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक ओपन लेटर लिखा है। इस चिट्ठी में बलोच नेता ने चेतावनी देते हुए कहा कि चीन आने वाले महीनों में बलोचिस्तान में सेना तैनात कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो बलोचियों के साथ-साथ भारत के लिए भी यह खतरे की घंटी है। लेटर में कहा गया कि अगर बलचिस्तान की रक्षा और सेनाओं की क्षमता को और मजबूत नहीं किया गया और उन्हें पुराने तौरतरीकों के अनुसार अनदेखा नहीं किया जा रहा है तो यह पूरी तरह संभव है कि चीन आने वाले कुछ महीनों में बलोचिस्तान में अपनी सैन्य टुकड़ियां तैनात कर देगा। उन्होंने कहा कि 6 करोड़ बलोच लोगों की इच्छा के बिना बलोचिस्तान की धरती पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलोचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए एक अकल्पनीय खतरा और चुनौती होगी।
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बलूचिस्तान के उत्तर पश्चिम में है अफगानिस्तान, पश्चिम में ईरान और दक्षिण में विशाल समंदर। 1948 तक बलोची एक अलग आईडेंटिटी के तौर पर रहते थे। वो ब्रिटिश इंडिया का हिस्सा नहीं थे। 1948 तक बलोचिस्तान एक राजशाही था। लेकिन मार्च 1948 में पाकिस्तानी सेना भेजकर पाकिस्तानी हुकूमत ने इस इलाके पर कब्जा कर लिया। तब से बलोची समाज पाकिस्तान के खिलाफ प्रतिकार कर रहा है। पाकिस्तानी सेना के साथ तो बलोची पिछले 75 सालों से लड़ते आए हैं। पाकिस्तानी हुकूमत ने इस विद्रोह को दबाने के लिए हजारों बलोचियों को मौत के घाट उतार दिया। बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग किसी को नहीं छोड़ा। ऐसे में अगर चीनी सेना भी इस इलाके में तैनात हो गई तो बलोचियों की यह लड़ाई और कमजोर पड़ जाएगी।
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मीर यार ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के लिए मोदी सरकार की तारीफ की है। बलूच नेता ने कहा कि भारत और बलूचिस्तान के सामने खतरे वास्तविक हैं। इसलिए हमारे द्विपक्षीय संबंध भी उतने ही ठोस और कार्रवाई योग्य होने चाहिए। यानी कि बलूच नेता ने भारत से गुहार लगाई है कि चीन बलूचिस्तान में अपनी सेना तैनात करें कि उससे पहले भारत भी कोई ऐसा एक्शन ले कि जिससे चीन ये हिमाकत ना कर पाए। दरअसल भारत पहले ही सीबीसी का विरोध करता रहा है ये तर्क देते हुए कि ये पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर यानी पीओके से होकर गुजरता है और भारत की संप्रभुता सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। तो वहीं बलूच नेता मीरयार ने हाल ही में पीएम मोदी को पत्र लिखकर नई दिल्ली में बलूचिस्तान का दूत आवास खोलने की मांग की थी। इसके अलावा मई 2025 में बलूच नेता मीर यार ने आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी की घोषणा की थी। उन्होंने यूएन से बलूचिस्तान को एक संप्रभु राष्ट्र डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान के रूप में मान्यता देने की अपील की थी। जिसने मुनीर और शबाज के खेमे में हड़कंप मचा दिया था।
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दरअसल 1947 में भारत के विभाजन के समय बलूचिस्तान ने खुद को स्वतंत्र घोषित किया था। हालांकि मार्च 1948 में पाकिस्तानी सेना ने इस पर कब्जा कर लिया था। जिसे बलूच राष्ट्रवादियों ने कभी स्वीकार नहीं किया। बलूचिस्तान में आजादी के लिए कई बार बड़े-बड़े विद्रोह भी हुए जिन्होंने पाकिस्तान की नींव हिलाने का काम किया। अब देखना यह होगा कि बलूच नेता मीर यार की मांग पर भारत क्या कुछ फैसला लेता है।
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