ढाका पहुंचे जयशंकर ने क्यों नहीं की युनूस से मुलाकात? भारत के तगड़े प्लान की इनसाइड स्टोरी

हुआ यह कि ढाका पहुंचते ही एस जयशंकर ने पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया। खालिदा जिया के बेटे और बीएनबी नेता तारिक रहमान से मुलाकात की। पीएम मोदी का शोक संदेश दिया। मुलाकात गर्मजशी से हुई। लेकिन सबसे दिलचस्प यह रहा कि एस जयशंकर की यूनुस से दूरी उनका यूनुस से मुलाकात ना करना जंगल में आग की तरह फैला। खबर सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। अब सवाल उठा कि एस जयशंकर ने यूनुस को भाव क्यों नहीं दिया? क्या यह सोची समझी रणनीति है?
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बांग्लादेश की जमीन पर भूचाल ला दिया है। यूनुस के परखच्चे उड़ाते हुए भारत ने एक ऐसा काम किया है जिसने कट्टरपंथी ब्रिगेड के होश उड़ा डाले हैं। ढाका की राजनीति में एक ऐसा तूफान आने वाला है जो यूनुस और भारत विरोधियों को तबाही के रास्ते पर खड़ा करने वाला है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत के विदेश मंत्री ने बांग्लादेश में अपनी 4 घंटे की यात्रा से एक बहुत बड़ा एक्शन लिया और पूरी दुनिया को भारत का एक साफ संदेश दिया। आपने एक बात गौर की होगी कि बांग्लादेश की सरज पर जब भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर पहुंचे तो उन्होंने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस से कोई भी मुलाकात नहीं की। दूसरी तरफ एस जयशंकर के खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी कि बीएनपी के नेता तारिक रहमान से मुलाकात की तस्वीरें भी सामने आई।
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विदेश नीति में जो होते दिखता है उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है वो छिपा हुआ संदेश जो भविष्य की तमाम नीतियों का संकेत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद करीबी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ढाका पहुंचे तो थे खालिदा जिया की मौत पर शोक संवेदना व्यक्त करने लेकिन इस यात्रा से भारत ने बांग्लादेश की सरकार को टेंशन में ला दिया है। हुआ यह कि ढाका पहुंचते ही एस जयशंकर ने पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया। खालिदा जिया के बेटे और बीएनबी नेता तारिक रहमान से मुलाकात की। पीएम मोदी का शोक संदेश दिया। मुलाकात गर्मजशी से हुई। लेकिन सबसे दिलचस्प यह रहा कि एस जयशंकर की यूनुस से दूरी उनका यूनुस से मुलाकात ना करना जंगल में आग की तरह फैला। खबर सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। अब सवाल उठा कि एस जयशंकर ने यूनुस को भाव क्यों नहीं दिया? क्या यह सोची समझी रणनीति है?
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इस सवाल को लेकर विदेश नीति से जुड़े जानकार मान रहे हैं कि भारत ने ना सिर्फ यूनुस की घनघोर बेइज्जती की है बल्कि साफ-साफ बता दिया है कि भारत बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के भविष्य को संदेह से देखता है और यूनुस को सिर्फ एक अस्थाई मुखिया मान रहा है। भारत यह भी जानता है कि बांग्लादेश में चुनाव हुए तो तारिक रहमान की सत्ता में वापसी लगभग तय है। ऐसे में केयरटेकर और चीन पाकिस्तान की गोद में बैठे यूनुस से दूरी बनाने का वक्त आ गया है। यूनुस से मुलाकात ना करके भारत ने सिर्फ यूनुस को ही संदेश नहीं दिया बल्कि बीए एनपी नेता तारिक रहमान को भी बता दिया कि दिल्ली उन्हें बांग्लादेश का भविष्य मान रही है।
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भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर का तारिक रहमान से मिलना एक सोचा समझा कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि तारिक रहमान ना सिर्फ खालिदा जिया के बेटे हैं बल्कि उन्हें बांग्लादेश के अगले संभावित प्रधानमंत्री के रूप में भी देखा जा रहा है। पिछले दिनों तारीख ने जमात इस्लामी जैसे कट्टरपंथी सहयोगियों से दूरी बनाई है और वह अब बांग्लादेश फर्स्ट की बात करते हुए भी नजर आ रहे हैं। इस मुलाकात को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि भारत भविष्य के राजनीतिक विकल्पों पर नजर बनाए हुए हैं। जानकारों का कहना है कि शेख हसीना के जाने के बाद बीएनपी ने सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर दिया कि विदेश नीति पर ज्यादा बयानबाजी ना हो। खासकर भारत के मामले में और यही वजह है कि पिछले डेढ़ साल में बीएनपी के किसी भी नेता ने भारत के खिलाफ कोई भी बयान नहीं दिया। उल्टे तारिक रहमान ने पाकिस्तान समर्थित जमान को निशाने पर लिया।
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