Chai Par Sameeksha: हर बात पर नकारात्मक राजनीति और हर फैसले की आलोचना करना विपक्ष को क्यों भाता है?

नीरज दुबे ने कहा कि स्पीकर के कमरे में जाकर विपक्ष के सांसदों ने जो बातें कहीं, वह गलत है। इससे साफ तौर पर पता चलता है कि विपक्ष नकारात्मक राजनीति कर रहा है और संसदीय परंपरा को तार-तार कर रहा है। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि संसदीय परंपरा में नियम है, कानून है।
प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने संसद में जारी गतिरोध और राहुल गांधी को लेकर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज दुबे ने संसद में हंगामा को लेकर कहा कि यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि 2026 का बजट सत्र शुरू हुआ। देश को इससे बहुत उम्मीदें थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान जो हो हल्ला हुआ, प्रधानमंत्री को बोलते नहीं दिया गया, यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है। यह संसदीय परंपरा के खिलाफ है। ऐसा लग रहा है कि विपक्ष ने संसद को बंधक बना दिया है और गोरिल्ला युद्ध लड़ रहा है।
नीरज दुबे ने कहा कि स्पीकर के कमरे में जाकर विपक्ष के सांसदों ने जो बातें कहीं, वह गलत है। इससे साफ तौर पर पता चलता है कि विपक्ष नकारात्मक राजनीति कर रहा है और संसदीय परंपरा को तार-तार कर रहा है। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि संसदीय परंपरा में नियम है, कानून है। आपको उसी के अनुसार चलना होता है। नीरज दुबे ने कहा कि राहुल गांधी का बॉडी लैंग्वेज तक संसदीय परंपरा के हिसाब से नहीं है। ऐसा लगता है कि वह संसद में किसी से भिड़ने पहुंचते हैं। राहुल गांधी ऐसे लहजे का प्रयोग करते हैं जैसा कि वह किसी शाही परिवार से हो या राजा हो। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से कुर्सी पर बैठे जगदंबिका पाल को राहुल गांधी ने टारगेट किया, वह भी बिल्कुल ठीक नहीं था। भले ही वह मामला हंसी मजाक में टल गया लेकिन यह लोकतंत्र के खिलाफ है।
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नीरज दुबे ने कहा कि अगर आपके खिलाफ कोई अदालत फैसला दे दे तो आप जज के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाएंगे, अगर स्पीकर आपके खिलाफ कोई बात कह दे आप उसके खिलाफ प्रस्ताव लाएंगे, इलेक्शन कमीशन आपके हिसाब से कम ना करें तो उसके खिलाफ आप प्रस्ताव लाएंगे। यह कहीं से भी किसी भी लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। नीरज दुबे ने यह भी दावा किया कि वर्तमान में विपक्ष सिर्फ ब्लैकमेल की राजनीति कर रहा है और यह कहीं से भी ठीक नहीं है। नकारात्मक विपक्ष की भूमिका हमारे विरोधी पार्टियां निभा रही हैं जो कि हमारे जैसे लोकतंत्र देश के लिए ठीक नहीं है।
राहुल गांधी पर निशिकांत दुबे द्वारा लाए गए प्रस्ताव को लेकर जब हमने नीरज दुबे से सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि इस पर चर्चा होनी चाहिए। राहुल गांधी जो कुछ भी करते हैं, उस पर तो बात होनी चाहिए। इसके अलावा एमएम नरवाने की किताब को लेकर जो विवाद चल रहा है उसकी भी पूरी तरीके से जांच होनी चाहिए। राहुल गांधी को किताब कहां से मिली, यह बात सामने आना चाहिए। साथ ही साथ राहुल गांधी के खिलाफ जो प्रस्ताव आया है, ऐसा लगता है कि सरकार उसके साथ खड़ी है और राहुल गांधी के खिलाफ प्रस्ताव पर आने वाले दिनों में हमें संसद में चर्चा देखने को मिल सकती है।
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