Ganesh Utsav में मूर्ति न होने पर सुपारी की स्थापना क्यों, बप्पा से जुड़ा है यह विधान

हिंदू पूजा में सुपारी को देवताओं का प्रतीक माना जाता है। गणेश उत्सव में बप्पा के साथ रखी जाने वाली दो साबुत सुपारियां उनकी पत्नियों रिद्धि और सिद्धि का प्रतीक होती हैं, जो समृद्धि और सफलता दर्शाती हैं। इन्हें पवित्र करके मौली और तिलक लगाकर पूजा जाता है, जिससे घर में सुख, शांति और तरक्की आती है।
गणेश उत्सव की धूम हर जगह देखने को मिल रही है। अक्सर आपने देखा होगा कि गणेश चतुर्थी या गणेश उत्सव या फिर दीपावली पर घर में बप्पा की स्थापना करते समय पूजा की थाली में सुपारी जरुर देखी होगी। कई घरों में गणेश जी के साथ दो साबुत सुपारी भी रखी जाती हैं और उनकी पूजा की जाती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर सुपारी को ही भगवान गणेश या उनसे जुड़ी शक्तियों का प्रतीक माना जाता है?
वहीं, हिंदू पूजा-पद्धति में सुपारी को खास माना जाता है। मान्यता के अनुसार, जब किसी देवता की मूर्ति मौजूद न हो या पूजा में किसी देवता की प्रतीक के तौर पर स्थापना करनी हो, तब सुपारी का इस्तेमाल किया जाता है। आइए आपको बताते हैं इस लेख में बप्पा की पूजा में दो सुपारी किस चीज का प्रतीक है?
सुपारी का भगवान गणेश से क्या संबंध है?
पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाली सुपारी कोई सामान नहीं है, बल्कि इसे भगवान का प्रतीक (यानी उनकी मौजूदगी) मानकर पूजा की जाती है। यदि आपके घर में भगवान की मूर्ति या फोटो न हो, तो परंपरा के अनुसार सुपारी को ही भगवान मानकर पूजा कर लेनी चाहिए। गणेश जी की पूजा में भी सुपारी को बप्पा का प्रतीक मानकर उनकी स्थापना की जाती है और पूजा की जाती है।
गणेश जी के साथ दो सुपारी क्यों रखी जाती हैं?
गणेश जी की स्थापना के समय दो सुपारी रखी जाती है। असल में इसका संबंध बप्पा की पत्नियों यानी रिद्धि और सिद्धि से है। अगर आपके पास गणेश जी के साथ रिद्धि-सिद्धि की अलग से मूर्तियां नहीं है, तो नियम के मुताबिक दो साबुत (टूटी नहीं होनी चाहिए) सुपारी रखी जाती है।
- पहली सुपारी: इसे रिद्धि (समृद्धि और वैभव) का प्रतीक माना जाता है।
- दूसरी सुपारी: इसे सिद्धि (सफलता और उपलब्धि) का प्रतीक माना जाता है।
सुपारी को पूजा में क्यों चढ़ाया जाता है?
सुपारी को पूरी तरह से तैयार होने (पूर्णता) और मजबूती (स्थिरता) का प्रतीक माना जाता है। आपने देखा होगा कि सुपारी बहुत ही हार्ड और पूरी होती है, इसलिए इसे 'पक्के संकल्प' (यानी के किसी काम को पूरा करने की पक्की जिद) से जोड़ा जाता है।
- कलश स्थापना में भी सुपारी रखी जाती है, जो कि वहां मौजूद देवी-शक्ति का प्रतीक मानी जाती है।
- अलग-अलग पूजाओं में भी सुपारी का इस्तेमाल अलग-अलग भावनाओं के साथ इस्तेमाल किया जाता है।
गणेश पूजा में सुपारी कैसे रखें?
- सबसे पहले दो एकदम साफ और साबुत सुपारी ही लें।
- इन्हें आप साफ पानी या गंगाजल से अच्छे से धोकर पवित्र कर लें।
- पूजा वाली चौकी पर एक पान का पत्ता रखें या थोड़े से चावल बिछा दें।
- दोनों सुपारी को उस पर अलग-अलग रख दें।
- सुपारी पर थोड़ी लाल मौली लपेट दें।
- इसके बाद उन पर कुमकुम (रोली) और चावल लगाएं।
- सुपारी पर फूल रखें और धूप-दीप दिखाकर आरती करें।
- इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान करते हुए उनके मंत्र का उच्चारण करते हुए। इसके साथ ही रिद्धि-सिद्धि का नाम लेकर घर में सुख-शांति, तरक्की और हर काम में सफलता के लिए प्रार्थना करें।
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