31 अगस्त को Kajari Teej, Bahula Chauth और Sankashti Chaturthi का महासंयोग, जानें धार्मिक महत्व और शुभ मुहूर्त

Triple Festival Conjunction on Aug 31
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31 अगस्त 2026 को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में कजरी तीज, बहुला चौथ और हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का दुर्लभ संयोग बन रहा है जो आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण है। इस महासंयोग के दौरान भगवान शिव, श्री कृष्ण और गणेश जी की आराधना से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होगी और कजरी तीज का व्रत उदया तिथि के अनुसार फलदायी माना जाएगा।

हिंदू धर्म में व्रत-त्योहार का विशेष महत्व है। वैसे श्रावण मास का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है, जबकि भाद्रपद का महीना भगवान गणेश, भगवान श्री कृष्ण और श्रीविष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। 

इस साल सावन का महीना 28 अगस्त 2026 को श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन समाप्त हो जाएगा। इसके अगले दिन यानी 29 अगस्त, 2026 शनिवार के दिन भाद्रपद मास की शुरुआत होगी। भादो की शुरुआत में कुछ खास पर्व का एक साथ संयोग बन रहा है।

31 अगस्त को एक साथ तीन-तीन पर्व

हिंदू पंचांग के मुताबिक, 31 अगस्त 2026 सोमवार का दिन भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी  तिथि के दिन एक साथ तीन पर्व का शुभ संयोग बन रहा है।

वैसे इस दिन कजरी तीज का व्रत रखा जाएगा, बहुला चौथ और हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब एक ही दिन प्रमुख तिथि या पर्व एक ही साथ पड़ती है, तो उसका आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

कजरी तीज, बहुला चौथ और हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी क्या है?

इस बार 31 अगस्त को कजरी तीज, बहुला चौथ और हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का शुभ संयोग बन रहा है- 

कजरी तीज 

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज मनाई जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार भादो मास की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 30 अगस्त को शुरु होकर अगले दिन 31 अगस्त को सुबह 8 बजकर 52 मिनट पर होगी। उदया तिथि के अनुसार, इस साल कजरी तीज 31 अगस्त को मनाई जाएगी।

बहुला चौथ

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर बहुला चौथ मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती है और भगवान श्री कृष्ण, गणेश जी और गौ माता की विशेषकार पूजा करते हैं।

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी

सनातन धर्म में भगवान गणेश को चतुर्थी तिथि समर्पित है। हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी भाद्रपद मास की चतुर्थी तिथि पर ही मनाई जाती है। यह पर्व भगवान गणेश के हेरम्ब स्वरुप को समर्पित है। वैसे इस साल यह व्रत 31 अगस्त को रखा जाएगा। इस दिन साधक संकटो और पापों से मुक्ति पाने के लिए रात में चंद्रमा के दर्शन जरुर करें, इसके बाद ही व्रत का पारण करें। 

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