Sawan Tradition: सावन में बेटियों का घर आना क्यों माना जाता है सौभाग्य? जानिए सोलह श्रृंगार और Gifts का महत्व

सावन में शादीशुदा बेटियों के मायके आने से रिश्तों में इसका सकारात्मक प्रभाव दिखता है। वहीं कई घरों में आज भी इस परंपरा का पालन किया जाता है। परिवार के सदस्यों को भावनात्मक और मानसिक सुख मिलता है।
सावन के पवित्र महीने में सिर्फ भगवान शिव की आराधना ही नहीं बल्कि पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का भी अच्छा मौका होता है। धार्मिक और लोक मान्यताओं के मुताबिक सावन के महीने में शादीशुदा महिलाओं को अपने मायके जरूर जाना चाहिए। शादीशुदा महिलाओं के सावन में मायके आने के पीछे यह तर्क दिया जाता है कि ऐसा करने से बेटी का अपने मायके वालों के साथ रिश्ता मधुर होता है।
इसके साथ ही ऐसा करने से रिश्तों में सकारात्मक प्रभाव दिखता है। वहीं कई घरों में आज भी इस परंपरा का पालन किया जाता है। वहां पर बेटियों का सौभाग्य परिवार की सुख-समृद्धि और उन्नति पर अच्छा असर दिखाता है।
बेटियों के मायके आने का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि विवाह के बाद शादीशुदा बेटियों को सावन के पवित्र महीने में अपने मायके जरूर आना चाहिए। इससे परिवार के सदस्यों को भावनात्मक और मानसिक सुख मिलता है। अक्सर यह देखने को मिलता है कि जब लड़की की शादी हो जाती है, तो उसका मायका काफी सूना हो जाता है।
इसलिए माना जाता है कि सावन में शादीशुदा बेटियों के मायके आने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बरकरार रहती है। देखा जाए, तो इस परंपरा को नव-विवाहित बेटियों के लिए बड़ा खास माना जाता है। लेकिन जिन भी महिलाओं की शादी को लंबा समय हो चुका है, वह भी इस परंपरा का पालन करती हैं।
पहली बार मायके आई बेटी का ऐसे करें स्वागत
सावन के महीने पर बेटी के ससुराल से मायके आने पर उनका स्वागत पवित्रता और सादगी के साथ करें। वहीं बेटी की दहलीज पर सबसे पहले आरती उतारें।
इसके बाद बेटी के माथे पर रोली, अक्षत और चंदन लगाएं।
बड़े से पात्र में बेटी के पैरों को साफ पानी से धोकर अच्छे से पैरों को पोंछे।
फिर सावन से जुड़े खास पकवान जैसे खीर, मालपुआ और घेवर जैसे मिष्ठान खिलाकर बेटी का मुंह मीठा कराएं।
इसके बाद शादीशुदा बेटी के हाथों से घर में तुलसी का पौधा लगवाना भी शुभ माना जाता है। फिर बेटी को सोलह श्रृंगार का सामान भेंट करें।
अन्य न्यूज़













