पौधारोपण करना एक कला है (व्यंग्य)

सबसे ज़रूरी काम तो पौधारोपण की तैयारी करना होता है। क्षेत्र के राजनीतिक रूप को सर्वोपरि परखा जाता है। भौतिक स्वरूप और जलवायु ध्यान में रखना होता है। मिटटी, धूप, हवा के अध्ययन के साथ साथ पौधों के बीच उचित दूरी रखने बारे सोचना पड़ता है। सही माप के गड्ढे खोदकर, खाद वगैरा मंगाने की योजना बनती है।
बरसात के मौसम में ऐसे कई पुराने वृक्ष जड़ समेत उखड़ जाते हैं जिन्हें काट देने बारे शहर के वरिष्ठ जन, सोशल और प्रिंट मीडिया, सख्त कार्रवाई करने वाले प्रशासन और समाज के हक में निर्णय लेने वाले शासकों से बार बार निवेदन कर चुके होते हैं। शुभ मुहर्त न निकलने के कारण इस छोटे से मसले पर कोई बड़ा फैसला नहीं हो पाता। फैसला ले सकने वाले आश्वस्त होते हैं कि किसी न किसी बरसात में बारिश और हवा सहयोग करेंगे और बिना स्वीकृति के वृक्षों का काम तमाम हो जाएगा। इस कुदरती निर्णय का यह फायदा होता है कि सभी सरकारी कर्मचारी और अधिकारी फालतू काम से बच जाते हैं। उनके पास साल भर करने के लिए दूसरे ज़रूरी काम भी तो होते हैं।
सबसे ज़रूरी काम तो पौधारोपण की तैयारी करना होता है। यह आसान काम नहीं है। क्षेत्र के राजनीतिक रूप को सर्वोपरि परखा जाता है। भौतिक स्वरूप और जलवायु ध्यान में रखना होता है। मिटटी, धूप, हवा के अध्ययन के साथ साथ पौधों के बीच उचित दूरी रखने बारे सोचना पड़ता है। सही माप के गड्ढे खोदकर, खाद वगैरा मंगाने की योजना बनती है। मुख्य अतिथि का चुनाव करना होता है जिसे वन संरक्षण और पर्यावरण प्रेम बारे ज्यादा पता हो न हो लेकिन वह समय पर पहुंच जाए । पौधा लाना फिर उसे उचित जगह लगाने के लिए नियमानुसार करना मुश्किल सा लगता है। पौधा लगाना फिर आसान लगता है बाद में देखभाल करना, पानी देना वगैरा तो मेहनत भरा परेशान करने वाला काम होता है।
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आजकल ऐसी जगह चुनना सुरक्षित होता है जहां पहले से ही पेड़ लगे हों नए पौधे लगाने के लिए जगह न बची हो। फिर भी जगह बनाकर कुछ पौधे लगाने ही पड़ते हैं। काम ज़िम्मेदारी का है इसलिए समारोह भी रखना पड़ता है जिसका उद्घाटन कोई उच्चाधिकारी ही कर सकता है । विपक्षी पार्टी द्वारा भी पौधा लगाने की परम्परा है लेकिन शासक और विपक्षी, दोनों पार्टियां एक समारोह में साथ साथ नहीं उपस्थित नहीं हो सकती । राष्ट्रीय परम्परा ही ऐसी है। सामाजिक संस्थाएं भी हर साल पौधारोपण करती हैं ताकि उनका एक प्रोजेक्ट संपन्न हो जाए।
उच्च सरकारी अधिकारी ने हुक्म जारी किया कि उस दिन ऐसी पोशाक पहनी जानी चाहिए जिससे हमारे प्रकृति प्रेम का सामाजिक प्रसार हो और दूसरों को भी प्रेरणा मिले। उन्होंने बाज़ार से अपने कर कमलों में पहनने के लिए हरे रंग के बढ़िया दस्ताने, हरे रंग की टी शर्ट और हरे रंग की कैप भी खरीदी। सफ़ेद नेकर और सफ़ेद जूते उनके पास पहले से थे। स्वाभाविक है जिन अन्य लोगों ने समारोह में आना ही था उन्होंने भी हृदय से उनका अनुकरण किया । सम्बंधित खर्चों का भुगतान जहां जहां से संभव हो सकना था शालीनता से हो गया।
जिस दिन लगभग डेढ़ दर्जन लोगों ने पौधारोपण समारोह में भाग लिया उस दिन मौसम हलके बादलों वाला रहा। बारिश बिलकुल नहीं हुई। ऐसा मौसम फोटो खींचने के लिए उत्तम बताया जाता है। शायद इसलिए सभी के चित्र उच्चकोटि के आए। फेसबुक, व्ह्ट्सएप, इंस्टाग्राम जैसे बागों में भी पौधारोपण हो गया। समारोह का नाम पौधारोपण समारोह रहा लेकिन लगाए गए वृक्ष क्यूंकि वह आसान था । एक बार तो ऐसा लगा कि पौधारोपण भी एक कला है।
- संतोष उत्सुक
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