कब होनी चाहिए बारिश (व्यंग्य)

कब होनी चाहिए बारिश (व्यंग्य)

क्षेत्र के विकास प्रणेता ने समझाया, बारिश नहीं सोच ही समस्या है। संसार का विनाश निश्चित है तो व्यर्थ चिंता क्यूं। विकास एक सतत प्रक्रिया है, जारी रहेगी तभी तो देश आगे बढ़कर विश्वशक्ति व विश्वगुरु बनेगा। विकास से राजनीतिक, धार्मिक, जातीय, क्षेत्रीय व निजी समृद्धता आएगी।

बारिश से बचते, ऑफिस पहुंचते और संभलते हुए जनाब को थोड़ा वक्त लग गया। हमने आत्मीयता दिखाकर पूछा, परेशान लग रहे हैं, क्या हुआ। बारिश, हमेशा ग़लत वक़्त पर आती है, ऐन वक्त पर ऊपर वाले ने पानी पानी कर दिया, जनाब बोले। हमने पूछा, कब होनी चाहिए बारिश। जवाब स्पष्ट था, दिन में दस बजे के बाद हो जाए, रात को दस बजे के बाद हो तो और अच्छा। ठीक कहा, बारिश अब हमारी मर्ज़ी से होनी चाहिए। बारिश का ग़लत समय पर आना तो ग़लत है ही, अपनी मर्ज़ी से कहीं भी बरस लेना, ज़्यादा ग़लत है। किसानों को भरमाते, तरसाते रहना फिर तैयार या खेत में पड़ी, कटी फसल पर पानी फेरना तो ऊपर वाले की मनमानी है।

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हमने सोचा एक लघु वैबचर्चा करवा लेते हैं। नेताजी कुछ न बोलें, हो नहीं हो सकता। बोले, दिल से कहूं तो बारिश बहुत रोमांटिक चीज़ है। दिमाग़ से कहूं तो बारिश अब परेशान करती है। परेशान जनता हमें परेशान करती है। हम भी इंसान हैं, हमें बीपी हो जाता है, ग़लत बात है उपर वाले की। एक बात और नोट कीजिए, हमेशा व्यवस्था को कोसते रहना अब असवैंधानिक है, सावधान रहें। बारिश से खुश पर्यावरण मित्र बोले, पर्यावरण प्रेमियों ने एकजुट होकर जल, थल, नभ, अग्नि और वायु जैसे जीवन तत्वों को खूब संवारा जबकि अनेक लोग पोस्टरबाज़ी, दिखावा, प्रतियोगिता व नारेबाज़ी खूब करते हैं। पर्यावरण बचाना अब मनोरंजक धुन है जिस पर सब ठुमका लगा रहे हैं। 

क्षेत्र के विकास प्रणेता ने समझाया, बारिश नहीं सोच ही समस्या है। संसार का विनाश निश्चित है तो व्यर्थ चिंता क्यूं। विकास एक सतत प्रक्रिया है, जारी रहेगी तभी तो देश आगे बढ़कर विश्वशक्ति व विश्वगुरु बनेगा। विकास से राजनीतिक, धार्मिक, जातीय, क्षेत्रीय व निजी समृद्धता आएगी। व्यवस्था विरोधी कहते रहते है कि इंसान की गलती के कारण बारिश कम या ज्यादा होती है। बारिश न भी हो क्या फर्क पड़ता है यार, संसार में तीन चौथाई पानी है जिसे विकास रथ में कहीं भी पहुंचाया जा सकता है। यह काम वृक्ष लगाने से ज़्यादा आसान है। कौन पौधे लाए, पौधारोपण के लिए जगह खोजे, लगाए, हाथ गंदे करे और उस दिन का इंतज़ार करे कि पौधे पेड़ बनेंगे और बारिश करवाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। अभी तो पौधों के लिए पानी मुहय्या कराना भी पंगा है। थैंक गॉड हमारे पीने के लिए मिनरल वाटर है।

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सबने सही फ़रमाया। हमें कुछ भी ऐसा नहीं चाहिए जो परेशानी पैदा करे तभी तो दिमाग़ से चाहते हैं जीवन अमृत देने वाली बारिश अब हमारी मर्ज़ी से हो। कलासंस्कृति प्रेमी पत्नी के अनुसार सही प्रेरणा लेने देने के लिए प्रशासन को हर शहर में गायन व डांस का मासिक राष्ट्रीय आयोजन करवाना चाहिए जो मिनरल वाटर बाटलिंग कंपनी द्वारा प्रायोजित हो। मंत्री या अनुभवी नेता के संबधी को यह नैतिक ज़िम्मेवारी पकड़ लेनी चाहिए जो गंगा के पानी की तरह इस संभावित प्रोजेक्ट को सुफल बनाने में दिनरात को पानीपानी कर डाले। इस सन्दर्भ में ‘इंडियन वाटर आइडल’ का आयोजन सक्रिय भूमिका निभा सकता है जिसके पुरस्कार वरुणदेव के मेकअप में कुटिल राजनेता के हाथों दिए जाने चाहिए।

- संतोष उत्सुक