• आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी इंसानी दिमाग की तरह काम करने वाली मशीनों की दुनिया, जानें इसके फायदे और नुकसान

अभिनय आकाश  Sep 25, 2021 17:18

दो शब्दों को मिलकर बने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अर्थ पर आते हैं। इसका मतलब है मानव निर्मित सोच शक्ति। आसान भाषा में कहें तो एक ऐसी तकनीक जो हमारी तरह की सोच सके, काम कर सके, व्यवहार कर सके, समस्या सुलझा सके, उसमें कुछ भी सीखने व निर्णय लेने की क्षमता हो।

आपको घर-घर में चर्चित चाचा चौधरी, का किरदार तो जरूर याद होगा, जो बच्चों और बड़ों सभी में समान रूप से प्रिय था।  चाचा चौधरी के बारे में मशहूर पंचलाइन थी ‘चाचा चौधरी का दिमाग कंप्यूटर से भी तेज चलता है’। इसके बाद के वर्षो में आई रजनीकांत की फिल्म रोबोट। जिसमें चिट्ठी रोबो की तरह हर काम करता है, ये सबकुछ सिर्फ एक दुरुस्त AI प्रोग्रामिंग के जरिए ही मुमकिन हो पाया था। लेकिन ये सब तो हो गई काल्पनिक पात्रों की बातें। अब आपको थोड़ा वास्तविकता से भी रूबरू करवाते हैं। 28 अगस्त की तारीख मजेंटा लाइन पर बोटेनिकल गार्डन से जनकपुरी पश्चिम के बीच दिल्ली मेट्रो अपनी रफ्तार भरता है। जिसका उद्घाटन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से किया था। लेकिन इस ट्रेन में सवार अधिकतर लोगों को पता ही नहीं था कि वे देश की पहली ड्राइवरलेस ट्रेन में सफर कर रहे थे। जिसे एक स्मार्ट सिस्टम चला रहा था। आदमी जो स्वाभाविक तौर पर करता है वही अब मशीनों को सिखाया जा रहा है। उन्हें इंसानी फितरत को समझना भी सिखाया जा रहा है। इसका मतलब है कि कुछ कामों के लिए इंसानी दखल की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। कुछ वर्ष पहले तक आपको किसी चीज़ की कीमत चुकाने के लिए या खरीदारी करने के लिए कैश लेकर चलना पड़ता था। नगद पैसे की जरूरत होती थी। लेकिन उसके बाद क्रेडिट या डेबिट कार्ड आ गए। अब आप अपने मोबाइल फोन की मदद से बहुत आसानी से पेमेंट कर सकते हैं। हालांकि भविष्य में ऐसा करने के लिए आपको मोबाइल फोन की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि तब आपके शरीर मे ही ऐसा चिप लगा होगा जो आपका क्रेडिट कार्ड भी होगा डेबिट कार्ड भी एनएफसी सपोर्ट भी और ऑफिस का पंचिंग कार्ड भी होगा। टेक्नोलॉजी के दौर में हम 5वीं जनरेशन में हैं और इसकी सबसे बड़ी देन है आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस यानी एआई। अगर आप एआई को सिर्फ रोबोट से जोड़ रहे हैं तो ऐसा नहीं है। बल्कि रोबोट ऐसी मशीन है जिसमें एआई प्रोग्राम फीड किए जाते हैं ताकि वो बेहतर तरीके से परफॉर्म कर सके। 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है

सबसे पहले इस दो शब्दों को मिलकर बने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अर्थ पर आते हैं। इसका मतलब है मानव निर्मित सोच शक्ति। आसान भाषा में कहें तो एक ऐसी तकनीक जो हमारी तरह की सोच सके, काम कर सके, व्यवहार कर सके, समस्या सुलझा सके, उसमें कुछ भी सीखने व निर्णय लेने की क्षमता हो, एक ऐसा इंटेलिजेंस सिस्टम जो इन सारी कामों को कुशलता पूर्वक कर सके। एक तरह का अपने आप में कंपलीट पैकेज जो मानव बुद्धिमत्ता के बराबर का हो। इंसान और मानव के बीच में इंटेलिजेंस के घेरे को खत्म करने का काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से किए जाने की कोशिश है। एक तरह से कहे तो मशीन में इंटेलिजेंस डालने का काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस करती है। 

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कहां-कहां हो रहा इस्तेमाल

हाल ही के समय में इसका दायरा बढ़ा है और कहा ये जा रहा है कि भविष्य में ये हर वो काम कर सकेंगी जो एक इंसान करता है। टेक कंपनी के जितने भी स्पीकर आ रहे हैं उसमें वर्चुअल असिस्टेंस ऑपरेटिंग सिस्टम होती है। जैसे एप्पल का सीरी हो गया, अमेजॉन का एलेक्सा है, गूगल असिस्टेंस है। इसमें जो भी आपके सवाल या मांग है उसे सर्च करते कुछ सेकेंड के भीतर ही ये आपके सामने उपस्थित करता है। हमारे स्मॉर्टफोन को ही ले लीजिए। जो भी आप देखते हैं या सर्च करते हैं। उसके रिलेटेड ही आपको पोस्ट आती है या विज्ञापन दिखते हैं। इसके पीछे भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ही अल्गोरिदम काम करता है। इसके अलावा ड्राइवरलेस  स्मार्ट कार आ रही हैं। नए-नए ह्यूमन रोबोट आए जो इंसान के भाव और व्यवहार को समझ सकते हैं। हेल्थ केयर में भी काफी सारे बदलाव आएं हैं और कई मशीनरी आई जो सर्जिकल में सहायता देती है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे आसपास हर जगह है। भाप के इंजन, बिजली और इंटरनेट जैसी किसी भी सामान्य तकनीक की तरह। यह हमारे आसपास इस कदर फैली है कि हमें इसकी मौजूदगी का एहसास तक नहीं होता। 

कब हुई इसकी शुरुआत

इंसानी सभ्यता के शुरुआती काल में ही मशीनों के जरिये काम लेने की कोशिशे शुरू हुई। इंसानी सभ्यता का जैसे-जैसे विकास हुआ और एक दूसरे से मजबूत बनने की होड़ शुरू हुई। मशीनों को लेकर इंसान की कल्पना आसमान से आगे जाने लगी। समय के साथ इंसान ने खुद को इस लायक मानना शुरू कर दिया कि वो विज्ञान के जरिये अपनी कल्पनाओं को साकार कर सके। सन 1955 में जॉन मेकार्थी ने आधिकारिक तौर पर इस तकनीक को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नाम दिया था। आपको बता दें कि जॉन मेकार्थी अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक थे। मशीनों को स्मार्ट बनाने के लिए उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को परिभाषित किया था। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जनक जॉन मैकार्थी के अनुसार यह बुद्धिमान मशीनों, विशेष रूप से बुद्धिमान कंप्यूटर प्रोग्राम को बनाने का विज्ञान और अभियांत्रिकी है अर्थात् यह मशीनों द्वारा प्रदर्शित की गई इंटेलिजेंस है। इसके ज़रिये कंप्यूटर सिस्टम या रोबोटिक सिस्टम तैयार किया जाता है, जिसे उन्हीं तर्कों के आधार पर चलाने का प्रयास किया जाता है, जिसके आधार पर मानव मस्तिष्क काम करता है।

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कितने प्रकार के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस 

पूर्णतः प्रतिक्रियात्मक- यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सबसे पुरानी फॉर्म है। जिसमें मशीन पुराने डेटा को एकट्ठा करने में सक्षम नहीं होती औऱ निर्णय लेने के लिए पिछले अनुभवों का इस्तेमाल भी नहीं कर सकती। यह लिमेटेड डेटा स्टोर करके प्रतिक्रिया देती है। जैसे कि उदाहरण के रूप में 1997 के साल में आईबीएम ने शतरंज खेलने वाला डीप ब्लू सुपर कंप्यूटर जिससे उस वक्त के मशहूर खिलाड़ी गैरी कास्परोव को हराया था। इस सुपर कंप्यूटर में मेमोरी को स्टोर करने की सुविधा नहीं दी गई थी। डीप ब्लू ने विरोधी की वर्तमान चाल को देखते हुए खेल खेला था।

सीमित स्मृति- इस फॉर्म की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पिछले समय का डेटा स्टोर करती है और पुराने डेटा का इस्तेमाल करके भविष्य में होने वाली गतिविधियों के बारे में बताती है। दिलचस्प बात यह है कि यह प्रणाली खुद सीखने और फैसला लेने में सक्षम है।

मस्तिष्क सिद्धांत- इस प्रकार की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीनों द्वारा मानव मस्तिष्क की सीमा तक पहुंच गई है। इस समय कई मशीन वॉयस असिस्टेंट के तौर पर काम कर रही हैं। फिलहाल, इस प्रकार पर काम चल रहा है।

आत्म-चेतन- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस प्रकार पर काम चल रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रणाली के आने से रोबोट्स इंसानों की तरह यह जान सकेंगे कि उनका वजूद क्या है। इसके बाद इंसानों और मशीनों में कोई अंतर नहीं रह जाएगा।

आर्टिफिशिलय इंटेलिजेंस किन स्किल पर काम करती है

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए जो तकनीक इस्तेमाल होती है वो है मशीन लर्निंग, जिसका सीधा सा मतलब है मशीन या कंप्यूटर को सीखाने की तकनीक। जैसे जब एक बच्चा पैदा होता है तो उसे चलना, बोलना, भागना, पढ़ना सीखाया जाता है। इसी तरह कंप्यूटर को आर्टिफिशियली इंटेलिजेंट बनाने के लिए उसे सबकुछ मशीन लर्निंग के जरिये सीखाया जाता है। मशीन लर्निंग के जरिये प्रोग्राम हजारों-हजार डेटा बेस का खुद अध्यन करके एक अल्गोरिदम बनाता है और जरूरी नतीजा मिलने के बाद और स्मार्ट होता जाता है। जिसके बाद सेल्फ-करेक्शन प्रोसेस के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिदम को अपने-आप ठीक करती है, ताकि यूजर्स को सटीक परिणाम मिल सकें।

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आने वाले समय में दिखेंगे कई बड़े बदलाव

ऑनलाइन सर्च जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने सबकुछ अपने काबू में ले रखा है। यह हमें जरूरी विकल्प देता है और अंदाजा भी लगा लेता है कि हम क्या खोज रहे हैं। ऐसी तकनीक अब बहुत ज्यादा अपनाई जा रही है औऱ इसलिए हम इस पर ध्यान भी नहीं देते। हमारे बर्ताव के हिसाब से ओटीटी प्लेटफॉर्म हमें फिल्मों का सुझाव देते हैं, म्यूजिक ऐप हमारे लिए प्लेलिस्ट बना देते हैं। हाथ में पहननेवाली डिवाइस हमारे हर दिन उटाए गए कदम गिनकर बताती है। गूगल मैप हमें सबसे अच्छा रूट बताती है। रास्ते में आने वाले पेट्रोल पंप और रेस्तरां की भी जानकारी देती है। इस दौर से एक कदम आगे की बात करें तो आने वाले समय में मशीनों पर आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी की पकड़ काफी मजबूत हो जाएगी। ऐसे में कई सारे बदलाव देखने मिलेंगे. जैसे कि मेडिकल सेक्टर में ऑपरेशन्स करने के रोबो की मदद ली जाएगी, ऐसे में इलाज कम समय में और बेहतर तरीके से हो सकेगा। आर्मी में रोबो इस्तेमाल किये जा सकते हैं, इससे इंसानों की जान पर आने वाला खतरा टल जाएगा. घर के रोजमर्रा के काम रोबो से करवाए जाएंगे। इसके अलावा एडुकेशन और दूसरे सेक्टर में ये टेक्नोलॉजी काम आएगी।

ईरान के परमाणु प्रमुख की हत्या

ईरान के परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह की हत्या रिमोट कंट्रोल वाली मशीनगन से की गई थी। अमेरिकी अखरबार न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह की हत्या में इजरायल खुफिया एजेंसी मोसाद शामिल थी और हत्याकांड को रिमोट कंट्रोल से चलने वाली मशीन गन की मदद से अंजाम दिया था। चेहरे की पहचान करने वाले सॉफ्टवेयर ने बगल में ही उनकी पत्नी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया।

इसके फायदे व नुकसान

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से देश के मेडिकल सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है। इस तकनीक से एक्सरे रीडिंग जैसे तमाम काम आसान हो जाएंगे। डॉक्टर्स को अनुसंधान में मदद मिलेगी। स्पोर्ट्स के क्षेत्र को भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बहुत फायदा होगा। खिलाड़ी इस तकनीक के जरिए अपनी परफॉर्मेंस पर नजर रख सकेंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से स्कूल और कॉलेज से लेकर कृषि के क्षेत्र से जुड़े लोगों को बहुत फायदा होगा। लेकिन हर तरह की तकनीक में नेगेटिव तत्व भी होते हैं।' इस तकनीक की मदद से बहुत सारा डेटा जमा किया जा रहा है। यह डेटा हमें निर्देश देता है और सिफारिश भेजता है कि हम क्या करें, कैसे करें हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में इसका काफी दखल है। कोरोना से बचने की सलाह देने वाले लिंक भी ऐसे हो सकते हैं जो किसी की बैंक डिटेल में तांकझांक कर दें। साइबर क्रिमिनल भी AI का इस्तेमाल करते हैं। इसकी मदद से वे खास तरह के यूजर्स का पता लगाते हैं और उनके डेटा पर नजर रखते हैं। वे बैंक अकाउंट की जानकारियां ले सकते हैं और नेटवर्क में अड़चन पैदा कर सकते हैं। इतना ही नहीं AI को किसी के बिहेवियर का समझने के लिए ट्रेनिंग दी गई है। इस ऐल्गोरिदम किसी को खुफिया डेटा देने के लिए भी ट्रेंड किय सकता है। AI अपने बारे में जागरूक नहीं हो इसलिए यह अच्छे और बुरे में अंतर नहीं सकती। यह सिर्फ दी गई ट्रेनिंग के हिस से काम करती है।

बहरहाल, इंसान ने अपनी बुद्धि से कई नामुमकिन चीजों को मुमकिन बना दिया। 1950 के दशक में शुरू हुआ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ये सफर सात दशकों में काफी आगे पहुंच गया। और अब इंसान अपने सहयोगी और सहायता के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नये-नये तरीकों का विकास करने में लगा हुआ है। -अभिनय आकाश