चीन vs ताइवान, युद्ध का नया मैदान, 1.5 लाख सैनिक, 953 जहाज, हमले का सीक्रेट प्लान हुआ डिकोड

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Prabhasakshi
अभिनय आकाश । May 26, 2022 6:25PM
चीन ने अपने विस्तारवाद के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए अब ऐसी साजिश रची है जिसकी लपट बुरी दुनिया को सुलगाने के लिए काफी है। चीन ताइवान पर हमला करेगा इस बात की आशंका तो बहुत पहले ही जताई जा रही थी। लेकिन चीनी सेना की बातचीत का एक ऑडियो लीक होने से इस बात मुहर लग गई है।

यूक्रेन में धरती फाड़ धमाके के बीच रूस ये धौंस जमाता आया है कि वो किसी भी वक्त एटम बम का ट्रिगर दबा सकता है। दुनिया को ये कहकर धमकाता रहा है कि रूस पर किसी भी तरह के हमले के हालात में इंतकाम का हथियार न्यूक्लियर बम ही होगा। जाहिर है एक तरफ रूस का एटमी जुनून है तो दूसरी तरफ चीन का वॉर प्लान सामने आया। दुनिया जानती है कि चीन से बड़ा चालबाज कोई नहीं है। विस्तारवादी सोच वाला ड्रैगन मौका देख कर रंग बदलने में माहिर है। यूक्रेन रूस के विध्वंसक युद्ध के बीच चीन की नजर ताइवान पर है। चीन ने अपने विस्तारवाद के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए अब ऐसी साजिश रची है जिसकी लपट पूरी दुनिया को सुलगाने के लिए काफी है। चीन ताइवान पर हमला करेगा इस बात की आशंका तो बहुत पहले ही जताई जा रही थी। लेकिन चीनी सेना की बातचीत का एक ऑडियो लीक होने से इस बात मुहर लग गई है कि चीन ने ताइवान पर हमले का रोडमैप तैयार कर लिया है। ऐसे में आज के इस विश्लेषण में आपको बताएंगे की ताइवान पर चीन के हमले का सीक्रेट प्लान क्या है? क्यों ताइवान पर कब्जा करना चाहता है चीन? चीन और ताइवान के बीच का विवाद क्या है और अमेरिका का इस पूरे मुद्दे पर क्या स्टैंड है। 

ड्रैगन का टारगेट ताइवान

रूस और यूक्रेन के जंग के बीच एक और युद्ध का खतरा दुनिया पर मंडरा रहा है। चीन साउथ चाइना सी में वॉकर सीन क्रिएट कर रहा है। क्वाड देशों की चेतावनी के बावजूद ड्रैगन के अंदर ताइवान को निगलने की एक बेचैनी है। इसलिए कभी चीन ताइवान में अपने फाइटर जेट्स भेज रहा है। तो कभी समुंदर में वॉर ड्रिल कर प्रोपोगैंडा कर रहा है। ताइवान पर कब्जे का नकली युद्धाभ्यास भी चीन लगातार वक्त-वक्त पर करता रहा है। इन सब के बीच सबसे बड़ा सवाल कि क्या चीन और ताइवान का युद्ध अब तय हो गया है। 

ताइवान पर बड़े हमले की चीनी तैयारी 

पीएलए मीटिंग की ऑडियो लीक में बड़ा दावा किया गया है जिसका ऑडियो लीक सामने आया है। 57 मिनट के इस ऑडियो क्लिप में पीपल्स लिबरेशन आर्मी के अधिकारी ताइवान पर हमले की पूरी योजना पर बात करते सुनाई दे रहे हैं। कॉमरेड्स... ये चीन के कायाकल्प और नए युग के लिए निर्णायक लड़ाई है। इससे दुनिया की रणनीति पर भी असर पड़ेगा। नॉर्मल से पूरी तरह का युद्ध हमारे देश की निर्णायक जंग होगी। हमें जल्द सटीक रणनीति बनानी होगी। सबसे पहले समान सोच और विचारधारा वालों को साथ लाकर अपना पक्ष मजबूत करना होगा। हम ताइवान की आजादी को कुचलने के लिए युद्ध शुरू करने में हिचकेंगे नहीं। ये फैसला हालात और वक्त को देखकर लिया गया है। 

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1 लाख 40 हजार सैनिक, 20 एयर नेवल बेस तैयार 

ऑडियो क्लिप में हुई बातचीत के मुताबिक चीन 1 लाख 40 हजार सैनिक, 1358 टुकड़ियों के साथ हमले की तैयारी में है। इस हमले में 953 जहाज, 1653 मानव रहित उपकरण भी शामिल होंगे। 20 एयर नेवल बेस तैयार हैं। एयर स्ट्राइक के लिए ड्रोन हैं। समुद्री लड़ाई के लिए बोट हैं। निगरानी के लिए सैटेलाइट हैं। यहीं नहीं निगरानी के लिए ड्रोन, सैटेलाइट, बोट का प्रोडक्शन बढ़ाने का ऑर्डर दिया गया है। 14 इमरजेंसी ट्रांसफर सेंटर और 5 शिपयार्ड तैयार किए जा रहे हैं। रूस यूक्रेन जंग के बीच अमेरिका बार-बार ये दावा कर रहा है कि चीन ताइवान पर बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। ताइवान की सरहदों पर लाल सेना का बड़ा मूवमेंट है। इस खुलासे से अमेरिकी दावे की पुष्टि हुई है। 

ताइवान पर अमेरिकी राष्ट्रपति की चीन को वॉर्निंग

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन पहली बार खुले तौर पर चीन को ताइवान की तरफ बुरी नजर न उठाने की चेतावनी दे चुके हैं। एक लक्ष्मण रेखा खींचते हुए किसी भी हमले की स्थिति में डैग्रन को अंजाम भुगतने की धमकी दे चुके हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो उनका देश सैन्य हस्तक्षेप करेगा। यह पिछले कुछ दशकों में ताइवान के समर्थन में दिए गएप्रत्यक्ष एवं जोरदार बयानों में से एक है। बाइडेन ने कहा कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद स्वशासित द्वीप की रक्षा करने का दबाव ‘‘और भी बढ़ गया है।’’उन्होंने कहा कि ताइवान के खिलाफ बल प्रयोग करने का चीन का कदम ‘‘न केवल अनुचित होगा’’, बल्कि ‘‘यह पूरे क्षेत्र को विस्थापित कर देगा और यूक्रेन में की गई कार्रवाई के समान होगा।’’  

यूक्रेन के बीच ड्रैगन को दिख रहा मौका

कई छोटे देश जो अब तक अमेरिका के दम पर महाशक्तियों के खिलाफ हुंकार भरते थे अब वो भी खौफजदा हैं। नाटो तैयारी करता रहा गया और बाइडेन प्रतिबंध पर प्रतिबंध लगाते रह गए। रूस के आगे सुपर पावर के ऐसे बेबस रूप ने यूक्रेन को भी हैरत में डाल दिया। वहीं नाटो और सुपरपावर की बेबसी में चीन को अपना सबसे बड़ा फायदा दिखाई दे रहा है। अभी तक अमेकरिका ताइवान का रक्षा कवच बना हुआ था। लेकिन यूक्रेन विवाद में अमेरिका बुरी तरह उलझा है। सुपरपावर के सैनिक यूरोप के चप्पे-चप्पे पर तैनात हो रहे हैं।  मुमकिन है कि चीन ताइवान के खिलाफ मेगा मिलिट्री ऑपरेशन का ऐलान कर दे। 

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ताइवान पर चीन के हमले का पूरा प्लान:-

पर्ल घाटी की सुरक्षा के लिए सी डिफ्रेंस बिग्रेड का गठन

ऐसा नहीं है कि ताइवान पर हमले की सूरत में चीन को खुद पर जवाबी कार्रवाई का डर नहीं है। ताइवान से लगते इलाकों को सुरक्षित रखने का प्लान भी चीन की तरफ से  बनाया गया है। ऐसा ही एक जोन है पर्ल घाटी जिसमें चीन के 11 प्रमुख शहर आते हैं। घनी आबादी वाला पर्ल नदी डेल्टा इलाका चीनी इंडस्ट्री की दिल की धड़कन माना जाता है। ये चीन के 11 बड़े शहरों से मिलकर बना है। चीन को दुनिया के वर्कशॉप में बदलने का श्रेय इसी इलाके को जाता है। ग्वांगडोंग में स्थित पर्ल नदी डेल्टा को सुरक्षित करने के लिए एक सी डिफ्रेंस बिग्रेड बनाने की बात कही जा रही है। 

ड्रोन, सैटेलाइट, बोट का प्रोडक्शन बढ़ाने का ऑर्डर 

ऑडियो क्लिप में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेताओं को चर्चा करते हुए सुना जा रहा है कि, चार कंपनियों, जैसे झुहाई ऑर्बिटा, शेन्ज़ेन एयरोस्पेस डोंगफैंगहोंग सैटेलाइट कंपनी, फोशान डेलिया और जी हुआ प्रयोगशाला ने चार उपग्रह टुकड़ी का गठन किया गया है। क्लिप में अधिकारियों को यह कहते हुए सुना गया, "हमारे पास कुल 16 लो-ऑर्बिट सैटेलाइट हैं, जिनमें 0.5 से 10 मीटर ग्लोबल रिमोट अल्ट्रा-हाई ऑप्टिकल रेजोल्यूशन सेंसिंग और इमेजिंग क्षमताएं हैं।" निगरानी के लिए ड्रोन, सैटेलाइट, बोट का प्रोडक्शन बढ़ाने का ऑर्डर दिया गया है। 14 इमरजेंसी ट्रांसफर सेंटर और 5 शिपयार्ड तैयार किए जा रहे हैं। 

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15.50 हजार सैनिकों की भर्ती 

क्लिप के मुताबिक हमले की तैयारी के तहत ग्वांगडोंग प्रांत को 20 अलग अलग कैटोगिरी में युद्ध से संबंधित 239 सामग्रियों को जमा करने के लिए कहा गया था। इसमें 1.40 लाख सैन्यकर्मी, 953 जहाज, 1,653 मानव रहित उपकरण, 20 हवाई अड्डों को डॉक के साथ संपर्क जोड़ने, छह मरम्मत और जहाज निर्माण यार्ड, 14 आपातकालीन स्थानांतरण केंद्र, और संसाधन जैसे अनाज डिपो, अस्पताल, रक्त स्टेशन, तेल डिपो, गैस स्टेशन शामिल हैं। नेशनल डिफेंस मोबिलाइजेशन रिक्रूटमेंट ऑफिस को ग्वांगडोंग प्रांत के लिए नए जवानों, रिटायर्ड जवानों समेत कुल 15.50 हजार सैनिकों को भर्ती करने के लिए कहा गया है।

चीन और ताइवान विवाद का इतिहास 

चीन के साथ ताइवान का पहला संपर्क साल 1683 में हुआ था जब ताइवान, क्विंग राजवंश के नियंत्रण में आया था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इसकी भूमिका पहले चीन-जापान युद्ध (1894-95) में सामने आई, जिसमें जापान ने क्विंग राजवंश को हराया था और ताइवान को अपना पहला उपनिवेश बनाया। इस पराजय के बाद चीन कई छोटे छोटे भागों में टूटने लगा। उस दौर में चीन के बड़े नेता सुन् यात-सेन हुआ करते थे जो सभी भागों को जोड़कर पूरे चाइना को एक देश बनाना चाहते थे। चीन को एक करने के लिए सुन् यात-सेन ने 1912 में कुओ मिंगतांग पार्टी का गठन किया और रिपब्लिक ऑफ चाइना वाले अपने अभियान में वो काफी हद तक सफल भी हुए। लेकिन 1925 सुन् यात-सेन की मौत हो गई। उनकी मृत्यु के बाद कुओ मिंगतांग पार्टी दो भागों में बंट गई एक बनी नेशनलिस्ट पार्टी और दूसरी कम्युनिस्ट। नेशनलिस्ट पार्टी जनता को ज्यादा अधिकार देने की पक्षधर थी। जबकि कम्युनिस्ट का मानना था कि सरकार तय करेगी की कैसे शासन करना है। नेशनलिस्ट पार्टी पूरी तरह से उदारवादी परिकल्पना पर आधारित था जबकि उसके वनस्पद कम्युनिस्ट वन मैन शो यानी पूरी तरह से डिक्टेटरशिप पर आश्रित था। यहीं से चीन के अंदर महायुद्ध की शुरुआत होती है। 1927 में शंघाई शहर में नेशनलिस्ट पार्टी के लोगों ने कम्युनिस्ट पार्टी के लाखों लोगों का नरसंहार कर दिया, इसे शंघाई नरसंहार के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन इसने ही गृह युद्ध का रूप ले लिया। ये गृह युद्ध 1927 से लेकर 1950 तक चला। 

रूस और अमेरिका की भूमिका

चीन के इस आपसी संघर्ष का फायदा जापान ने उठाया और इसके एक बड़े शहर मंचूरिया पर कब्जा कर लिया। जापान ने वहां पर अत्याचार किया। लेकिन तब दोनों पार्टी के लोगों ने जापान के हमलों के खिलाफ एक साथ होकर इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। दूसरे विश्व युद्ध में दोनों ने जापान के खिलाफ मिलकर लड़ाई की थी। 1945 में जापान हारकर बाहर चला गया। उसे ताइवान पर से भी अपना दावा छोड़ना पड़ा। जापान के जाने के बाद दोनों पार्टियों के बीच फिर से सिविल वॉर शुरू हो गया।  पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना और रिपब्लिक ऑफ चाइना यानी चीन और ताइवान। इन दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। चीन में कम्युनिस्ट पार्टी यानी माओ त्देसेंग का शासन था। जबकि ताइवान पर नेशनलिस्ट कुओमिन्तांग यानी चियांग काई शेक का शासन था। चियांग काई शेक और माओ ज़ेदोंग के बीच चीन पर कब्जे को लेकर जंग छिड़ गई, जिसमें कम्युनिस्ट जीत जाते हैं। कहा जाता है इसमें  कम्युनिस्ट की मदद रूस ने की। उन्होंने कुओमिन्तांग को ताइवान में समेट दिया। चियांग काई शेक  अपने समर्थकों के साथ फ़ॉरमोसा द्वीप चले जाते हैं। इसे ही ताइवान के नाम से जाना जाता है। ये द्वीप पेइचिंग से लगभग दो हज़ार किलोमीटर दूर था। लेकिन इन सब के बावजूद माओ की इच्छा फिर भी पूरी नहीं हुई और वो ताइवान को भी कम्युनिस्ट बनाना चाहता था। समय-समय पर झगड़ा चलता रहा लेकिन चीन अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया। इसकी एक बड़ी वजह थी कि ताइवान के पीछे अमेरिका खड़ा था। 

 चीन सैन्य क्षमता ताइवान
 20 लाखसक्रिय सैनिक 1.7 लाख
 5.10 लाखरिजर्व सैनिक 15 लाख
1200  फाइटर प्लेन288 
912  हेलीकॉप्टर 208 
281  अटैक हेलीकॉप्टर  91
5250  टैंक 1110
35000 बख्तरबंद गाड़ियां3472 
4120  स्वचलित तोपखाना257 
79  सबमरीन
507  एयरपोर्ट 37

 -अभिनय आकाश

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