Iran में तो नहीं, लेकिन ट्रंप के White House में जरूर हो रहा रिजीम चेंज, जानिए कैसे?

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अभिनय आकाश । Apr 4 2026 12:41PM

युद्ध के बीच अमेरिका के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ रडी जॉर्ज को हटा दिया गया वही नहीं कई सारे टॉप जनरल हटा दिए गए। क्या ट्रंप अभी से इसकी तैयारी कर रहे हैं कि अगर ईरान से लड़ाई लंबी चली हार का सामना करना पड़ गया तो अमेरिका की पब्लिक का सामना कैसे करेंगे इसलिए बहाने खोजे जा रहे हैं कि नए जनरल लाए जा रहे हैं जो अब ट्रंप के आदेशों का पालन करेंगे और युद्ध में जीत दिलाएंगे।

विनय सितापति की लिखी किताब हॉफ लॉयन में एक वाक्या का जिक्र है  जब पीवी नरसिंह राव आर्थिक सुधारों को लेकर डॉ. मनमोहन सिंह से कहते हैं अगर हम सफल होते हैं, तो श्रेय मुझे मिलेगा और अगर हम असफल होते हैं, तो आपको जाना पड़ेगा। ऐसा ही कुछ भारत से किलोमीटर दूर अमेरिका के व्हाइट हाउस में देखने को मिला। जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान के साथ समझौता सफल होता है तो उसका श्रेय वह खुद लेंगे, लेकिन अगर बातचीत असफल रहती है तो उसकी जिम्मेदारी जेडी वेंस पर डाली जाएगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब जेडी वेंस बैकचैनल बातचीत (गोपनीय कूटनीतिक संपर्क) और संघर्ष विराम (सीज़फायर) के प्रयासों में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन इन सब से इथर अमेरिका में इस वक्त अलग ही उथल पुथल का माहौल है। करना था ईरान में रिजीम चेंज लेकि ऐसा मालूम पड़ता है कि ये सब अमेरिका के व्हाइट हाउस में होने लगा। युद्ध के बीच अमेरिका के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ रडी जॉर्ज को हटा दिया गया वही नहीं कई सारे टॉप जनरल हटा दिए गए। क्या ट्रंप अभी से इसकी तैयारी कर रहे हैं कि अगर ईरान से लड़ाई लंबी चली हार का सामना करना पड़ गया तो अमेरिका की पब्लिक का सामना कैसे करेंगे इसलिए बहाने खोजे जा रहे हैं कि नए जनरल लाए जा रहे हैं जो अब ट्रंप के आदेशों का पालन करेंगे और युद्ध में जीत दिलाएंगे। बदलाव ट्रंप की कैबिनेट में भी हो रहा है। कई लोगों के हटाने की चर्चाएं चल रही हैं। लेकिन पहले बात सेना की करते हैं। क्या अमेरिका के राष्ट्रपति और सेना के बीच ईरान पर हमला को लेकर एक राय नहीं थी। जमीनी चढ़ाई को लेकर एक राय अब भी नहीं। अमेरिका की सेना मोर्चे पर है और मुख्यालय में अलग ही मोर्चा खुल गया है। जिसका काम था ईरान में लीडरशिप चेंज करना। उसी के भीतर लीडरशिप चेंज का गेम खुल गया है। यह व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी वाइल्स हैं। ट्रंप के सहयोगियों से अपील कर रही हैं कि अमेरिका की जनता क्या सोच रही है इसके बारे में राष्ट्रपति को सच बताओ। उन्हें गुलाबी तस्वीरें दिखाना बंद करो कि इस युद्ध का आर्थिक और राजनीतिक असर नहीं है। आलम ये है कि  जब अमेरिकी सैन्य प्रमुख रैंडी जॉर्ज समेत कई अधिकारियों को हटाए जाने को रिजीम चेंज करार दिया है। दक्षिण अफ्रीका में मौजूद ईरान एम्बेसी ने एक इन सभी अधिकारियों की तस्वीरों पर क्रास का चिन्ह लगातार लिखा कि 'रिजीम चेंज हैपन्ड सक्सेसफुली'। इसके साथ ही उन्होंने मागा और एक हंसने वाला इमोजी भी बनाया।

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ट्रंप के खिलाफ 50 शहरों में नो किंग्स प्रोटेस्ट

50 शहरों में ट्रंप के खिलाफ नो किंग्स प्रदर्शन हुए। 80 लाख से अधिक लोग जमा हुए। क्या तब भी ट्रंप को पता नहीं चला कि लोग उनसे नाराज हैं? आम जनता के बीच उनकी रेटिंग लगातार गिर रही है। इकोनॉमिस्ट के सर्वे के अनुसार पिछले हफ्ते के मुकाबले 1.1% और गिर गई। अमेरिका के कितने सैनिक घायल हुए इसका सटीक आंकड़ा स्पष्ट नहीं है। उन्हें भी यह बात परेशान कर रही है कि घायलों की संख्या कहीं ज्यादा तो नहीं। अगर सही संख्या सामने आएगी तो ईरान के सामने अमेरिका की सेना के कमजोर पड़ने की तस्वीरें साफ-साफ दिखने लग जाएंगी। अमेरिका का ही अखबार है इंटरसेप्ट। इसके पत्रकार नेक्टर्स की रिपोर्ट है कि खाड़ी में हुए युद्ध में अब तक 750 सैनिक या तो हताहत हुए हैं या घायल हुए हैं। लेकिन पेंटागन मानने को तैयार नहीं। घायलों की संख्या कम बताई जा रही है। इंटरसेप्ट के अनुसार 27 मार्च को सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर ईरान के हमले में कम से कम 15 अमेरिकी सैनिक घायल हुए। ईरान की सेना दावा करती है कि उसके हमलों में 800 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है। ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन में 13 सैनिकों के मारे जाने की बात कही। गौर करने वाली बात ये है कि घायलों या मरने वालों की संख्या की स्वतंत्र जांच नहीं हो पा रही। अमेरिका के लड़ाकू विमानों पर हमला होता है तब भी अमेरिका स्वीकार नहीं करता कि ईरान ने टारगेट किया। कुवैत का मान लेता है कि उसने गलतफहमी में उसके तीन-तीन विमान गिरा दिए। लेकिन ईरान का स्वीकार नहीं करता। कुछ दिन पहले एनबीसी ने रिपोर्ट किया कि युद्ध की अपडेट के नाम पर ट्रंप को रोजाना हमले की हाईलाइट का 2 मिनट लंबा वीडियो दिखाया जाता है। जिन हमलों को लेकर ट्रंप इतनी बड़े-बड़े दावे करते हैं। अमेरिका की सेना मोर्चे पर है और वाशिंगटन में सेना के भीतर अलग मोर्चा खुल गया है। रक्षा सचिव पीट हेक्सेथ चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ रडीए जॉर्ज को बाहर का रास्ता दिखा देते हैं। 

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ट्रंप के इन 2 सिपहसालारों को पद से क्यों धोना पड़ा हाथ

राष्ट्रपति ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में अपने करीबियों को निकालने के पक्ष में नहीं थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि ऐसा करने से विरोधियों की जीत होगी। लेकिन ईरान के साथ युद्ध, इमिग्रेशन विवाद और गिरती अप्रूवल रेटिंग उन्हें फैसला बदलने पर मजबूर कर दिया। युद्ध के दबाव और गिरती रेटिंग के कारण ट्रंप अब उन लोगों को हटा रहे हैं जो जनता की नजरों में विवादित बन चुके हैं, ताकि वो अपनी गिरती साख को बचा सकें।

1. क्रिस्टी नोएम (पूर्व होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी)- उनके कार्यकाल में ICE एजेंटों द्वारा एलेक्स प्रेट्टी और रेनी गुड नाम के अमेरिकी नागरिकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। नोएम ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय उन्हें 'घरेलू आतंकवादी' कह दिया, जिससे जनता में भारी गुस्सा फैल गया। जुलाई 2025 में टेक्सास की बाढ़ और चक्रवात हेलेन के दौरान उनके विभाग का काम बहुत खराब रहा, जिससे सरकार की काफी किरकिरी हुई। उन पर आरोप लगा कि उन्होंने ट्रंप की अनुमति के बिना अपने करीबियों को 220 मिलियन डॉलर (करीब 1800 करोड़ रुपये) का विज्ञापन कॉन्ट्रैक्ट दे दिया। 5 मार्च, 2026 को उन्हें पद से हटा दिया गया।

2. पाम बोंडी (पूर्व अटॉर्नी जनरल)- उन्होंने न्याय विभाग की पूरी तस्वीर को ही बदल कर रख दिया और उनका मुख्य फोकस ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के दुश्मनों को टारगेट करना था। ईरान युद्ध के बाद ट्रंप की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई (नेगेटिव 23% तक)। ऐसे में ट्रंप को अपनी छवि सुधारने के लिए प्रशासन में बड़े बदलाव करने पड़े और बोंडी जैसे 'आक्रामक' चेहरों को किनारे करना पड़ा।  हालांकि, द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प के पुराने विरोधियों, जैसे कि पूर्व एफबीआई निदेशक जेम्स कोमी और न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स (दोनों ही मामलों में अमेरिकी अदालतों ने मुकदमा खारिज कर दिया था) पर मुकदमा चलाने में बोंडी की विफलता और एपस्टीन फाइलों के जारी होने के बाद उत्पन्न स्थिति को संभालने में उनकी अक्षमता ने व्हाइट हाउस में बढ़ते असंतोष को जन्म दिया। अंततः, 2 अप्रैल, गुरुवार को ट्रम्प ने पाम बोंडी को बर्खास्त कर दिया, जिससे वह एक महीने के भीतर पद से हटाई जाने वाली दूसरी कैबिनेट सदस्य बन गईं। 

ट्रंप के पर्ज की इनसाइड स्टोरी

अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ का मानना है कि अमेरिकी सेना अपनी असली ताकत खो रही थी क्योंकि वह 'डाइवर्सिटी' और 'इक्विटी' जैसे सामाजिक मुद्दों पर ज्यादा ध्यान दे रही थी। उनका मानना है कि सेना का एकमात्र लक्ष्य युद्ध जीतना होना चाहिए, न कि सामाजिक बदलाव लाना। इसी सोच के तहत उन्होंने जनरल सीक्यू ब्राउन और एडमिरल लिसा फ्रेंचेती जैसे अधिकारियों को हटाया, जिन्हें वह उदारवादी नीतियों का चेहरा मानते थे। हेगसेथ का तर्क है कि सेना को सॉफ्ट अफसरों की नहीं, बल्कि कठोर योद्धाओं की जरूरत है। उन्होंने न केवल जनरलों को बर्खास्त किया, बल्कि अश्वेत, महिला और अल्पसंख्यक अधिकारियों की पदोन्नति  पर भी रोक लगा दी है। आंकड़ों के मुताबिक, इस 'सफाई अभियान' ने रक्षा विभाग के ऊपरी स्तरों पर विविधता को काफी कम कर दिया है ताकि एक खास तरह की आक्रामक लीडरशिप तैयार की जा सके। ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अमेरिका को वह सफलता नहीं मिल रही है जिसकी उसे उम्मीद थी। ऐसे में ट्रंप और हेगसेथ को ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो उनके आदेशों का बिना किसी सवाल के पालन करें। 3 अप्रैल, 2026 को आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज और अन्य वरिष्ठ अफसरों को हटाना इसी रणनीति का हिस्सा था। हेगसेथ सेना में ऐसे वफादार लोगों को बैठाना चाहते हैं जो उनके और राष्ट्रपति ट्रंप के विजन को आंख मूंदकर लागू करें। पेंटागन के कुछ लोग हेगसेथ को डम्ब मैकनामारा कह रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि युद्ध के बीच में इतने अनुभवी जनरलों को हटाना सेना के मनोबल को तोड़ सकता है। लेकिन हेगसेथ के लिए यह 'शुद्धिकरण' (पर्ज) जरूरी है। दरअसल, रॉबर्ट मैकनामारा 1960 के दशक में (वियतनाम युद्ध के दौरान) अमेरिका के रक्षा सचिव थे। उन्हें एक अत्यधिक बुद्धिमान लेकिन जिद्दी व्यक्ति माना जाता था।

किन अधिकारियों पर गिरी गाज? 

 अधिकारी  पद  हटाने का मुख्य कारण
 जनरल सीक्यू ब्राउन ज्वाइंट चीफ्स चेयरमैन 'Woke' सेना का प्रतीक माने जाना।
 जनरल रैंडी जॉर्ज थल सेना प्रमुख स्वतंत्र सैन्य सलाह के बजाय वफादार लीडर की तलाश।
 जनरल विलियम ग्रीन जूनियरआर्मी टॉप चैपलिन सेना के नैतिक और धार्मिक नेतृत्व को विचारधारा के अनुसार ढालना।
जनरल जेफरी क्रूस DIA प्रमुख खुफिया जानकारी को प्रशासन की युद्ध नीतियों के साथ सिंक करना।

ट्रंप के निशाने पर अगला कौन?

क्रिस्टी नोएम और पाम बोंडी की बर्खास्तगी वाशिंगटन डीसी में व्यापक उथल-पुथल की शुरुआत मात्र हो सकती है। द अटलांटिक, पॉलिटिको और द गार्जियन की रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि ट्रंप के कई और वफादारों को जल्द ही बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। एक अज्ञात प्रशासनिक अधिकारी ने पॉलिटिको को बताया वह बहुत गुस्से में हैं और लोगों को हटाने वाले हैं। जिन लोगों के निशाने पर होने की आशंका है, उनमें एफबीआई निदेशक काश पटेल (जिनके निजी खातों को हाल ही में ईरान से जुड़े एक समूह ने हैक कर लिया था), श्रम सचिव लोरी चावेज़-डेरेमर, वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक, सेना सचिव डैनियल ड्रिस्कॉल और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गैबार्ड शामिल हैं। दो वरिष्ठ हस्तियों ने ट्रंप के सीधे गुस्से का सामना किया है। 31 मार्च, 2026 को राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट की ओर एक ब्रीफिंग के दौरान रुख किया और सीधे तौर पर उनसे कहा कि आप बहुत बुरा काम कर रही हैं और साथ ही मजाक में पूछा कि क्या उन्हें रखना चाहिए। बाद में उन्होंने कहा कि शायद फिलहाल वह उन्हें रख लेंगे। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने मजाक में ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए तेहरान के साथ समझौते में धीमी प्रगति के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वैंस को दोषी ठहराया और चेतावनी दी अगर ऐसा नहीं होता है, तो मैं जेडी वैंस को दोषी ठहराऊंगा।

बहरहाल, मध्यावधि चुनाव नजदीक आ रहे हैं और ईरान युद्ध लंबा खिंचता जा रहा है, ऐसे में सत्ता परिवर्तन की रफ्तार धीमी होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। ऐसा लगता है कि आखिरकार सत्ता परिवर्तन हो ही गया है, लेकिन ईरान में नहीं ट्रंप के वाशिंगटन डीसी में।

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