दुनिया के अरबपति बच्चों में कैसे बांटते हैं संपत्ति, इतिहास से सबक लेते हुए अंबानी ने नई पीढ़ी को एंपायर सौंपने का प्रोसेस किया तेज

दुनिया के अरबपति बच्चों में कैसे बांटते हैं संपत्ति, इतिहास से सबक लेते हुए अंबानी ने नई पीढ़ी को एंपायर सौंपने का प्रोसेस किया तेज

मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के बीच संपत्ति के विवाद ने 16 साल पहले खूब सुर्खियां बटोरी थी। अब इतिहास से सबक लेकर मुकेश अंबानी सैम वॉल्टन की तर्ज पर अपनी विरासत का बंटवारा दो बेटे, बेटी और पत्नी के बीच कर सकते हैं।

साल 2002 जब धीरूभाई अंबानी का देहांत हुआ। उसके बाद मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हो गया था। सालों तक ये विवाद चलता रहा। अंत में उनकी मां ने दोनों भाइयों के बीच संपत्ति का बंटवारा कर दिया। स्टेक होल्डर्स के विरोध के बावजूद मुंबई हाईकोर्ट ने उस बंटवारे पर अपनी मुहर लगा दी। चूंकि एक बार अपनी आंखों के सामने मुकेश अंबानी ये सब होता देख चुके हैं। इसलिए अबकी बार कमान अपने हाथ में लेते हुए वो अपनी विरासत सौंपने के लिए एक मजबूत प्लान पर काम कर रहे हैं। दरअसल, अंबानी की कोशिश है कि एक ऐसा प्लान बनाया जाए जिसपर आगे चलकर उनके बच्चों में किसी तरह का कोई विवाद न हो। ऐसे में आज के इस विश्लेषण में आपको देश के सबसे बड़े कारोबारी घराने के बंटवारे की कहानी सुनाएंगे। साथ ही अंबानी के अपने बच्चों में बिजनेस बंटवारे के प्लान के बारे में भी बताएंगे। 

जुलाई 2002: धीरूभाई अंबानी का निधन

पेट्रोल पंप पर काम करने वाला एक शख्स जो चंद दशकों में देश की बड़ी रिफाइनरियों का मालिक बन गया। देश का सबसे बड़ा कारोबारी बन गया। लेकिन उन्होंने ने ख्वाब में भी ऐसा नहीं सोचा होगा कि उनके बेटों में ऐसी दरार पड़ जाएगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक धीरूभाई अंबानी का 2002 में स्ट्रॉक के बाद निधन हो गया। धीरूभाई ने कोई वसीहत नहीं छोड़ी थी। उनके बड़े बेटे मुकेश अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक बने, जबकि उनके छोटे बेटे अनिल अंबानी को उपाध्यक्ष बनाया गया। पिता की मौत के बाद जब मुकेश अंबानी ने औद्योगिक साम्राज्य संभाला था तब भी किसी को अंदाजा नहीं हुआ। मगर दो साल के भीतर दोनों भाइयों के बीच की अनबन दुनिया के सामने आई तो सभी हैरान थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुकेश ने कथित तौर पर अनिल को बोर्ड से बाहर करने की कोशिश की।

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नवंबर 2004: भाइयों के बीच निजी अनबन हुई सार्वजनिक

CNBC TV18 के साथ एक साक्षात्कार में मुकेश अंबानी ने स्वीकार किया कि भाई अंबानी समूह के संचालन पर असहमत थे। उन्होंने कहा था कि ठीक है, ऐसे मुद्दे हैं जो स्वामित्व के मुद्दे हैं। ये निजी डोमेन में हैं, लेकिन जहां तक ​​​​रिलायंस का संबंध है, यह एक बहुत ही मजबूत पेशेवर कंपनी है। उस समय रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में अंबानी परिवार की 46.67% हिस्सेदारी थी, जनता की 13.48% और विदेशी संस्थागत निवेशकों की 22.85% हिस्सेदारी थी।

18 जून 2005 को बंट गया रिलायंस

भारत के उद्योग जगत के लिए 18 जून 2005 की तारीख एक नया इतिहास लिख रही थी। देश का सबसे बड़ा कारोबारी घराना दो फाड़ हो रहा था। मां कोकिलाबेन की मौजूदगी में दोनों भाइयों के बीच धीरूभाई की विरासत का बंटवारा हो रहा था। बड़े भाई होने के नाते मुकेश को रिलायंस के सारे पुराने कारोबार मिले तो नए कारोबार अनिल के हिस्से में आ गए।  मुकेश को रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईपीसीएल और अनिल को रिलायंस इन्फोकॉम, रिलायंस एनर्जी और रिलायंस कैपिटल मिला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के लिए डी-मर्जर को मंजूरी दे दी। कुछ शेयरधारकों ने इस निर्णय का विरोध भी किया। दोनों में ये करार भी हुआ कि एक-दूसरे के कारोबार में कदम नहीं रखेंगे। मां ने पूरी कोशिश की कि दोनों भाई कभी एक-दूसरे के आड़े न आए। यहां तक कि इस बंटवारे में आईसीआईसीआई बैंक के तत्कालीन चेयरमैन कामत को भी बुलाना पड़ा था।

गैस पर भी भाईयों में हुई कानूनी लड़ाई

अंबानी परिवार के औद्योगिक साम्राज्य के बंटवारे के वक्त मुकेश और अनिल अपने-अपने हिस्से से खुश थे। लेकिन जल्दी ही दोनों के कारोबारी हित आपस में टकराने लगे और फिर छिड़ गई ऐसी जंग जिसका अंत अगर प्यार से नहीं होता तो धीरूभाई अंबानी का सपना भी बिखर सकता था। कुछ वक्त तो ये सब ठीक चला लेकिन दक्षिण अफ्रीका की टेलीकाम कंपनी एमटीएन से अनिल अंबानी की कंपनी की डील दोनों भाइयों के रिश्तों में जहर घोल गई। वो डील जो हो ही नहीं पाई। वो डील जिसकी नाकामी के लिए अनिल ने बड़े भाई पर ऊंगली उठाई। यहां तक की अनिल ने बड़े भाई पर 10 हजार करोड़ का मानहानी का मुकदमा तक दायर किया। फिर अनिल की कंपनी रिलायंस नैचुरल को गैस सप्लाई पर मुंबई हाइकोर्ट का फैसला आया तो उनके हौसले बुंलद हो गए। लेकिन बड़े भाई उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले आए। दोनों भाइयों के बीच सुलह के लिए बहुत कुछ हुआ। मां भी बार-बार समझौते के लिए समझाती रहीं। फिर सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश के हक में फैसला देते हुए छह हफ्तों में गैस पर समझौता पूरा करने को कहा। 

अनिल ने मंत्री देवड़ा पर भाई के साथ गुप्त सौदे का आरोप लगाया

मुकेश की एक्सप्लोरेशन कंपनी को अनिल की बिजली कंपनी को रियायती दर पर गैस बेचनी थी। इस सौदे को देवड़ा ने वीटो कर दिया, जिन्होंने कहा कि किसी भी कंपनी को रियायती दरों पर सरकार की गैस का व्यापार करने का अधिकार नहीं है। अनिल ने देवड़ा पर अपने भाई का पक्ष लेने का आरोप लगाया और कहा कि इस फैसले से मुकेश का गैस लाभ दोगुना होकर £6 बिलियन हो जाएगा।

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अगस्त 2009: अनिल ने भाई की रिलायंस इंडस्ट्रीज और सरकार की आलोचना करने वाले विज्ञापन निकाले

अनिल अंबानी की रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड ने भारत के सबसे बड़े अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया और 32 अन्य अखबारों में दैनिक विज्ञापनों में यह आरोप लगाया कि भारत सरकार ने कृष्णा गोदावरी बेसिन से गैस की कीमत बढ़ाने के लिए मुकेश की रिलायंस इंडस्ट्रीज का साथ दिया है। विज्ञापन में दावा किया गया कि रिलायंस इंडस्ट्रीज को भारी मुनाफा होगा और बिजली के बिल में 50% की बढ़ोतरी होगी।

जून 2010: अनिल अंबानी ने मानहानि का मुकदमा वापस लिया

अनिल धीरूभाई अंबानी समूह के एक प्रवक्ता ने एक बयान जारी करते हुए जानकारी दी कि मुकेश अंबानी पर 10,000 करोड़ रुपये (या $ 2.12 बिलियन) के नुकसान का दावा करने वाला मुकदमा वापस ले लिया गया। बाद में अनिल अंबानी ने कहा कि हमने बहुत सौहार्दपूर्ण तरीके से विवाद सुलझा लिया है और निवेशकों को किसी भी तरह का डर नहीं होना चाहिए। 

ये तो हो गई मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के बीच के झगड़े की कहानी। अब आपको बताते हैं कि हम वर्तमान में इसकी चर्चा क्यों कर रहे हैं। दरअसल, ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें कहा दावा किया गया है कि मुकेश अंबानी भविष्य में अपनी विरासत का बंटवारा कर सकते हैं। ब्लूमबर्ग में छपी रिपोर्ट के अनुसार मुकेश अंबानी सैम वॉल्टन की तर्ज पर अपनी विरासत का बंटवारा दो बेटे, बेटी और पत्नी के बीच कर सकते हैं। कहा जा रहा है कि मुकेश अंबानी अपने परिवार की संपत्तियों को एक ट्रस्ट की तरह संस्था बना कर संचालन का दायित्व देने की योजना पर काम कर रहे हैं, जो रिलायंस ग्रुप का भी प्रबंधन करेगी। 

वॉल्टन फैमली की तर्ज पर बंटवारा

वॉलमार्ट के संस्थापक सैम वॉल्टन ने अपने जीवित रहते 1988 में डेविड ग्लास को कंपनी का सीईओ बना दिया था। उससे पहले वही कंपनी के सीईओ हुआ करते थे। दुनिया के इस सबसे अमीर परिवार ने खुद को बोर्ड तक सीमित कर लिया और बाकी ऑपरेशन प्रोफेशनल्स के हवाले कर दिए जाएंगे। वॉलमार्ट के बोर्ड में सैम के बेटे रॉब और भतीजे स्टुअर्ट को भी शामिल किया गया। साथ ही उनकी पोती के पति ग्रेग पेनर को 2015 में अरकांसस स्थित कंपनी बेंटोनविल्ले का चेयरमैन बनाया गया। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि मुकेश अंबानी सैम वॉल्टन की तर्ज पर अपनी विरासत का बंटवारा दो बेटे, बेटी और पत्नी के बीच कर सकते हैं।

-अभिनय आकाश