Board of Peace दुनियाभर में युद्धों को खत्म कराएगा, जैसे ट्रंप ने अब तक 8 जंगें रुकवा दी, ट्रंप के ख्वाबों में जो आए...UP Power के जरिए उसे तुम्हें बताए!

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अभिनय आकाश । Jan 23 2026 3:19PM

ले ही शांति का नोबेल उनको नहीं मिला हो। तो अब वह कह रहे हैं कि यह बोर्ड जंगे रुकवाएगा और ट्रंप इसके चेयरमैन है हमेशा के लिए। मतलब उनका कार्यकाल अनिश्चितकालीन है। बाकी देशों को 3 साल की सदस्यता है और जिनको परमानेंट मेंबर बनना है उनको 100 करोड़ डॉलर देने होंगे।

सलमान खान की फिल्म रेडी और इसमें परेश रावल का बलिदान भारद्वाज का किरदार। जब सलमान खान उन्हें एक किताब भेंट करते हुए बोलते हैं कि ये आपने लिखी है। वो इसे सच मान लेते हैं।  सलमान खान परेश रावल से कहते हैं कि आपमें एमपी और यूपी आ गया है। परेश द्वारा पूछे जाने पर वो बताते हैं कि मेमोरी पॉवर, जिसमें मेमोरी की बैट्री डाउन हो जाती है। या फिर अन बिलिविबल पावर जिसमें आप जो कैरेक्टर सोचते हैं वो सच हो जाता है। वो इसे सच समझ अपुन इच भगवान है वाले मोड में जीने लग जाते हैं। गले में है एक लाल टाई, इस्त्री किए हुए कपड़े, मंद-मंद चाल, आवेश में फैसले लेने की कुव्वत, गलती करके न मानने की मूल इंसानी स्वभाव, मुकर जाने की अदा, झूठ बोलने का हुनर, गंभीरता से कोसों दूर और खुद से मोहब्बत करने वाला 'लस्ट फॉर लाइफ' से भरा किरदार। वो जो अमेरिका को बचाना चाहता है। अमेरिकी बचना नहीं चाहते फिर भी वो कहते हैं कि मैं आपको बचाकर रहूंगा। आपको ग्रेट बनाकर ही रहूंगा। लाल टोपी पहने ट्रंप अमेरिका को फिर से ग्रेट बनाना चाहते हैं। वैसे तो  हर चीज की एक एक्सपायरी डेट होती है। पुरानी चीज है, आखिर कब तक चलेगी भी और आए दिन कुछ न कुछ काम निकल ही आता था। सो अब पुरानी व्यवस्था को दरकिनार कर ट्रंप ने अपना ही यूएन बना लिया। अपना ही घर का संयुक्त राष्ट्र नाम बोर्ड ऑफ पीस दिया। शुरू तो उन्होंने यह कह कर किया था कि गाजा को जो बम मार-मार कर इजराइल ने खंडर बना दिया है हमास को खत्म करने के लिए तो गाजा को फिर से बनाएंगे और फिर से गाज़ा को बनाने बसाने के लिए कई देशों के साथ मिलकर एक बोर्ड बनाने की बात की थी उन्होंने। और दर्जनों देशों को साथ आने का न्योता भेज दिया था। 60 देशों को भेज दिया। अब जब उन्होंने यह बोर्ड ऑफ पीस बना दिया तो सारे देश जिनको बुलाया था वह तो आए नहीं। कई ने मना कर दिया। कई अभी विचार कर रहे हैं कि देखें कौन-कौन आता है और क्या बनता है इस बोर्ड का। लेकिन ट्रंप ने बोर्ड बना दिया और 50-60 न्योते जो उन्होंने दिए थे उनमें आधे देश आ गए और बोर्ड बना दिया। लेकिन अब बात गाज़ा को बनाने की ही नहीं है। गाज़ा के लिए बोर्ड बनाने के प्लान को तो यूएन ने भी समर्थन दिया था। लेकिन ये तो ट्रंप जैसे अपना प्राइवेट लिमिटेड यूएन ही बनाने निकल पड़े हैं। बोर्ड का एक चार्टर जारी कर दिया गया। जैसे संयुक्त राष्ट्र का चार्टर होता है। कह रहे हैं यह बोर्ड दुनिया में चल रही जंगों को रोकेगा। यानी वही ट्रंप का फेवरेट सब्जेक्ट भी है। कहते रहते हैं आठ जंगे वह खुद रुकवा चुके हैं। भले ही शांति का नोबेल उनको नहीं मिला हो। तो अब वह कह रहे हैं कि यह बोर्ड जंगे रुकवाएगा और ट्रंप इसके चेयरमैन है हमेशा के लिए। मतलब उनका कार्यकाल अनिश्चितकालीन है। बाकी देशों को 3 साल की सदस्यता है और जिनको परमानेंट मेंबर बनना है उनको 100 करोड़ डॉलर देने होंगे। 

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एक नज़र में बोर्ड ऑफ पीस

शुरुआती मकसद गाजा में युद्धविराम को मजबूत करना, आगे चलकर यह अन्य वैश्विक विवादों में भी भूमिका निभाने की बात करता है। 35 देशों ने इस पौस बोर्ड से जुड़ने की सहमति दी है, ट्रंप प्रशासन से 60 से ज्यादा देशो को भेजा गया है। रूस ने कहा कि हम विचार कर रहे हैं। अर्जेंटीना, अर्मीनिया, हगरी, अजरबैजान, बहरीन, बुल्गरिया, इंडोनेशिया, UAE, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कतर, कोसोवो, मगोलिया, मोरक्को, पाकिस्तान, पराखे, सऊदी अरब, तुर्किये, उज्वेकिस्तान

भारत समेत ये देश दूर रहे

फ्रांस, स्वीडन और नॉर्वे ने साफ इनकार किया, ब्रिटेन ने दूरी बनाई, चीन का रुख साफ नहीं, भारत का कोई प्रतिनिध समारोह में नहीं रहा, स्थायी सदस्यता के लिए। अरब डॉलर (9000 करोड़) देने होंगे।सूत्रों ने बताया कि भारतीय पक्ष प्रमुख साझेदारों जिनमें फ्रांस और रूस शामिल हैं - के रुख पर नजर रख रहा है, साथ ही उसे इस बात की चिंता भी है कि शांति बोर्ड अंततः संयुक्त राष्ट्र (यूएन) को कमजोर कर देगा और ट्रंप हमेशा के लिए इस संस्था के अध्यक्ष बने रहेंगे। ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान बोर्ड के लिए एक हस्ताक्षर समारोह की अध्यक्षता करते हुए, कथित तौर पर नौ महीनों में आठ युद्धों को समाप्त करने का श्रेय लिया, जिसमें पिछले मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष भी शामिल है।

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मेंबरशिप से 4.58 लाख करोड़ जमा करेंगे

गाजा पीस बोर्ड के लिए ट्रम्प ने नवंबर में ही यूएन से स्वीकृति ली थी। बोर्ड के चार्टर के अनुसार ये दुनिया भर में युद्धग्रस्त क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए काम करेगा। गाजा में काम बोर्ड का पहला चरण होगा। ट्रम्प ने 50 देशों को बोर्ड में शामिल होने का न्योता दिया है। बोर्ड की स्थायी मेंबरशिप के लिए 9 हजार करोड़ रु. की फीस रखी गई है। इस हिसाब से ट्रम्प का प्लान लगभग 4.58 लाख करोड़ रुपए जमा करना है। ट्रम्प स्थायी अध्यक्ष होंगे। वे राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल के बाद भी इस पद पर रह सकते हैं। दामाद जेरेड सहित 7 लोगों का फाउंडिंग बोर्ड भी स्थायी रूप से रहेगा। बोर्ड का विरोध इस कारण भी हो रहा है कि इसे यूएन के विकल्प के रूप में बनाया जा रहा है। यूएन के हर साल के 45 हजार करोड़ रुपए के पीसकीपिंग बजट में अमेरिका 25% शेयर देता है, लेकिन ट्रम्प के आने के बाद से अमेरिका ने फंड नहीं दिया है। आशंका है, ट्रम्प बोर्ड का विस्तार यूक्रेन-रूस युद्ध खत्म होने के बाद यूक्रेन में पुनर्निमाण के नाम पर करेंगे। ट्रम्प ने अभी यूक्रेन को 10 हजार करोड़ की मदद रोकी हुई है। राष्ट्रपति ट्रम्प अपने दूसरे कार्यकाल में यूएन से जुड़े 31 अहम संगठनों जैसे यूएन पॉपुलेशन फंड, डब्ल्यूएचओ और फूड प्रोग्राम को छोड़ने का ऐलान कर चुके हैं।

जंग रुकवाने का दावा 

ट्रंप ने कहा कि शांति बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से काम कर सकता है, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत-पाकिस्तान संघर्ष सहित जिन आठ युद्धों को उन्होंने रोका था, उनमें संयुक्त राष्ट्र की कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान, दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच शुरू हुए युद्ध को रोकने में हमें बहुत खुशी हुई। मुझे बहुत गर्व महसूस हुआ जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भयावह स्थिति उत्पन्न होने से ठीक पहले युद्ध को रोककर 10 और शायद 20 मिलियन लोगों की जान बचाई। भारत का कहना है कि भारतीय और पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों के बीच सहमति बनने के बाद चार दिनों में ही संघर्ष समाप्त हो गया था, और उसने ट्रंप के शत्रुता समाप्त करने के दावों को खारिज कर दिया है। बोर्ड के गठन के लिए दस्तावेजों पर 11 देशों (अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बुल्गारिया, हंगरी, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान, कोसोवो, पाकिस्तान, पैराग्वे और उज्बेकिस्तान) के राष्ट्राध्यक्षों या सरकार प्रमुखों और आठ देशों (बहरीन, जॉर्डन, मोरक्को, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, यूएई और मंगोलिया) के वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए।

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