सरकार क्या करना चाहती है, क्यों हो रहा विरोध, मणिकर्णिका घाट के रेनोवेशन पर मचे बवाल की पूरी कहानी

सरकार दावा कर रही है कि विरासत को सजोने और जरूरत के हिसाब से बेहतर बनाने के लिए काम किया जा रहा है। तो विपक्ष इसे धर्म और प्राचीन विरासत को बर्बाद करने और मुनाफा कमाने के लिए किया जा रहा व्यवस्था बता रहा है।
खाक भी जिस जमीं की पारस है, ये शहर वही बनारस है। इसे काशी कहो, बनारस या फिर वाराणसी, गंगा की पवित्रता बसती है जहां दिलों को छू देने वाली प्रकृति का मनमोह लेने वाला नजारा है वहां। जिसके बारे में अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन ने कहा था- बनारस इतिहास से भी पुराना है, परंपराओँ से भी प्राचीन है। किवदंतियों से भी पुरातन है और अगर हम इन सबको जोड़ दें तो उनसे भी दोगुना प्राचीन है। संस्कृत में एक शब्द है कास जिसका अर्थ है चमक यानी लाइट। इसी काश से बना है शब्द काशी यानी वो जगह जहां शिव का प्रकाश सबसे तेज चमकता है। इसीलिए काशी को प्रकाश या ज्ञान का शहर भी कहा जाता है। लेकिन इस शहर में एक चमक या लाइट ऐसी भी है जो कभी नहीं बुझती। श्मशान की चमक गंगा किनारे पूरे 24 घंटे लगातार जलते रहने वाले श्मशान की चमक। मणिकर्णिका एक शाश्वत श्मशान घाट जहां कभी शांति नहीं रहती। जहां कभी आराम नहीं होता, जहां अनगिनत मृत शरीर मोक्ष की प्रतीक्षा कर रहे होते हैं, इस समय खूब चर्चाओं में है। वजह है इतिहास से भी प्राचीन बताए जाने वाले इस शहर को संवारने सजाने के लिए हो रहे विकास के कार्य जिसे कुछ लोग विनाश का कार्य भी बता रहे हैं। कुछ लोग इसे कंस्ट्रक्शन बता रहे हैं तो कुछ डिस्ट्रक्शन बता रहे हैं। सरकार दावा कर रही है कि विरासत को सजोने और जरूरत के हिसाब से बेहतर बनाने के लिए काम किया जा रहा है। तो विपक्ष इसे धर्म और प्राचीन विरासत को बर्बाद करने और मुनाफा कमाने के लिए किया जा रहा व्यवस्था बता रहा है। तो आखिर में हो क्या रहा है मणकड़िका घाट पर? इतना बवाल क्यों मचा हुआ है? क्या वाकई मंदिर तोड़े गए या फिर एआई से फोटो जनरेट कर अफवाह फैलाया जा रहा। किस बात पर एफआईआर दर्ज की गई? सरकार क्या करना चाहती है और इसका विरोध क्यों हो रहा है?
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क्यों कहा जाता है मोक्ष का द्वार
वाराणसी सदियों से ये शिक्षा और संस्कृति का केंद्र रहा तो साथ ही मृत्यु और मोक्ष का शहर भी रहा है। भगवान शिव के त्रिशूल पर टिके सबसे प्राचीन नगर वाराणसी में जहां काशी विश्वनाथ मंदिर से आती मंगला आरती की ध्वनियां और इनमें घुलता हुआ घंटियों का मधुर संगीत। इन्हीं ध्वनियों को सुनकर आदिकाल से वाराणसी जागता रहा है। यहां तथ्य और कल्पना, इतिहास और मिथक, लोक कथा और ग्रंथों के बीच की रेखाएं धुंधली पर जाती हैं। लेकिन इसे मृत्यु और मोक्ष का शहर भी कहा जाता है। यह अपनी तरह का अनोखा शहर है जहां हर साल असंख्य लोग मृत्यु को गले लगाने आते हैं। ऐसी मान्यता है कि माता सती के कर्ण फूल काल में पहने जाने वाला एक तरह का झुमका यहां गिर गया था। इस वजह से इस जगह का नाम मणिकर्णिका घाट पड़ा। हिंदू अंत्यष्ट परंपराओं के अनुसार हां 24 घंटे दाह संस्कार होते हैं। इसे मोक्ष का द्वार कहा जाता है। 1771 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने मणिकर्णिका घाट समेत पांच अन्य घाटों का निर्माण करवाया था। पक्का घाट बनवाया था। शिव के अनन्य भक्त अहिल्याबाई होलकर ने ही काशी विश्वनाथ मंदिर का भी पुनरद्धार कराया था। पिछले करीब 250 सालों से यह घाट इसी स्वरूप में बने हुए थे।
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रेनोवेशन पर आखिर हंगामा क्यों बरपा?
मणिकर्णिका और आसपास के क्षेत्र का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। नए कंस्ट्रक्शन होने हैं जिसके लिए डिस्ट्रक्शन यानी तोड़फोड़ हो रही है और इसका विरोध हो रहा है। कुछ स्थानीय लोगों ने सरकार पर प्राचीन विरासत बर्बाद करने का आरोप लगाया। जबकि सरकार इसे समय की जरूरत बता रही है। इससे पहले 2019 में जब काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाया जा रहा था तब भी करीब 300 घरों को तोड़ा गया था। इसमें भी कई मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों को नष्ट करने का आरोप सरकार पर लगा था। 2019 में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का शिलान्यास करते हुए बनारस के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया था कि उन्हें 2014 में गंगा मैया ने बाबा विश्वनाथ को घुटन भरे अतिक्रमणों से मुक्त कराने का आह्वान किया था ताकि भगवान शिव सांस ले सके।
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क्या है प्रॉजेक्ट ?
28 करोड़ की लागत से मणिकर्णिका घाट का कायाकल्प होना है। पहले चरण में सीढ़ियां बनाने के लिए खुदाई के दौरान मढ़ी ध्वस्त होने पर मूर्तियां टूटने को लेकर विवाद हुआ। घाट पर दो फ्लोर में 36 आधुनिक शवदाह प्लैटफॉर्म बनेंगे। तीन बड़ी चिमनी लगाई जाएंगी। दो टॉइलट, लकड़ी भंडारण स्थल और वेटिंग हॉल का निर्माण होगा। अहिल्या बाई ट्रस्ट के अध्यक्ष और राजपरिवार के प्रतिनिधि यशवंत राव होलकर खुद इंदौर से काशी पहुंचे और नाराजगी जताई। मणिकर्णिका घाट की पवित्र माटी माथे से लगा राजमाता की विरासत सरक्षित और सुरक्षित रखने का संकल्प दोहराया। ट्रस्ट ने अहिल्याबाई की सभी मूर्तियो को सुपुर्द करने के लिए जिला प्रशासन को सात दिन दिए है। वहीं, इलाके के डीएम का कहना है कि अहिल्याबाई की मूर्तियों समेत अन्य धरोहरों को नुकसान नहीं पहुंचा है। मूर्तियों को संस्कृति विभाग के परिसर में सुरक्षित रखा गया है। रेनोवेशन के बाद उनको सम्मान के साथ स्थापित किया जाएगा, जैसा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के समय किया गया था। लेकिन पेच यह फसा है कि प्रशासन दो मूर्तियों की बात कर रहा है, जबकि ट्रस्ट ने चार मूर्तियां मांगी है।
दो सांसदों समेत 8 के खिलाफ FIR
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ एआई से भ्रामक तस्वीरें जनरेट कर अफवाह फैलाने की एफआईआर भी दर्ज की। इन आठ लोगों में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और सांसद पप्पू यादव भी शामिल हैं।
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