शिखा है, जनेऊ पहनते हैं? PM ने राम के मर्म को अयोध्या में समझाया, वो क्या इंटरव्यूअर्स को समझ नहीं आया, मंदिर का नया CEO ब्राह्मण ही बनेगा?

Ram Mandir
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अभिनय आकाश । Aug 13 2026 12:31PM

जिन अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया के तहत आवेदन किया था, उनमें से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कुछ उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया और बाद में उनका इंटरव्यू लिया गया। मीडिया में सामने आई खबरों के मुताबिक, इंटरव्यू के दौरान कुछ उम्मीदवारों से उनकी धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत जीवनशैली से जुड़े सवाल पूछे जाने की बात कही जा रही है—जैसे कि वे जनेऊ पहनते हैं या नहीं, मांसाहारी भोजन करते हैं या नहीं और चोटी रखते हैं या नहीं। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सीईओ के चयन की प्रक्रिया ऐसे समय में चल रही है, जब मंदिर के चढ़ावे और दान में कथित चोरी व हेराफेरी के आरोपों की जांच एक विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही है।

25 नवंबर 2025 के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में थे। राम मंदिर का ध्वजारोहण कार्यक्रम था। यही प्रधानमंत्री ने कहा हम सब जानते हैं कि हमारे राम भेद से नहीं भाव से जुड़ते हैं। उनके लिए व्यक्ति का कुल नहीं उसकी भक्ति महत्वपूर्ण है। उन्हें वंश नहीं मूल्य प्रिय है। आज हम भी उसी भावना उसी आदर्श और उसी समर्थता के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। जहां श्रेष्ठता जन्म से नहीं चरित्र से तय होती है। प्रधानमंत्री ने राम का मर्म समझाया। उन्हीं राम के मंदिर के प्रबंधन के लिए बने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सीईओ पद की प्रक्रिया जारी है। जिसके लिए बीते दिनों इंटरव्यूज लिए गए। जिन अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया के तहत आवेदन किया था, उनमें से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कुछ उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया और बाद में उनका इंटरव्यू लिया गया। मीडिया में सामने आई खबरों के मुताबिक, इंटरव्यू के दौरान कुछ उम्मीदवारों से उनकी धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत जीवनशैली से जुड़े सवाल पूछे जाने की बात कही जा रही है—जैसे कि वे जनेऊ पहनते हैं या नहीं, मांसाहारी भोजन करते हैं या नहीं और चोटी रखते हैं या नहीं। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सीईओ के चयन की प्रक्रिया ऐसे समय में चल रही है, जब मंदिर के चढ़ावे और दान में कथित चोरी व हेराफेरी के आरोपों की जांच एक विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही है।

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अगले महीने कोर्ट में दाखिल होगी रिपोर्ट

जांच 90 दिनों में पूरी होनी है और अगले महीने के आखिर तक कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करनी है। एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट 23 जून को जमा होने के बाद एफआईआर दर्ज की गई और आठ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। बाद में पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से कैश, सोना, चांदी और विदेशी करेंसी बरामद हुई है। जिसमें एक आरोपी के पास से 20.3 लाख रुपए भी शामिल है। 

आखिर कट्टर हिंदू क्या होता है?

खैर, अब आइए नए सीईओ के इंटरव्यू और उससे पूछे जाने वाले सवालों पर जो सिर्फ एक बजट प्रशासन या मंदिर के मैनेजमेंट तक सीमित नहीं रहे। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार इंटरव्यू में कैंडिडेट से एक सवाल पूछा गया कि क्या आप कट्टर हिंदू हैं? इस सवाल से एक सवाल उठता है कि आखिर कट्टर हिंदू क्या होता है? इंटरव्यूअर्स को ही स्पष्ट करना चाहिए कि उनके हिसाब से कट्टर हिंदू की परिभाषा क्या होती है? क्या शर्तें हैं जो किसी को सिर्फ हिंदू से आगे बढ़कर कट्टर हिंदू बनाती है। रिपोर्ट के मुताबिक इंटरव्यू में दूसरा सवाल पूछा गया कि आप नॉनवेज खाते हैं या नहीं?

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शिखा और जनेऊ पर भी सवाल

सूत्रों के मुताबिक, इंटरव्यू में भगवान राम के प्रति आस्था, समर्पण, रामानंदी परंपरा, मंदिर प्रबंधन और लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच क्राउड मैनेजमेंट से जुड़े सवाल पूछे गए। उम्मीदवारों से यह भी पूछा गया कि वे शिखा रखते हैं या नहीं और जनेऊ पहनते हैं या नहीं। शराब के सेवन और नॉनवेज खाने को लेकर भी सवाल किए गए। दूसरे दिन 3 रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा पुलिस और सेना के रिटायर्ड अधिकारी भी इंटरव्यू के लिए पहुंचे। इनमें एक रिटायर्ड ब्रिगेडियर भी शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक, इंटरव्यू में चढ़ावा राशि की चोरी के मामले को लेकर कोई सवा सवाल नहीं पूछा गया।  शिखर रखने और जनेऊ पहनने की परंपरा आमतौर पर ब्राह्मण जाति में ही है। सवाल है कि क्या अगर कोई कैंडिडेट जन्म से मिली जाति में ब्राह्मण नहीं हुआ तो उसे सीईओ नहीं बनाया जा सकता है? क्या फिर उसकी प्रशासनिक क्षमता को भी इग्नोर करके इस ओर ही ध्यान दिया जाएगा कि वह कट्टर हिंदू है या नहीं। नॉनवेज खाता है या नहीं खाता? शाक्य परंपरा के ब्राह्मणों का क्या होगा जो जनेऊ भी पहनते हैं, मांस भी खाते हैं। 

10 उम्मीदवार इंटरव्यू के लिए आए

बता दें कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट क्षेत्र के लिए स्थाई सीईओ का सिलेक्शन प्रोसेस 11 अगस्त 2026 को शुरू हुआ। जिसमें पहले दिन 10 उम्मीदवार इंटरव्यू के लिए आए। इन सभी को 10 अगस्त की देर रात अयोध्या बुलाया गया था। इस इंटरव्यू से पहले सभी उम्मीदवारों से एक Google फॉर्म भरवाया गया था। जिसमें उनके प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ धार्मिक मान्यताओं और निजी जीवन के बारे में जानकारी मांगी गई थी। इंटरव्यू के दौरान पैनल के सदस्यों ने उनके सीवी को दी गई जानकारी को भी देखा और उनसे उनकी नापसंद लोगों के साथ घुलने मिलने की क्षमता और व्यवहार के बारे में सवाल पूछे। यह सब हो रहा है राम मंदिर के कथित चंदा चोरी का मामला सामने आने के बाद। 

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राम मंदिर ट्रस्ट के CEO इंटरव्यू में पहुंचे पूर्व अफसर

पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय का दूसरी बार साक्षात्कार लिया गया। साथ ही बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक परेश सक्सेना भी साक्षात्कार दे रहे है। सूत्रों ने कहा कि चयन समिति की ओर से 3 नामों को छांटे जाने की संभावना है जिसमें से अंतिम नियुक्ति ट्रस्ट की ओर से की जाएगी। राम मंदिर में चंदे के गबन के आरोपों के बाद पूर्णकालिक सीईओ की नियुक्ति करने का निर्णय लिया गया। सूत्रों के मुताबिक, हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय चयन समिति में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे शामिल है। इंटरव्यू देने वालों को मंदिर परिसर का दौरा भी कराया जा रहा है।

भारत में 52.5% हिंदू पुरुष और 40.7% हिंदू महिलाएं नॉनवेज खाती हैं

5 जनवरी 2024 को इंडिया टुडे में छपी सम्राट शर्मा की एक रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 2019-21 के अनुसार भारत में 52.5% हिंदू पुरुष और 40.7% हिंदू महिलाएं नॉनवेज खाती हैं। लगभग आधी आबादी। जहां तक बात शिख और जनेऊ की है तो इसे लेकर भी सोशल इकोनॉमिक्स समझना जरूरी है। शिख हिंदू धर्म में ज्यादातर ब्राह्मण रखते हैं या फिर वो लोग जो दीक्षा लेने के लिए कहीं ना कहीं धार्मिक शास्त्रों की पढ़ाई करते हैं। जैसे अगर कोई वाराणसी के किसी वेद विद्यालय में पढ़ाई करने जाता है तो वहां पहली ही शर्त है कि बच्चे का जनेऊ संस्कार हुआ हो और बच्चा शिखा रखा हो। बिहार और यूपी के कुछ इलाकों में यह चलन भी है कि क्षत्रिय और वैश्य समाज के लोग परिवार के किसी सदस्य के निधन पर बाल मुंडाते हैं तब शिख रखते हैं।

बहरहाल, अगले साल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए भी मुद्दा ज्यादा गर्म हो गया है। क्योंकि उत्तर प्रदेश विधानसभा स्पीकर जैसे नेताओं के बयानों पर बवाल भी खूब मचा है। ऐसे में चुनाव के मद्देनजर राम मंदिर में सुरक्षा के लिहाज से विश्वास पाना भाजपा के लिए किसी भी हाल में जरूरी हो गया है। बहुत हद तक यह कारण है कि अब ट्रस्ट की ओर एक अस्थाई सीईओ ढूंढा जा रहा है। फिलहाल तो किसी खास नाम का रिवील नहीं हुआ है। लेकिन कैटेगरी बांटकर दायरा राम के प्रति भाव वालों का दायरा जरूर कम कर दिया गया है। 

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