कोविड-19 के बीच सरकारी अस्पतालों में 36,433 वेंटिलेटर की आपूर्ति की गई

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 31, 2020   16:19
कोविड-19 के बीच सरकारी अस्पतालों में 36,433 वेंटिलेटर की आपूर्ति की गई

मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि देश में सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य केन्द्रों में कोविड-19 से पूर्व लगभग 16 हजार वेंटिलेटर थे। इसमें कहा गया है कि लेकिन 12 महीनों से भी कम समय में 36,433 ‘मेक इन इंडिया’ वेंटिलेटर की सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आपूर्ति की गई।

नयी दिल्ली। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने देश के सरकारी अस्पतालों में 36,433 वेंटिलेटर की आपूर्ति सुनिश्चित की है और अब इसकी औसत लागत दो से दस लाख रुपये के बीच है क्योंकि घरेलू उद्योगों ने इन उपकरणों का निर्माण शुरू कर दिया है। मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि देश में सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य केन्द्रों में कोविड-19 से पूर्व लगभग 16 हजार वेंटिलेटर थे। इसमें कहा गया है कि लेकिन 12 महीनों से भी कम समय में 36,433 ‘मेक इन इंडिया’ वेंटिलेटर की सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आपूर्ति की गई। मंत्रालय ने बताया कि वेंटिलेटर पर सभी निर्यात प्रतिबंध अब हटा दिए गए हैं और ‘मेक इन इंडिया’ वेंटिलेटर का निर्यात किया जा रहा है। इस वर्ष देश में चिकित्सा आपूर्ति क्षेत्र में जबरदस्त उपलब्धि देखी गई। बयान में कहा गया है, ‘‘महामारी की शुरुआत में, भारत लगभग पूरी तरह से आयातित वेंटिलेटर, पीपीई किट और एन -95 मास्क पर निर्भर था।’’ 

इसे भी पढ़ें: महाराष्ट्र के ठाणे में संक्रमण के 390 नए मामले, छह लोगों की मौत

मंत्रालय ने कहा, ‘‘वास्तव में, इन उत्पादों के लिए कोई मानक निर्देश नहीं थे जो महामारी से निपटने के लिए आवश्यक हैं।’’ मंत्रालय के अनुसार केंद्र सरकार ने प्रारंभिक स्तर पर महामारी से उत्पन्न चुनौतियों को पहचाना और देशभर में आवश्यक चिकित्सा वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता और आपूर्ति को सुनिश्चित किया। उसने कहा कि व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) के मामले में, भारत घरेलू उत्पादन क्षमता से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्माता बन गया है। प्रतिदिन 10 लाख से अधिक पीपीई की उत्पादन क्षमता है और इसे कई देशों में निर्यात भी किया जाता है।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।