वाराणसी में गंगा के जलस्तर के बढ़ने से 84 घाटों का आपस में संपर्क टूटा

वाराणसी में गंगा के जलस्तर के बढ़ने से 84 घाटों का आपस में संपर्क टूटा

वाराणसी में बृहस्पतिवार को भी सुबह बूंदाबांदी होने के बाद दिन में भी नम हवाओं के चलते रहने के साथ ही बादलों की आवाजाही जारी रही। इस वजह से दिन में धूप होने के बाद भी उसका असर कम रहा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम में बदलाव की वजह से ही तापमान में कमी आती रहेगी।

वाराणसी में गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है बताया जा रहा है कि मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में बरसात के कारण बनारस में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने लगा है। अस्सी से लेकर राजघाट के बीच आने वाले मढ़ियां और छोटे मंदिरों में गंगा का पानी प्रवेश कर गया है। गंगा के जलस्तर में पिछले 24 घंटे में लगातार तीन सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी दर्ज की गई जिससे वाराणसी में उसकी 84 घाटों का आपस में संपर्क टूट गया है। वही इस कार्य से माझी समाज का कहना है कि बाढ़ की आशंका होने के कारण घाट पर छोटे-मोटे व्यवसाय करने लोगो की आजीविका पर संकट आ जाएगा पहले लॉक डालने के कारण छोटे-मोटे व्यवसाई परेशान थे लेकिन अब बाढ़ के कारण अपनी आजीविका चलाने के लिए और मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

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पिछले 24 घंटे में लगातार गंगा के जलस्तर में 88 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई आषाढ़ के महीने में 13 से 25 जून के बीच हुई बरसात के दौरान गंगा का जलस्तर 60 मीटर ऊपर चला गया था लेकिन फिर बरसात ना होने के कारण गंगा का जलस्तर कम हो रहा था जो कि 58 मीटर तक पहुंच गया था। लेकिन जैसे ही सावन की शुरुआत हुई मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में बरसात होने से फिर से बनारस में गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जाने लगी 28 जुलाई को गंगा का जलस्तर 59.69 मीटर था जो बृहस्पतिवार को 60.48 पर पहुंच गया वही मिर्जापुर में गंगा का जलस्तर 66.87 और गाजीपुर और बलिया  के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। जून में बना बारिश का रिकार्ड, जुलाई में गिरा ग्राफ

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जून महीने में समय से पहले मानसून के आने के बाद जुलाई के अंतिम सप्ताह में बारिश हुई, लेकिन अब जब महीना बीतने को है तब भी औसत की आधी बारिश भी अब तक नहीं हो पाई है। बृहस्पतिवार को भी सुबह बूंदाबांदी होने के बाद दिन में भी नम हवाओं के चलते रहने के साथ ही बादलों की आवाजाही जारी रही। इस वजह से दिन में धूप होने के बाद भी उसका असर कम रहा। वही मौसम में बदलाव की वजह से ही तापमान में कमी आती जा रही है। मौसम वैज्ञानिक एसएन पांडेय ने बताया कि अभी दो तीन दिन तक ऐसे ही मौसम बने रहने की संभावना है।





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