All About Learjet 45 | भरोसेमंद 'लियरजेट' कैसे बना काल? क्यों क्रैश हुआ डिजिटल नेविगेशन से लैस अजीत पवार का चार्टर्ड प्लेन?

Learjet 45
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रेनू तिवारी । Jan 28 2026 11:36AM

जिस चार्टर्ड प्लेन में अजीत पवार यात्रा कर रहे थे, वह एक लियरजेट बिज़नेस जेट था। कंपनी ने 2021 में इसका प्रोडक्शन बंद कर दिया था। दुनिया भर में इस तरह के विमानों से जुड़े 200 हादसे हो चुके हैं, फिर भी यह एक लोकप्रिय विकल्प बना हुआ है।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की बुधवार सुबह एक विमान दुर्घटना में हुई मृत्यु ने विमान सुरक्षा और विशेष रूप से पुराने पड़ रहे चार्टर्ड विमानों के रखरखाव पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस लियरजेट 45 (Learjet 45) में वे सवार थे, वह दुनिया के सबसे लोकप्रिय बिजनेस जेट्स में से एक माना जाता था, लेकिन बारामती की जमीन पर वह एक जलता हुआ मलबा बनकर रह गया।

लियरजेट 45 चार्टर्ड प्लेन की डिटेल्स

जिस चार्टर्ड प्लेन में अजीत पवार यात्रा कर रहे थे, वह एक लियरजेट बिज़नेस जेट था। कंपनी ने 2021 में इसका प्रोडक्शन बंद कर दिया था। दुनिया भर में इस तरह के विमानों से जुड़े 200 हादसे हो चुके हैं, फिर भी यह एक लोकप्रिय विकल्प बना हुआ है। हालांकि, मौजूदा विमानों की सर्विस और मेंटेनेंस जारी है। लियरजेट चार्टर्ड विमानों की कैटेगरी में दुनिया भर में मशहूर है। इसमें सिर्फ 6 से 8 लोगों के बैठने की क्षमता है। इस कंपनी की शुरुआत 1960 में कनाडाई बिजनेसमैन विलियम पॉवेल लियर ने की थी। यह विमान बॉम्बार्डियर एयरोस्पेस (कनाडा) के मालिकाना हक में है। हालांकि कंपनी ने 2021 में इसका प्रोडक्शन बंद कर दिया था, लेकिन मौजूदा विमानों की सर्विस और मेंटेनेंस जारी है।

लियरजेट 45 मॉडल की टॉप स्पीड 860 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि इसकी क्रूज़िंग स्पीड भी लगभग उतनी ही है। इस विमान की रेंज 1,900 से 2,200 नॉटिकल मील, या लगभग 3,500 से 4,000 किलोमीटर है। इसकी चढ़ाई की दर भी काफी तेज़ है। यह चार्टर्ड प्लेन सिर्फ 18 से 20 मिनट में 41,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है। विमान के अंदर की ऊंचाई लगभग 6 फीट है। इसमें वाई-फाई और सैटेलाइट फोन की सुविधा है। यह विमान छोटे रनवे पर लैंडिंग और टेक-ऑफ के लिए एकदम सही माना जाता है। यह कनाडाई कंपनी प्रैट एंड व्हिटनी के ट्विन टर्बोफैन इंजन से लैस है। यह इसे फ्यूल-एफिशिएंट बनाता है। विमान में डिजिटल फ्लाइट कंट्रोल हैं, जो नेविगेशन और सुरक्षा को बेहतर बनाते हैं।

हादसे का घटनाक्रम: 45 मिनट का वह आखिरी सफर

बुधवार सुबह करीब 8:00 बजे अजीत पवार ने मुंबई से बारामती के लिए उड़ान भरी थी। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन उड़ान के ठीक 45 मिनट बाद जब विमान बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग की तैयारी कर रहा था, तभी वह अनियंत्रित होकर जमीन पर गिर गया। क्रैश साइट से मिले विजुअल्स में विमान के परखच्चे उड़े हुए दिखे। मलबे से उठती आग की लपटों और काले धुएं ने बता दिया था कि हादसा कितना भयावह था। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने पुष्टि की है कि विमान में सवार सभी पांचों व्यक्तियों (अजीत पवार, दो सुरक्षाकर्मी और दो पायलट) की इस हादसे में जान चली गई।

लियरजेट 45: रफ्तार और विलासिता का मेल, फिर भी जोखिम

जिस विमान में अजीत दादा अपनी अंतिम यात्रा पर थे, वह अपनी श्रेणी का एक दिग्गज विमान माना जाता है। आइए जानते हैं इस चार्टर्ड प्लेन की खासियतें और इसके इतिहास के बारे में:

इतिहास और निर्माण: इस कंपनी की शुरुआत 1960 में विलियम पॉवेल लियर ने की थी। वर्तमान में यह कनाडाई कंपनी बॉम्बार्डियर एयरोस्पेस के स्वामित्व में है। चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी ने 2021 में लियरजेट का उत्पादन बंद कर दिया था, हालांकि मौजूदा विमानों की सर्विसिंग अब भी जारी है।

रफ्तार और ताकत: यह विमान कनाडाई कंपनी प्रैट एंड व्हिटनी के ट्विन टर्बोफैन इंजन से लैस है, जो इसे बेहद शक्तिशाली और फ्यूल-एफिशिएंट बनाता है। इसकी टॉप स्पीड 860 किमी/घंटा है। यह महज 18-20 मिनट में 41,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचने की क्षमता रखता है।

क्यों चुना जाता है यह विमान?

लियरजेट 45 को छोटे रनवे पर लैंडिंग और टेक-ऑफ के लिए सबसे सटीक माना जाता है। बारामती जैसे छोटे एयरपोर्ट्स के लिए यह वीआईपी की पहली पसंद रहा है। इसमें 6 से 8 लोगों के बैठने की जगह, वाई-फाई और सैटेलाइट फोन जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद होती हैं।

एक चिंताजनक रिकॉर्ड

तकनीकी रूप से उन्नत होने के बावजूद, लियरजेट का सुरक्षा रिकॉर्ड चर्चा का विषय रहा है। आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में इस तरह के विमानों से जुड़े लगभग 200 हादसे हो चुके हैं। बावजूद इसके, इसकी रफ्तार और छोटे रनवे पर उतरने की क्षमता के कारण यह राजनेताओं और व्यापारियों के बीच लोकप्रिय बना रहा।

जांच का विषय: आखिर डिजिटल फ्लाइट कंट्रोल और नेविगेशन सिस्टम से लैस यह विमान इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान क्रैश क्यों हुआ? क्या यह मानवीय चूक थी या तकनीकी खराबी? DGCA अब इन सवालों के जवाब तलाश रहा है।

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