LAC पर सकारात्मक रुख के बाद चीन के 45 निवेश प्रस्तावों को भारत देगा हरी झंडी!

  •  अभिनय आकाश
  •  फरवरी 22, 2021   19:00
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LAC पर सकारात्मक रुख के बाद चीन के 45 निवेश प्रस्तावों को भारत देगा हरी झंडी!

भारत और चीन के 45 निवेश प्रस्तावों को मंजूरी देने के लिए तैयार हैं। जिनमें ग्रेट वॉल मोटर और एसएआईसी मोटर कॉर्प के शामिल होने की संभावना है। प्राप्त जानकारी अनुसार सरकार की योजना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए 150 से अधिक प्रस्तावित चीनी निवेशों को तीन श्रेणियों में विभाजित करने की है।

बनते-बिगड़ते माहौल के बीच अब तक भारत और चीन के कोर कमांडर लेवल की दस दौर की बैठक हो चुकी है। भारतीय पक्ष का नेतृत्व पीजेके मेनन ने और चीन की तरफ से आर्मी की दक्षिणी शिनजियांग मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के प्रमुख मेजर जनरल लिलुलिन बातचीत में शामिल हुए। 16 घंटे तक चली इस बैठक में डिसइंगेजमेंट के दूसरे चरण पर चर्चा हुई। भारत की मांग है कि तुरंत गोगरा, हॉट स्प्रिंग, डेमचोक और देपसांग से अपने सैनिकों को वापस बुलाए।  

45 निवेश प्रस्तावों को मिलेगी मंजूरी 

भारत और चीन के 45 निवेश प्रस्तावों को मंजूरी देने के लिए तैयार हैं। जिनमें ग्रेट वॉल मोटर और एसएआईसी मोटर कॉर्प के शामिल होने की संभावना है। प्राप्त जानकारी अनुसार सरकार की योजना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए 150 से अधिक प्रस्तावित चीनी निवेशों को तीन श्रेणियों में विभाजित करने की है। दोनों देशों के बीच करीब 2 अरब डॉलर के 150 निवेश प्रस्ताव पाइपलाइन में अटके रहे।  

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भारत-चीन वार्ता

 वार्ता के बारे में हालांकि अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। यह बातचीत दोनों सेनाओं के पैंगांग सो (झील) के उत्तरी व दक्षिणी किनारों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों से सैनिकों व हथियारों की वापसी के पूरा होने के दो दिन बाद हुई। माना जा रहा है कि भारत ने बातचीत के दौरान क्षेत्र में तनाव कम करने के लिये हॉट स्प्रिंग्स,गोगरा और देप्सांग जैसे इलाकों से वापसी प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया। सूत्रों ने शनिवार को कहा था कि बातचीत के दौरान व्यापक प्राथमिकता क्षेत्र में तनाव में कमी लाने की है। भारत इस बात पर जोर देता रहा है कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिये गतिरोध वाले सभी बिंदुओं से सैनिकों की वापसी जरूरी है।





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सर्बानंद सोनोवाल का दावा, भाजपा की अगुवाई वाली सरकार को लोग असम में लाना चाहते हैं वापस

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 8, 2021   19:56
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सर्बानंद सोनोवाल का दावा, भाजपा की अगुवाई वाली सरकार को लोग असम में लाना चाहते हैं वापस

मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि उनकी पार्टी प्रदेश में किये गये विकास कार्यों के दम पर असम को देश के सबसे अच्छे राज्यों में से एक बनाने के लिए लोगों से एक बार फिर भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार को मौका देने की मांग कर रही है।

गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोमवार को दावा किया प्रदेश के 126 विधानसभा सीटों वाली विधानसभा में 100 से अधिक सीटों के साथ प्रदेश की जनता भाजपा की अगुवाई वाली सरकार को फिर से सत्ता में लाने के लिये ‘‘उत्सुकता से प्रतीक्षा’’ कर रही है। सोनोवाल ने कहा कि उनकी पार्टी प्रदेश में किये गये विकास कार्यों के दम पर असम को देश के सबसे अच्छे राज्यों में से एक बनाने के लिए लोगों से एक बार फिर भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार को मौका देने की मांग कर रही है। 

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मुख्यमंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘असम की जनता के पास बेहतर काम करने वाली सरकार है...... हमारी सरकार के विकास कार्यों सेवे बेहद प्रसन्न हैं.. उन्हें इस बात की जानकारी है कि केवल भाजपा की अगुवाई वाली राजग सरकार ही विकास, शांति और सुरक्षा दे सकती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सरकार के दौरान पिछले पांच सालों में इन प्रतिबद्धताओं को पूरा किया गया है। यही कारण है कि यहां के लोग बेसब्री से मतदान के दिन का इंतजार कर रहे हैं।’’ 

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सोनोवाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने भ्रष्टाचारमुक्त, प्रदूषणमुक्त, आतंकवादमुक्त औरऔर विकसित असम का वादा किया है। उन्होंने कहा कि इन सभी मोर्चों में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार के ‘‘ईमानदार प्रयासों’’ के कारण लोगों को वादा पूर्ति का आश्वासन मिला है। प्रदेश के126 सदस्यीय विधानसभा सीटों के लियेतीन चरणों में चुनाव होना है। पहले चरण में 47 सीटों के लिये 27 मार्च को मतदान होगा। दूसरे और चीसरे चरण का मतदान एक और छह अप्रैल को होगा।





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हरियाणा में प्राइवेट नौकरी में 75 फीसदी वाला आरक्षण, कानूनी चुनौतियों का सामना करने के लिए कितना तैयार?

  •  अभिनय आकाश
  •  मार्च 8, 2021   19:49
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हरियाणा में प्राइवेट नौकरी में 75 फीसदी वाला आरक्षण, कानूनी चुनौतियों का सामना करने के लिए कितना तैयार?

हरियाणा की प्राइवेट नौकरियों में अब 75 फीसदी रोजगार सिर्फ हरियाणा के लोग ही पाएंगे। यानी हर 4 में से 3 निजी नौकरी हरियाणा के लोगों के लिए होगी। हर 4 में आखिरी बची एक प्राइवेट नौकरी ही बाहर राज्य के लोगों को मिल पाएगी।

हरियाणा में प्राइवेट कंपनी की 75 फीसदी नौकरी को शर्तों के साथ अब हरियाणा के ही लोगों को देनी होगी। हरियाणा सरकार के उस विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिल गई है। जो कहता है कि हरियाणा की प्राइवेट नौकरियों में अब 75 फीसदी रोजगार सिर्फ हरियाणा के लोग ही पाएंगे। यानी हर 4 में से 3 निजी नौकरी हरियाणा के लोगों के लिए होगी। हर 4 में आखिरी बची एक प्राइवेट नौकरी ही बाहर राज्य के लोगों को मिल पाएगी। मतलब बाकी के 25 फीसदी में बिहार से रख लीजिए, मणिपुर, बंगाल, महाराष्ट्र से रख लीजिए या इंग्लैंड, अमेरिका और जर्मनी वाला रख लीजिए। तो सवाल है कि निजी क्षेत्र में भी नौकरी का पैमाना योग्यता होगा या किसी तरह का कोई आरक्षण?

तो सवाल हुआ कि क्या गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, टीसीएस, जेनपैक्ट जैसी बड़ी कंपनियों को अब हरियाणा के नियम के मुताबिक हरियाणा के ही लोगों को अपनी कंपनी में 75 फीसदी नौकरी देनी होगी। तो जवाब है हां। 

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आरक्षण के नियम

75 फीसदी आरक्षण हरियाणा के लोगों को ही निजी नौकरी में देने का विधेयक नई स्थापित होने वाली और हरियाणा में पहले से चल रहे उन कंपनियों, सोशायटी, ट्रस्ट और फर्म पर लागू होगा जिनमें 10 से ज्यादा कर्मचारी हैं। हरियाणा के लोगों को आरक्षण का ये फॉर्मूला 50 हजार रूपये मासिक वेतन तक वाली नौकरियों में मिलेगा। सभी प्राइवेट कंपनियों हरियाणा सरकार के पोर्टल पर 3 महीने में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। सभी निजी कंपनी को तीन महीने में ये बताना होगा कि 50 हजार तक की तनख्वाह वाले कितने पद हैं और हरियाणा से कितने लोग उनकी कंपनी में काम कर रहे हैं। अगर किसी ने हरियाणा के लोगों को ही 75 फीसदी नौकरी देने का नियम नहीं माना तो जुर्माने के साथ कंपनी का लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन तक रद्द हो सकता है। जो कि कंपनी हरियाणा सरकार की निजी नौकरी में आरक्षण को पूरी तरह ईमानदारी से लागू करेगी उसे सरकार प्रोत्साहन राशि देगी। 

क्या इस तरह का कानून बनाया जा सकता है?

जवाब है हां, संविधान के अनुच्छेद 16 (3) संसद को राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के तहत स्थानीय या किसी अन्य प्राधिकरण के साथ सार्वजनिक रोजगार और नौकरियों में डोमिसाइल के आधार पर आरक्षण प्रदान करने का अधिकार देती है। साल 1957 में इसी का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार द्वारा राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में मौजूद सभी कानूनों को निरस्त करने के लिए सार्वजनिक रोजगार अधिनियम रोजगार अधिनियम पारित किया। 

चुनाव में जेजेपी ने किया था वादा

स्थानीय लोगों को निजी क्षेत्र में 75 फीसदी आरक्षण का मामला पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है। तब जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला ने चुनाव प्रचार के दौरान इसका वादा किया था। चौटाला राज्य के मुख्यमंत्री के साथ ही उद्योग, श्रम और रोजगार मंत्री भी हैं। 

 सीधे कानून पारित करने की शक्ति राज्य के पास? 

डोमिसाइल आधारित आरक्षण पर सीधे कानून पारित करने की कोई शक्ति राज्य सरकार के पास नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में इस चलन को कम किया। ग्रामीण क्षेत्रों के अभ्यर्थियों के पक्ष में मेडिकल कॉलेजों में कुछ प्रतिशत सीटों के उत्तर प्रदेश के आरक्षण को आर्थिक विचारों पर उचित ठहराया गया तो सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दिया था।  

स्थानीय आरक्षण का वादा सियासी रणनीति बनती जा रही 

हमारे देश में बरसों से जातियों की दीवार तोड़ने की राजनीति हो रही है। धर्मों और भाषाओं की दीवार तोड़ने की राजनीति हो रही है। लेकिन हर चुनाव में एक नई दीवार खड़ी हो जाती है। इससे पहले आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी सीएम बने तो उन्होंने कानून बना दिया कि आंध्र प्रदेश की प्राइवेट कंपनियों में राज्य के लोगों के लिए 75 फीसदी नौकरियां आरक्षित होंगी। राजनीतक दलों की ओर से युवाओं को नौकरी में स्थानीय आरक्षण का वादा करना नई सियासी रणनीति बनती जा रही है। राजनीति दलों द्वारा ये क्षेत्रीय भावना को उभारने की नीति है या देश में बढ़ती बेरोजगारी को अंकित करने का संदेश। लेकिन राजनीति का नया ट्रेंड ऐसे ही जारी रहा तो इसके असर से देश में युवाओं के लिए एक दीवार खड़ी हो जाएगी।





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दिल्ली से सटी हरियाणा की सीमाओं पर विभिन्न कारणों से 68 लोगों की हुई मौत: अनिल विज

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 8, 2021   19:27
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दिल्ली से सटी हरियाणा की सीमाओं पर विभिन्न कारणों से 68 लोगों की हुई मौत: अनिल विज

गृह मंत्री अनिल विज ने सदन को बताया कि अब तक हरियाणा से मृत प्रदर्शनकारियों के परिजनों को नौकरी और वित्तीय सहायता देने के लिए राज्य सरकार के विचारार्थ कोई प्रस्ताव नहीं है।

चंडीगढ़। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने सोमवार को यहां विधानसभा में कहा कि केन्द्र के कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली से सटी राज्य की सीमाओं पर प्रदर्शन के दौरान विभिन्न कारणों से 68 लोगों की मौत हुई है। दो कांग्रेस विधायकों द्वारा उठाए गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में, विज ने कहा कि इनमें से 21 हरियाणा के थे जबकि 47 पंजाब के निवासी थे। उन्होंने बताया कि 18 फरवरी तक इनमें से 51 लोगों की मौत स्वास्थ्य कारणों से हुई जबकि 15 की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई और दो ने आत्महत्या की। 

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विज ने सदन को बताया कि अब तक हरियाणा से मृत प्रदर्शनकारियों के परिजनों को नौकरी और वित्तीय सहायता देने के लिए राज्य सरकार के विचारार्थ कोई प्रस्ताव नहीं है। कांग्रेस के दो विधायकों आफताब अहमद और इंदु राज नरवाल ने यह सवाल उठाया था। उन्होंने दिल्ली के साथ लगती राज्य की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन में मरने वाले किसानों की संख्या बताये जाने की मांग की थी। विधायकों ने हरियाणा और अन्य राज्यों से मृत किसानों की संख्या पूछी थी। 

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विधायकों ने यह भी पूछा था कि क्या सरकार उनके परिजनों को सहायता प्रदान करने के किसी प्रस्ताव पर विचार कर रही है। गौरतलब है कि केन्द्र के तीन नये कृषि कानूनों को निरस्त किये जाने की मांग को लेकर किसान दिल्ली की सीमाओं सिंघू बॉर्डर, टीकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं।





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