Air India की Phuket-दिल्ली उड़ान का पायलट गांजा जांच में पॉजिटिव पाया गया

थाइलैंड से भारत आ रही एअर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान के मुख्य पायलट की लैब रिपोर्ट में गांजे के सेवन की पुष्टि हुई है। चार अगस्त को हवा में टर्बुलेंस के कारण 300 फुट नीचे आए इस विमान में सवार कम से कम 17 लोग घायल हो गए थे। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने जांच पूरी होने तक विमान के दोनों पायलटों को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया है।
एअर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान के मुख्य पायलट (पायलट-इन-कमांड) की जांच रिपोर्ट में मनःप्रभावी पदार्थ के सेवन की पुष्टि हुई है। सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार, इस घटना पर चर्चा करने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू और वरिष्ठ अधिकारियों ने एअर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की।
मनःप्रभावी पदार्थ ऐसे रासायनिक तत्व या औषधियां होती हैं जो मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और चेतना को प्रभावित करती हैं। सूत्रों के अनुसार, पायलट की जांच में गांजे (मैरिजुआना) के सेवन की पुष्टि हुई है। थाईलैंड के फुकेत से दिल्ली आ रहा एअर इंडिया का एक विमान (एअरबस ए320 - एआई2379) चार अगस्त को सुबह वायुमंडलीय अस्थिरता (टर्बुलेंस) के कारण हवा में अपनी निर्धारित ऊंचाई से अचानक लगभग 300 फुट नीचे आ गया, जिससे विमान में सवार कम से कम 17 लोग घायल हो गए थे।
विमान में 137 यात्रियों और चालक दल के आठ सदस्यों सहित कुल 145 लोग सवार थे। बैठक के बाद नायडू ने कहा कि नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी तरफ से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। घटना के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार, उड़ान के दोनों पायलट की मनःप्रभावी पदार्थों के सेवन से जुड़ी जांच कराई गई थी।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने नौ अगस्त को जारी एक बयान में कहा था कि मुख्य पायलट की शुरुआती जांच के परिणाम ऐसे आए थे, जिसके लिए पुष्टि परीक्षण की आवश्यकता थी। उसी आधार पर नमूनों को आगे की प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया था। सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि जांच रिपोर्ट में पायलट द्वारा गांजे के सेवन की पुष्टि हुई है।
जांच और परीक्षण प्रक्रिया पूरी होने तक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने चालक दल के दोनों सदस्यों को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया है। मनःप्रभावी पदार्थों के सेवन के संबंध में नायडू ने कहा कि इस मुद्दे को अत्यंत गंभीरता से लिया जा रहा है और यदि आवश्यकता पड़ी तो मंत्रालय नियमों में संशोधन करने के लिए भी तैयार है। बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, हम इस (मुद्दे) का लगातार अध्ययन कर रहे हैं और हमने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से भी इस संबंध में अद्यतन जानकारी मांगी है... हम इसे बहुत गंभीरता से ले रहे हैं।
यदि हमें लगता है कि वर्तमान नियम मानक के अनुरूप नहीं हैं (उचित स्तर के नहीं हैं)... तो हम बहुत गंभीर रुख अपनाएंगे... और जो भी सुधार करने की आवश्यकता होगी, वह करेंगे। विमानन नियामक डीजीसीए के नियमों के अनुसार, यदि कोई पायलट या उड्डयन कर्मी मादक पदार्थों के सेवन की जांच में ‘पॉजिटिव’ पाया जाता है, तो उसे नशा मुक्ति कार्यक्रम के लिए भेजा जाता है। यदि वही व्यक्ति दूसरी बार भी जांच में ‘पॉजिटिव’ पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस तीन साल के लिए निलंबित कर दिया जाता है।
वहीं, यदि तीसरी बार इस नियम का उल्लंघन होता है, तो संबंधित व्यक्ति का लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है।
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