सिर के बदले सिर! कौन है जनरल रेजाई, जिसे मोजतबा ने बनाया ईरान का 'सिक्योरिटी बॉस'

रिजाई ने साफ कहा था कि इस बार ईरान का जवाब सिर्फ जैसे को तैसा वाला नहीं होगा बल्कि उससे भी कहीं आगे जाएगा। और अब इस बेहद आक्रामक सैन्य रणनीतिकार को ईरान में एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई। सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनई द्वारा सैन्य सलाहकार नियुक्त किए जाने के बाद अब उन्हें देश की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में सुप्रीम लीडर का आधिकारिक प्रतिनिधि बनाया गया है।
आंख के बदले आंख नहीं सिर के बदले सिर काटा जाएगा और अमेरिका को पूरी तरह खाड़ी छोड़नी पड़ेगी। अमेरिका को यह खुली चेतावनी देने वाले और यह ऐलान करने वाले कि जंग सिर्फ और सिर्फ ईरान की शर्तों पर खत्म होगी। मेजर जनरल मोहसीन रिजाई एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। रिजाई ने साफ कहा था कि इस बार ईरान का जवाब सिर्फ जैसे को तैसा वाला नहीं होगा बल्कि उससे भी कहीं आगे जाएगा। और अब इस बेहद आक्रामक सैन्य रणनीतिकार को ईरान में एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई। सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनई द्वारा सैन्य सलाहकार नियुक्त किए जाने के बाद अब उन्हें देश की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में सुप्रीम लीडर का आधिकारिक प्रतिनिधि बनाया गया है।
कौन है मोहसीन रिजाई और क्यों कांपता है उनसे पश्चिमी देश
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भारी तनाव और अमेरिका इसराइल के साथ जारी इस महासंग्राम के बीच मेजर जनरल मोहसिन रिजाई की यह नई नियुक्ति बेहद रणनीतिक मानी जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी देश की सबसे अहम संस्था सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि के रूप में रिजाई अब ईरान की विदेशी सैन्य और सुरक्षा नीतियों के सीधे रणनीतिकार होंगे। यह फैसला ऐसे वक्त में आया। जब ईरान अपनी रक्षात्मक नीति छोड़कर आरपार के मूड में नजर आ रहा है। मोहसीन रिजाई ईरान की सत्ता व्यवस्था के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली कट्टरपंथी चेहरों में गिने जाते हैं। 1979 की ईरानी क्रांति से पहले वे इस्लामी गोरिल्ला संगठनों के साथ जुड़े रहे। क्रांति के बाद उन्होंने रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स यानी आईआरजीसी की खुफिया शाखा बनाई और 20 सितंबर 1981 को महज 27 साल की उम्र में वे आईआरजीसी के कमांडर इन चीफ बन गए। ईरान इराक युद्ध के दौरान पूरे 8 साल तक उन्होंने मोर्चे पर रहकर सेना की कमान संभाली थी।
16 साल तक किया आईआरजीसी का नेतृत्व
करीब 16 साल तक आईआरजीसी का नेतृत्व भी किया था। 1986 में वे ईरान के सुप्रीम डिफेंस काउंसिल के भी सदस्य रहे हैं। 1997 में सैन्य कमान छोड़ने के बाद रिजाई राजनीतिक और देश की नीतियों को गढ़ने में लग गए। वे लगातार देश के राष्ट्रपति चुनाव की रेस में रहे। साल 2009, 2013 और 2021 चुनाव में इब्राहिम रही के बाद करीब 34 लाख वोटों के साथ वे दूसरे स्थान पर रहे। सैन्य मामलों के अलावा रिजाई अर्थशास्त्र और सरकारी नीतियों पर भी मजबूत पकड़ रखते हैं। वे 2021 से 2023 तक ईरान के उपराष्ट्रपति रहे हैं और फिलहाल एक्सपीडिएंसी डिसर्नमेंट काउंसिल के सदस्य होने के साथ-साथ सुप्रीम काउंसिल फॉर इकोनमिक कोऑर्डिनेशन के सचिव का पद भी संभाल रहे हैं। जानकारों का मानना है कि रजाई जैसे अनुभवी और बेहद सख्त मिजाज जनरल को सुरक्षा परिषद में सर्वोच्च प्रतिनिधि नियुक्त करने का मतलब साफ है। ईरान अब पश्चिमी ताकतों के सामने झुकने के मूड में बिल्कुल नहीं। रिजाई ना केवल सैन्य मोर्चे की बारियों को समझते हैं बल्कि आर्थिक पाबंदियों के निपटने और रणनीतिक समझ रखने में महारत हैं।
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मोजतबा ने अपने घेरे को कैसे किया मजबूत
28 फरवरी 2026 को अमेरिकी-इजराइली हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद सत्ता संभालने वाले नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने शुरुआती हमलों में घायल होने के बावजूद अपने भरोसेमंद प्रतिनिधियों के जरिए काम करते हुए सेना और सुरक्षा तंत्र पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। इसी रणनीतिक फेरबदल के तहत उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के अनुभवी रेजाई को अपने शीर्ष सैन्य गुट में शामिल किया है, वहीं आर्म्ड फोर्सेज जनरल स्टाफ (AFGS) प्रमुख मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही अलियाबादी को AFGS और 'खातम ओल-अंबिया' (KOACH) का विलय पूरा करने के निर्देश दिए हैं ताकि नियमित सेना (आर्तेश) और IRGC के बीच का मतभेद खत्म हो सके। अमेरिकी-इजराइली हमलों में पूर्व IRGC प्रमुख मोहम्मद पाकपूर और AFGS प्रमुख अब्दुल रहीम मूसावी जैसे शीर्ष कमांडरों के मारे जाने के बाद, अब अहमद वहीदी, अलियाबादी और रेजाई मिलकर इस संकट के दौर में ईरान के केंद्रीय कमान नेटवर्क को पूरी तरह स्थिर और सुचारू करने में जुटे हैं।
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ईरान-अमेरिका शांति समझौते में क्या ताज़ा जानकारी है?
रेज़ाई की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब तेहरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास बहुत अहम और जोखिम भरे घटनाक्रमों से निपट रहा है। यह समुद्र का एक संकरा रास्ता है जहाँ से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत पेट्रोलियम गुज़रता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सप्ताहांत में कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर एक रेगुलेटेड शिपिंग कॉरिडोर बनाने के लिए मस्कट की मध्यस्थता में हो रही बातचीत एक समझौते के बहुत करीब है। हालाँकि, अरागची ने वाशिंगटन के साथ सीधी बातचीत की संभावना को साफ तौर पर खारिज कर दिया और अमेरिका पर कुछ समय के लिए हुए अंतरिम समझौता ज्ञापन (MOU) का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। तेहरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बिना किसी रोक-टोक के कमर्शियल तेल की आवाजाही के लिए पूरी तरह से फिर से खोलने पर सहमत होने से पहले पाँच स्पष्ट शर्तें रखी हैं।
क्या है ये शर्तें
नौसैनिक घेराबंदी से राहत: ईरान के कमर्शियल और तेल-निर्यात करने वाले बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी को तुरंत खत्म करना।
सैनिकों की वापसी: फारस की खाड़ी इलाके से अमेरिकी आक्रामक सैन्य साधनों (assets) को वापस बुलाना।
प्रतिबंध हटाना: 2025-2026 के संघर्ष के दौरान फिर से लगाए गए या बढ़ाए गए आर्थिक और ऊर्जा प्रतिबंधों से बड़ी राहत।
संपत्ति को फ्रीज़-मुक्त करना: विदेशी बैंकों में रखी ईरान की सरकारी वित्तीय संपत्तियों को पूरी तरह से जारी करना।
युद्ध का हर्जाना: युद्ध के दौरान ईरान के आम नागरिकों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के लिए औपचारिक वित्तीय मुआवज़ा।
पश्चिम एशिया के हालात कैसे हैं?
रेज़ाई की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में कई मोर्चों पर संघर्ष चल रहा है, जिसमें क्षेत्रीय सहयोगी, प्रॉक्सी और पड़ोसी खाड़ी देश शामिल हैं। पड़ोसी देश इराक में, संघीय अधिकारियों ने ईरानी समर्थित मिलिशिया की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं, ताकि इराकी धरती पर और जवाबी हमले न हों। इराकी खुफिया अधिकारियों ने इस महीने की शुरुआत में सऊदी सुरक्षा प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और सऊदी क्षेत्र को निशाना बनाने वाले ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकने का वादा किया। यह सुरक्षा सहयोग 2 अगस्त को हुए ड्रोन हमले के बाद हुआ है, जिसका आरोप हथियार छोड़ने का विरोध करने वाले कट्टरपंथी इराकी मिलिशिया गुटों पर लगा था — इस हमले में बगदाद के उत्तर में कैंप ताजी में अमेरिका द्वारा दिए गए गोला-बारूद का भंडार नष्ट हो गया था। खुफिया विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला मिलिशिया के कट्टरपंथियों द्वारा इराकी सैन्य उपकरणों को नष्ट करने की कोशिश थी, जिनका इस्तेमाल गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों के खिलाफ किया जा सकता था।
दक्षिणी अरब में हूथी बलों और रॉयल सऊदी सशस्त्र बलों के बीच छोटे-मोटे संघर्ष भी फिर से शुरू हो गए हैं। खबरों के अनुसार, सऊदी अरब नौसैनिक और सीमित ज़मीनी अभियानों की तैयारी को अंतिम रूप दे रहा है, जिनका मकसद रेड सी (लाल सागर) में शिपिंग लेन को सुरक्षित करना और अपने पश्चिमी तट पर सऊदी कच्चे तेल के निर्यात में हूथी द्वारा पैदा की जा रही बाधाओं को खत्म करना है।
अब ईरान के लिए आगे क्या?
सैन्य फैसलों के साथ-साथ, देश की अर्थव्यवस्था को बचाए रखना भी ईरान के नेतृत्व के लिए एक ज़रूरी प्राथमिकता बनी हुई है। सरकारी मीडिया ने पुष्टि की है कि पेज़ेशकियन ने खामेनेई के साथ एक लंबी बैठक की, जिसमें देश के सैन्य बजट, विदेशी मुद्रा भंडार और ऊर्जा आवंटन की समीक्षा की गई। सरकारी टेलीविज़न ने बताया कि इस बातचीत का मुख्य मकसद संसाधन जुटाना, रियाल और ऊर्जा पर होने वाले खर्च को संभालना और विदेशी साझेदारों के साथ आपातकालीन आर्थिक सहयोग स्थापित करना था, क्योंकि देश उस स्थिति से गुज़र रहा है जिसे सरकारी मीडिया तीसरा थोपा गया युद्ध बताता है।
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