High Court ने रोका Lucknow आर्य समाज मंदिर में विवाह, कम उम्र के जोड़े की शादी का मामला

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कानून के तहत विवाह योग्य आयु की जांच किए बिना शादी कराने के मामले में एक आर्य समाज मंदिर को अगले आदेश तक विवाह संपन्न कराने या प्रमाणपत्र जारी करने से रोक दिया है। न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति बबीता रानी की पीठ ने पुलिस उत्पीड़न से सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने याचिकाकर्ता पुरुष की आयु 21 वर्ष के बजाय 19 वर्ष होने की जानकारी दी, जिसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई 31 अगस्त तय की है।

लखनऊ, पांच अगस्त इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने एक आर्य समाज मंदिर को अगले आदेश तक विवाह कराने या विवाह प्रमाण पत्र जारी करने से रोक दिया है। अदालत ने विवाह पूर्व जोड़े की कानून के मुताबिक विवाह योग्य आयु का सत्यापन करने में कथित तौर पर विफल रहने को गंभीरता से लिया है। न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति बबीता रानी की पीठ ने नेहा और एक अन्य याचिकाकर्ता द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ताओं ने कथित पुलिस उत्पीड़न से सुरक्षा की मांग की थी। अदालत ने कहा कि यदि कानून द्वारा निर्धारित आयु से नीचे के व्यक्तियों का विवाह कराया जाता है तो इस प्रक्रिया में शामिल सभी लोग कानून के तहत जिम्मेदार होंगे। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता आनंद कुमार की आयु उनके आधार कार्ड के अनुसार 19 वर्ष है, जबकि एक पुरुष के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष है।

अदालत ने पूछा कि विवाह प्रमाण पत्र में आनंद कुमार की आयु 22 वर्ष दर्ज है, जबकि उसके आधार कार्ड में आयु एक जनवरी, 2007 है और उम्र के संबंध में कोई अन्य प्रमाण उपलब्ध नहीं है। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 31 अगस्त निर्धारित की।

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