Allahabad High Court: चौथे बच्चे पर महिला कर्मी को Maternity Leave नहीं, याचिका खारिज

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश की एक सरकारी महिला कर्मचारी की उस रिट याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें चौथे बच्चे के जन्म पर छह महीने का मातृत्व अवकाश मांगा गया था। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने राज्य सरकार के वकील की इस दलील को स्वीकार किया कि नियमों के अनुसार चौथे बच्चे के लिए अवकाश का लाभ देय नहीं है। याचिकाकर्ता शशि कुमारी ने संभल के खंड शिक्षा अधिकारी के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उनके दावे को निरस्त कर दिया गया था।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक सरकारी कर्मचारी की मातृत्व अवकाश प्रदान करने के अनुरोध वाली रिट याचिका खारिज करते हुए कहा कि नियमों के तहत उन्हें चौथे बच्चे के लिए अवकाश का लाभ नहीं दिया जा सकता। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने इस आधार पर याचिका का विरोध किया कि नियम के मुताबिक याचिकाकर्ता चौथे बच्चे के लिए किसी तरह के मातृत्व अवकाश के लिए पात्र नहीं है इसलिए कोई हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है और यह याचिका खारिज किए जाने योग्य है। राज्य सरकार के वकील का बयान रिकॉर्ड में दर्ज करते हुए न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने सात अगस्त को पारित अपने आदेश में कहा कि उक्त कथन को देखते हुए इस अदालत द्वारा किसी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
यह याचिका राज्य सरकार की महिला कर्मचारी शशि कुमारी द्वारा दायर की गई थी जिसमें संभल (भीम नगर) के प्रखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा 19 जून, 2026 को पारित आदेश को चुनौती दी गई थी। इस आदेश में चौथे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश का दावा खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने अदालत से संबंधित अधिकारी को छह महीने का अवकाश दिए जाने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।
याचिकाकर्ता के वकील की दलील थी कि याचिकाकर्ता ने अन्य तीन बच्चों के जन्म पर किसी तरह का अवकाश नहीं लिया था और वह चौथे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश का लाभ लेने की पात्र है क्योंकि वह पहली बार यह लाभ लेने जा रही है। हालांकि, राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता पहले मातृत्व अवकाश का लाभ ले चुकी है।
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