Allahabad High Court ने कहा प्रयागराज को अस्पताल की सख्त जरूरत, यूपी सरकार से मांगा जवाब

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल की खराब स्थिति पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी व्यक्त की है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने प्रमुख सचिव (नियोजन एवं विकास) को व्यक्तिगत तौर पर मामले की समीक्षा कर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने सात वर्षों से बाल चिकित्सालय का निर्माण अधूरा रहने पर यूपीसिडको के प्रबंध निदेशक से भी जवाब तलब किया है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रयागराज को अस्पताल की सख्त जरूरत है। अदालत ने मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों की ‘‘लापरवाही’’ पर नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से संबद्ध स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल की दयनीय स्थिति से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने संबंधित पक्षों को सुनने के बाद कहा, ‘‘राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा दिखाई गई लापरवाही सराहनीय नहीं है और यह अदालत प्रदेश के प्रमुख सचिव (नियोजन एवं विकास) से व्यक्तिगत तौर पर इस मामले को देखने और व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने की उम्मीद करती है।’’ अदालत को राज्य सरकार द्वारा नगर के महात्मा गांधी मार्ग पर एक ट्रॉमा सेंटर के निर्माण के संबंध में अवगत कराया गया और बताया गया कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) मंजूरी और निर्माण उद्देश्य से ठेकेदार के चयन के लिए 180 दिन की समय सीमा तय की गई है। एसआरएन बाल चिकित्सालय का निर्माण कार्य अधूरा रहने पर अदालत ने कहा, ‘‘हम इस बात से हैरान हैं कि उप्र राज्य निर्माण एवं ढांचागत विकास निगम (यूपीसिडको) बाल चिकित्सालय के निर्माण के मामले में किस तरह से काम कर रहा है जो पिछले सात वर्षों से चल रहा है।’’ अदालत ने कहा कि अगली तिथि पर यूपीसिडको के प्रबंध निदेशक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर किए गए कार्य का उल्लेख करेंगे और यह बताएंगे कि उन्होंने खुली अदालत में अपने बयान में इस बात की जानकारी क्यों नहीं दी।

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