Bareilly Violence: Maulana Tauqeer Raza को झटका, High Court ने खारिज की जमानत

Bareilly Violence: Maulana Tauqeer Raza को झटका, High Court ने खारिज की जमानत
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बरेली में पिछले साल हुई हिंसा के मामले में मौलाना तौकीर रजा की रिहाई की मांग वाली अर्जी को नामंजूर कर दिया है। न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की अदालत ने कहा कि बिना अनुमति भीड़ बुलाकर पुलिस पर पथराव, एसिड फेंकने और उपद्रव करने जैसी गतिविधियों को कतई सही नहीं ठहराया जा सकता।

प्रयागराज, आठ सितंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बरेली हिंसा मामले में मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने तौकीर रजा की जमानत याचिका पर सोमवार को यह आदेश पारित किया। रजा 13 अक्टूबर, 2025 से जेल में है।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पिछले वर्ष 26 सितंबर को मौलाना तौकीर रजा ने एक विशेष समुदाय के लोगों से बरेली के इस्लामिया इंटर कॉलेज परिसर में एकत्रित होने का आह्वान किया था। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू रहने के बावजूद करीब 200-250 लोगों की भीड़ जमा हुई और उन्होंने मौलाना आजाद इंटर कॉलेज से श्यामगंज चौराहा की तरफ कूच किया। तख्तियां लिए इस भीड़ ने भड़काऊ नारे लगाए और मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों की चेतावनी को नजरअंदाज किया।

स्थिति उस समय बिगड़ गई जब कुछ लोग आक्रामक हो गए और आगे बढ़ने पर अड़ गए। इसके बाद, उन्होंने पुलिस कर्मियों पर पथराव किया और तेजाब से भरी बोतलें फेंकी। इस दौरान भीड़ की ओर से पुलिस कर्मियों पर गोलीबारी भी की गई।

प्राथमिकी के मुताबिक, हिंसा में पुलिसकर्मियों की वर्दी फाड़ दी गई और दो अधिकारियों को चोटें भी आईं। यह भी आरोप है कि भीड़ की आक्रामकता से उस क्षेत्र में आतंक का माहौल बन गया जिससे पुलिस को आत्मरक्षा में हवा में गोलियां चलानी पड़ीं। अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘रिकॉर्ड से पता चलता है कि याचिकाकर्ता ने अपने धार्मिक और राजनीतिक हितों को पूरा करने के लिए शुक्रवार की नमाज के मौके का फायदा उठाते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज के बाद इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान पर एकत्रित होने को कहा ताकि सरकार की कार्रवाई का विरोध किया जा सके और जिला मजिस्ट्रेट के जरिए राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जा सके।’’ अदालत ने कहा, ‘‘स्थानीय प्रशासन से अनुमति लिए बगैर इतनी बड़ी सभा बुलाई गई थी।

याचिकाकर्ता ने यह तर्क देने की भी कोशिश की कि अनुमति न मिलने और बीएनएसएस की धारा 163 लागू होने के कारण इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान में एकत्रित होने का आह्वान रद्द कर दिया गया था। लेकिन तथ्य यह है कि मुस्लिम समुदाय से बड़ी संख्या में लोगों ने मार्च निकाला और पुलिस द्वारा रोके जाने पर उनके साथ मारपीट की गई और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। इस कृत्य की अनुमति नहीं दी जा सकती।’’ अदालत ने कहा, ‘‘इस घटना के बाद याचिकाकर्ता द्वारा लोगों को धन्यवाद दिया गया और उनके कृत्यों की तारीफ की गई।

इसे भी सही नहीं ठहराया जा सकता।’’ अदालत ने अपर महाधिवक्ता की इस दलील में भी दम पाया कि घटना के दौरान लगाया गया उकसावे भरा एक नारा कुछ और नहीं बल्कि कानून की सत्ता और भारत की संप्रभुता एवं एकता को चुनौती है। उच्च न्यायालय ने कहा कि यद्यपि याचिकाकर्ता के खिलाफ 21 दिसंबर, 2025 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था, लेकिन अभी आरोप तय किए जाने बाकी हैं। सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अदालत याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा करने के पक्ष में नहीं है।

इसलिए जमानत याचिका खारिज की जाती है।

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