Allahabad HC ने पत्रकार पर दर्ज FIR पर लगाई रोक, स्कूल की बदहाली दिखाने पर हुई थी कार्रवाई

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने लखनऊ के एक सरकारी स्कूल में कमियां उजागर करने वाले पत्रकार अमित यादव के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। अदालत ने इसे आईना दिखाने वाले को दोषी ठहराने जैसी प्रतिशोधात्मक कार्रवाई करार दिया। पीठ ने बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को स्कूल की वर्तमान स्थिति और तस्वीरों के साथ व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।

लखनऊ, नौ सितंबर सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति को उजागर करने वाले पत्रकार के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि पत्रकार द्वारा स्कूल की कमियों को उजागर किए जाने के बाद उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई जो प्रथम दृष्टया प्रतिशोधात्मक कार्रवाई प्रतीत होती है। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि पत्रकार द्वारा सरकारी विद्यालय की कमियों को उजागर करने के बाद उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना ‘आईना दिखाने वाले को ही दोषी ठहराने’ जैसा है।

इसी के साथ अदालत ने अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया जिसमें उन्हें संबंधित स्कूल की वर्तमान स्थिति के साथ स्कूल परिसर की तस्वीरें भी दाखिल करने को कहा गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने पत्रकार अमित यादव की याचिका पर पारित किया। याची के विरुद्ध गोसाईगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

याची की ओर से दलील दी गई कि वह पत्रकार के रूप में पूर्व माध्यमिक विद्यालय, बेगरिया मऊ, गोसाईंगंज, लखनऊ गया था, जहां स्कूल के शौचालय बदहाल स्थिति में थे व छात्रों के लिए पेयजल की व्यवस्था भी नहीं थी। इस विषय पर उसने कुछ शिक्षकों के साक्षात्कार भी लिए थे। रिपोर्टिंग के चार दिन बाद 24 अगस्त को उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

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