Rewa Hospital में शवों से दुष्कर्म के Congress MLA Abhay Mishra के आरोप पर विवाद, प्रशासन ने बताया निराधार

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मध्यप्रदेश के रीवा स्थित संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय के शवगृह में महिलाओं के शवों के साथ गलत कृत्य होने के कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के दावे के बाद विवाद खड़ा हो गया है। अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज किया है। विधायक ने यह बयान अस्पताल में एक महिला और उसके नवजात की मौत के विरोध में चल रहे प्रदर्शन के दौरान दिया था।

रीवा, नौ सितंबर मध्यप्रदेश में कांग्रेस के एक विधायक ने रीवा के प्रसिद्ध संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय (एसजीएमएच) के शव गृह में ‘‘सुंदर महिलाओं’’ के शवों के साथ दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया है। विधायक के इस आरोप के बाद विवाद पैदा हो गया। रीवा की सेमरिया विधानसभा से विधायक अभय मिश्रा ने पोस्टमॉर्टम के नाम पर मृतकों के परिजनों से पैसे वसूले जाने का भी आरोप लगाया।

हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने उनके आरोपों को निराधार और सत्य से परे बताते हुए खारिज कर दिया और विधायक को नसीहत दी कि एक जनप्रतिनिधि को ऐसे आरोप लगाने से पहले सोचना चाहिए। दरअसल, हाल में संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में प्रसव के दौरान कल्पना मिश्रा नाम की एक महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई थी। इसके विरोध में रीवा में पिछले कुछ दिनों से जारी आंदोलन में मंगलवार को शिरकत करते हुए अभय मिश्रा ने उक्त आरोप लगाए थे, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है।

विधायक ने दो साल पहले एक व्यक्ति से हुई मुलाकात का हवाला देते हुए कहा कि उनकी बहू का पोस्टमार्टम कराना था और इसमें वह उनसे मदद मांगने आए थे। उन्होंने बताया कि व्यक्ति की गुजारिश यह थी कि चाहे कितने भी पैसे लग जाएं लेकिन वह अपनी आंखों के सामने ही अपनी ‘सुंदर बहू’ का पोस्टमार्टम करवाएंगे। उन्होंने कहा कि उक्त व्यक्ति ने दावा करते हुए कहा था, ‘‘जब किसी सुंदर महिला की मौत होती है और पोस्टमार्टम के लिए शव को शव गृह में रखा जाता है तथा घर-परिवार के लोग वहां खड़े नहीं रहते हैं तो शव के साथ दुष्कर्म किया जाता है।’’ विधायक मिश्रा से जब इस वीडियो और उनके आरोपों के संदर्भ में ‘पीटीआई-भाषा’ ने बात की तो उन्होंने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह बात उन्हें दो साल पहले ‘एक सज्जन’ ने बताई थी और उन्हीं के हवाले से उन्होंने आरोप लगाए हैं।

उनसे जब कोई सबूत होने की बात पूछी गई तो उन्होंने कहा, ‘‘मैं राजनेता हूं, चश्मदीद नहीं। समाज के लोग अपनी समस्याओं को लेकर हमारे पास आते हैं और हम उन्हें जनता के समक्ष रखते हैं।’’ अपने आरोपों पर कायम रहते हुए विधायक मिश्रा ने दावा किया कुछ साल पहले डॉक्टर एस के पाठक अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी हुआ करते थे और उस समय पोस्टमार्टम के दौरान कुछ आरोपों के चलते वहां के राकेश और मुन्ना सहित तीन कर्मचारियों को अलग-अलग समय में हटा दिया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘इसकी जांच करा ली जाए तो सारे तथ्य सामने आ जाएंगे।’’ प्राप्त जानकारी के मुताबिक पाठक साल 2011-12 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

‘पीटीआई-भाषा’ ने जब पाठक से संपर्क किया तो उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान शव से दुष्कर्म या छेड़छाड़ जैसा कोई मामला या आरोप सामने आने से इनकार किया। पाठक ने कहा कि उन दिनों प्रदेश में ऐसी एक घटना हुई थी जिसके बाद उन्होंने अस्पताल के शव गृह में सुरक्षा संबंधी कई उपाय किए थे और लंबे समय से वहां तैनात कुछ कर्मियों को हटा दिया था। अस्पताल के वर्तमान सीएमओ अलख प्रकाश ने संवाददाताओं से बातचीत में विधायक मिश्रा के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि इनमें कोई सत्यता नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘वे जनता के प्रतिनिधि हैं। ऐसे वक्तव्य देने से पहले उन्हें सोचना चाहिए कि वे क्या आरोप लगा रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि यदि उनके पास कोई स्पष्ट सबूत है तो वह सबके सामने रख सकते हैं। विधायक मिश्रा बुधवार को राजधानी में थे, जहां वह अस्पताल में कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे।

हालांकि पुलिस ने उन्हें और उनके समर्थकों को कुछ देर बाद वहां से यह कहते हुए हटा दिया कि उन्होंने धरने पर बैठने के लिए पुलिस से अनुमति नहीं ली थी। मामले को लेकर लगातार विरोध-प्रदर्शन के बीच कार्रवाई करते हुए सरकार ने दो चिकित्सकों और दो नर्सिंग स्टाफ को निलंबित कर दिया था जबकि अस्पताल के डीन और अधीक्षक को उनके पदों से हटा दिया गया था। पूरे मामले की मजिस्ट्रेटी जांच जारी है।

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