Amit Shah in Lok Sabha: अन्याय किसी के साथ भी हो सकता पर हथियार उठाना कितना सही, लोकसभा में नक्सलवाद पर बोले अमित शाह

अमित शाह ने कहा कि आपका लड़ने का तरीका क्या है, हम अंग्रेजों के शासन में नहीं रह रहे हैं। कुछ लोगों ने भगत सिंह जी और बिरसा मुंडा से तुलना ऐसे लोगों से कर दी, जो अक्षम्य है। आपलोग क्या हिमाकत कर रहे हैं। शहीद भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा, जो अंग्रेजों के सामने लड़े, और आप उनकी तुलना संविधान तोड़कर, हाथ में हथियार लेकर निर्दोषों की हत्या करने वालों से कर रहे हैं?
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में है और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ के बस्तर में इसे लगभग समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने कांग्रेस पर अपने कार्यकाल के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में आदिवासियों के कल्याणकारी लाभ सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाया। लोकसभा में नक्सलवाद उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का विवरण देते हुए अमित शाह ने कांग्रेस से सवाल किया कि पार्टी ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रगति क्यों सुनिश्चित नहीं की, और कहा कि वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) का विकास से कोई संबंध नहीं है।
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अमित शाह ने कहा कि आपका लड़ने का तरीका क्या है, हम अंग्रेजों के शासन में नहीं रह रहे हैं। कुछ लोगों ने भगत सिंह जी और बिरसा मुंडा से तुलना ऐसे लोगों से कर दी, जो अक्षम्य है। आपलोग क्या हिमाकत कर रहे हैं। शहीद भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा, जो अंग्रेजों के सामने लड़े, और आप उनकी तुलना संविधान तोड़कर, हाथ में हथियार लेकर निर्दोषों की हत्या करने वालों से कर रहे हैं? मैं कहना चाहता हूं कि ऐसे विषयों में राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठ जाना चाहिए। लोकसभा में नक्सलवाद उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का विवरण देते हुए अमित शाह ने कांग्रेस से सवाल किया कि पार्टी ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रगति क्यों सुनिश्चित नहीं की, और कहा कि वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) का विकास से कोई संबंध नहीं है।
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संवाद की वकालत करने वालों से मैं वही बात दोहराना चाहता हूँ जो मैंने बस्तर के सार्वजनिक मंचों से कई बार कही है: अपने हथियार डाल दो, और सरकार तुम्हारा पुनर्वास सुनिश्चित करेगी। लेकिन वे हथियार डालने से इनकार कर रहे हैं। हमारी सरकार की नीति स्पष्ट है। हम उन लोगों से बातचीत के लिए तैयार हैं जो अपने हथियार डाल देते हैं। हिंसा का रास्ता चुनने वालों को कड़ा जवाब दिया जाएगा। अब नक्सलवाद से मुक्त भारत की रचना भी मोदी जी के शासन के अंदर ही हो रही है।
ये 12 साल, एक प्रकार से देश के लिए बहुत शुभ साबित हुए हैं।
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