नो करप्शन, नो फियर, बालेन इज हियर! छात्र राजनीति पर रोक, एग्जाम भी खत्म, नए PM के 5 बड़े फैसले ने हिलाया नेपाल

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अभिनय आकाश । Mar 30 2026 3:17PM

सरकार के प्लान के मुताबिक 15 दिनों के भीतर एक कमेटी बनाई जाएगी, जो 2006 के बाद बड़े पदों पर रहे नेताओं और अफसरों की संपत्ति की जांच करेगी। इसके बाद 1991 से 2006 के बीच के मामलों को भी देखा जाएगा।

किसी भी राष्ट्र की आत्मा उसकी शिक्षा व्यवस्था में बसती है। और जब कोई युवा नेतृत्व उस आत्मा को राजनीति के चंगुल से छुड़ाने का संकल्प ले ले तो इतिहास रचा जाता है। नेपाल में कुछ ऐसा ही हुआ है। प्रधानमंत्री बालन शाह ने सत्ता संभालते ही वह कर दिखाया जिसकी हिम्मत दशकों से कोई नहीं कर पाया। शिक्षा के मंदिर को राजनीति का अखाड़ा बनाने वाले संगठनों को 60 दिन का अल्टीमेटम दे दिया गया है। विदेशी नामों वाली मैकाले पद्धति पर प्रहार हुआ है और बचपन को परीक्षा के बोझ से आजाद कर दिया गया है। क्या है बालेन का यह 100 दिवसीय एक्शन प्लान जिसको लेकर पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। छात्र राजनीति पर पूर्ण प्रतिबंध। 60 दिन में दफ्तर खाली करने के आदेश।  अब विदेशी षड्यंत्र का शिक्षा से खात्मा। ऑक्सफोर्ड सेंट जेवियर्स को बदलने होंगे नाम। अब नेपाल में होगा परीक्षा मुक्त बचपन। कक्षा पांच तक कोई पारंपरिक परीक्षा नहीं। नेपाल की राजधानी काठमांडू से उठी क्रांति की लहर अब पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था को बदलने जा रही है। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने अपने 100 दिवसीय एक्शन प्लान के जरिए शिक्षा के उस पुराने ढांचे पर प्रहार किया जो दशकों से राजनीति के दीमक का शिकार थी। सबसे बड़ा और कड़ा फैसला है छात्र राजनीति पर पूर्ण प्रतिबंध। अब नेपाल की स्कूलों और विश्वविद्यालयों में किसी भी राजनीतिक दल के झंडे नहीं दिखेंगे।

बालेन कैबिनेट ने साफ कर दिया कि शिक्षण संस्थान केवल ज्ञान के केंद्र होंगे। नेताओं के अखाड़े नहीं। अगले 60 दिनों के भीतर सभी राजनीतिक संगठनों को कैंपस से अपना बोरिया बिस्तर समेटना होगा। दलगत राजनीति की जगह वॉइस ऑफ स्टूडेंट का उदय। अगले 90 दिनों में बनेगा गैर राजनीतिक लोकतांत्रिक तंत्र। छात्रों की वास्तविक समस्याओं का होगा समाधान। प्रोपेगेंडा का नहीं। शिक्षा के कैलेंडर को राजनीति के कारण नहीं रुकने दिया जाएगा। अक्सर देखा गया है कि छात्र राजनीति के नाम पर युवा किसी एक विचारधारा के पीछे आंख मूंद कर चल देते हैं। बालन शाह का मानना है कि इससे मौलिक चिंतन और शोध की क्षमता मर जाती है। जेएनयू और डीयू जैसे संस्थानों में जो गंध मची है नेपाल उससे बचना चाहता है। बालेन ने विकल्प दिया स्टूडेंट काउंसिल। यह कोई राजनीतिक विंग नहीं बल्कि छात्रों की समस्याओं को सुनने वाला एक पारदर्शी मंच होगा। इसका मकसद है छात्रों को फॉलोअर्स बनाने की बजाय सीकर यानी कि खोजी बनाना। जब छात्र किसी पूर्वाग्रह से मुक्त होकर चिंतन करेगा तभी वह समाज को कुछ नया दे पाएगा। 

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ग्रेजुएशन के लिए नेपाली नागरिकता जरूरी नहीं

सरकार ने निर्देश दिया है कि जिन स्कूलों और कॉलेजों के नाम विदेशी हैं। उन्हें इसी साल के भीतर नाम बदलने होंगे और नेपाली नाम रखना होगा। सरकार ने यह भी कहा है कि ग्रेजुएशन तक पढ़ाई के लिए नेपाली नागरिकता अनिवार्य नहीं होगी।

तीन प्रधानमंत्रियों की संपत्ति की जांच होगी

नेपाल सरकार ने मनी लॉन्डिंग मामले में तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों (देउवा, ओली और प्रचंड) समेत दो मंत्री और उनके परिवार की संपत्ति की जांच तेज कर दी है। वहीं, केपी ओली और गृह लेखाक की हिरासत पर मंत्री अदालती सुनवाई जारी है।

नेताओं-अफसरों की संपत्ति की जांच होगी

सरकार के प्लान के मुताबिक 15 दिनों के भीतर एक कमेटी बनाई जाएगी, जो 2006 के बाद बड़े पदों पर रहे नेताओं और अफसरों की संपत्ति की जांच करेगी। इसके बाद 1991 से 2006 के बीच के मामलों को भी देखा जाएगा।

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नेपाली कांग्रेस के नेता दीपक खड्‌का गिरफ्तार

नेपाली कांग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री दीपक खड्‌का को रविवार सुबह बुढानीलकंठ स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया गया। उन्हें नेपाल पुलिस के सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (सीआईबी) ने मनी लॉन्डिंग जांच विभाग के निर्देश पर हिरासत में लिया।

जेन-जी आंदोलन में मृतकों के परिवार को सरकारी नौकरी

नेपाल की सरकार ने देश में सुशासन (गुड गवर्नेस) लाने के लिए 100-पॉइंट वर्क प्लान जारी किया है। यह फैसला बलेंद्र शाह सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में लिया गया। काठमांडू पोस्ट के अनुसार, प्रशासन ने शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार पर बड़े सुधारों की रूपरेखा तय की गई। 15 दिनों के भीतर एक कमिटी बनाई जाएगी, जो 2006 के जनआंदोलन के बाद से अब तक ऊंचे पदों पर रहे नेताओं और अधिकारियों की संपत्ति की जांच करेगी। इसके बाद दूसरे चरण में 1991 से 2006 तक के पदाधिकारियों की भी जांच होगी। सितंबर में हुए 'Gen Z आंदोलन' के बाद प्रभावित लोगों के लिए पुनर्वास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की भी योजना बनाई गई है। 100 दिनों के भीतर एक पूरा पुनर्वास पैकेज लागू करने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जान गंवाने वाले 27 लोगों के करीबी परिजन को सरकारी नौकरी देने का फैसला भी हुआ है। 15 दिनों के अंदर राज्य उन समुदायों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय और भेदभाव को आधिकारिक रूप से स्वीकार करेगा और उनके लिए सामाजिक न्याय का ढांचा तैयार करेगा।

सभी दलों से बनेगा 'नैशनल कमिटमेट'

सरकार एक 'नैशनल कमिटमेंट' बनाएगी, जिसमें सभी राजनीतिक दल और हितधारक होंगे। फेडरल सिविल सर्विस बिल का मसौदा 45 दिनों के भीतर तैयार किया जाएगा। इस कार्ययोजना का मकसद यह है कि जांच रिपोर्ट सिर्फ फाइलों में दबकर न रह जाएं। अब 30 दिनों के अंदर पुरानी रिपोर्टों की सिफारिशों को लागू किया जाएगा। इसके लिए सरकार जरूरी कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाएगी, जैसे सिस्टम में सुधार, ढांचे में बदलाव और नियमों का सख्ती से पालन कराना।

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