अनिल घनवत का सीजेआई को लिखा पत्र, कृषि कानूनों पर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की

अनिल घनवत का सीजेआई को लिखा पत्र, कृषि कानूनों पर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की

अनिल घनवत शेतकरी संगठन के वरिष्ठ नेता हैं। घनवत ने दावा किया कि अगले कुछ महीनों में वह दिल्ली में एक लाख किसानों को गोलबंद करेंगे और कृषि सुधार की मांग को लेकर उन्हें दिली लाएंगे।

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक पैनल का गठन किया था। उसी पैनल के एक सदस्य ने प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखकर तीन कृषि कानूनों पर रिपोर्ट को जल्द से जल्द सार्वजनिक करने पर विचार करने या फिर समिति को ऐसा करने के लिए अधिकृत करने का आग्रह किया है। चिट्ठी लिखने वाले सदस्य का नाम अनिल घनवत है। अनिल घनवत शेतकरी संगठन के वरिष्ठ नेता हैं। घनवत ने दावा किया कि अगले कुछ महीनों में वह दिल्ली में एक लाख किसानों को गोलबंद करेंगे और कृषि सुधार की मांग को लेकर उन्हें दिली लाएंगे। 

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घनवत ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानूनों को संसद के शीतकालीन सत्र में निरस्त किए जाने के बाद समिति की रिपोर्ट अप्रासंगिक नहीं रहेगी लेकिन सिफारिशें व्यापक जनहित की है। ऐसे में उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि रिपोर्ट एक शैक्षिक भूमिका भी निभा सकती है और कई किसानों की गलतफहमी को कम कर सकती है, जो मेरी राय में, कुछ नेताओं द्वारा गुमराह किए गए हैं...। तीन सदस्यीय समिति ने 19 मार्च को शीर्ष अदालत को रिपोर्ट सौंप दी थी, लेकिन रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है।

मंत्रिमंडल ने तीन कृषि कानून को निरस्त करने संबंधी विधेयक को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने संबंधी विधेयक को बुधवार को मंजूरी दी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने यह जानकारी दी। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने से संबंधित विधेयक पेश किये जाने के लिये सूचीबद्ध है। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद अनुराग ठाकुर ने संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला किया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर को गुरु पर्व के अवसर पर राष्ट्र के नाम संबोधन में तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले की घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि आज केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इन तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के संबंध में औपचारिकताएं पूरी कर ली गई। 





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