सुरक्षा ही नहीं, बिजली आपूर्ति के लिए भी इस्तेमाल में लाए जाते है कांटेदार तार

सुरक्षा ही नहीं, बिजली आपूर्ति के लिए भी इस्तेमाल में लाए जाते है कांटेदार तार

घरों में भी पतले लोहे के तार का इस्तेमाल किया जाता है। ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि इन तारों को लकड़ी के खंभे या पेड़ों में लटका दिया जाता है। इसकी वजह से बिजली विभाग को नुकसान का भी सामना करना पड़ता है।

कश्मीर के संदर्भ में देखें तो सुरक्षा का पर्याय बने कांटेदार तार अब कई कामों में इस्तेमाल किए जा रहे है। कश्मीर में ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में इन तारों का इस्तेमाल कर बिजली की आपूर्ति की जाती है। ऐसा हम नहीं कह रहे है बल्कि केंद्र शासित प्रदेश में सर्वे करने गई केंद्रीय टीम ने दावा किया है। इतना ही नहीं बिजली घरों में भी पतले लोहे के तार का इस्तेमाल किया जाता है। ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि इन तारों को लकड़ी के खंभे या पेड़ों में लटका दिया जाता है। इसकी वजह से बिजली विभाग को नुकसान का भी सामना करना पड़ता है।

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सर्वे करने गई टीम ने हींयह भी पाया है कि इन तारों का इस्तेमाल कनेक्शन के लिए भी किया गया है। हालांकि कुशल और टिकाऊ बिजली प्रणाली में यह कारगर नहीं होता है। बिजली मंत्री आरके सिंह ने दावा किया है कि देश में पर्याप्त बिजली आपूर्ति है। हमारा उद्देश्य है कि हम जम्मू कश्मीर के अंतिम व्यक्ति तक 24x7 सस्ती बिजली पहुंचा सके। बिजली विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन कांटेदार तारों का कई वर्षों से लो टेंशन कनेक्शन के लिए उपयोग किया जा रहा है। यह हर जगह नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में घर बिखरे हुए है। ऐसे में वहां यह दिख जाते है।

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एक अधिकारी ने बताया कि इन तारों का ऐसे मामलों में ज्यादातर इस्तेमाल होता है जब कनेक्शन के लिए तार कम पड़ जाते है। ऐसी स्थिति में इन कांटेदार तारों को तात्कालिक उपाय समझकर इस्तेमाल कर लिया जाता है। अधिकारी ने यह भी कहा कि पोल उपलब्ध नहीं होने से इन तारों पर ही लोगों को ज्यादा भरोसा है। हालांकि अब इसमें बदलाव देखने को मिल रहे है। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू कश्मीर में विकास के कार्य तेजी से हो रहे है। घर-घर तक बिजली भी पहुंचाए जा रहे है। इसके लिए पोल और बिजली के सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।





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