FDA पर भड़का Bombay High Court, Cipla और MCA के 5 रेस्टोरेंट के खिलाफ आदेश वापस लेने पड़े

Tukaram Mundhe
X
एकता । Aug 30 2026 12:57PM

बॉम्बे हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद महाराष्ट्र एफडीए को मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के पांच रेस्टोरेंट और सिप्ला की पुणे इकाई के खिलाफ जारी कार्रवाई के आदेश वापस लेने पड़े हैं। अदालत ने एफडीए के रवैये को व्यावहारिक के बजाय जरूरत से ज्यादा कठोर और प्राकृतिक न्याय के खिलाफ बताया तथा भविष्य में अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन को दो अलग-अलग मामलों में कड़ी फटकार लगाई। इन मामलों में अदालत की सख्ती के बाद एफडीए को पुणे में Cipla की एक सुविधा और मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन परिसर में चल रहे पांच रेस्टोरेंट के खिलाफ अपने आदेश वापस लेने पड़े।

अदालत ने एफडीए पर ‘अनुचित जल्दबाजी’ में कार्रवाई करने और कानून का सही तरीके से विश्लेषण नहीं करने का आरोप लगाया। एक मामले में कोर्ट ने कहा कि विभाग ने ‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों’ का भी उल्लंघन किया। एमसीए से जुड़े मामले में अदालत ने एफडीए के रवैये को ‘व्यावहारिक के बजाय नियमों को लेकर जरूरत से ज्यादा कठोर’ बताया।

क्या आपको लगता है कि आप भगवान हैं?

सबसे कड़ी टिप्पणी बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित एमसीए परिसर के पांच रेस्टोरेंट से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की बेंच ने एफडीए के रवैये पर सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान सामने आया कि नए निरीक्षण में इन पांच रेस्टोरेंट ने खाद्य सुरक्षा से जुड़ी 88 प्रतिशत आवश्यकताओं का पालन किया था।

एफडीए से सवाल करते हुए अदालत ने पूछा, “क्या आपको लगता है कि आप भगवान हैं और कुछ भी कर सकते हैं?” कोर्ट ने कहा कि उसने पहले भी एफडीए को मामले पर ठीक से विचार करने और व्यावहारिक नजरिया अपनाने को कहा था, लेकिन विभाग ने इसके बजाय ‘पेडेंटिक’ यानी जरूरत से ज्यादा नियम-केंद्रित रवैया अपनाया।

इसे भी पढ़ें: Maharashtra FDA ने Cipla की पुणे यूनिट का लाइसेंस किया रद्द, नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई

अब अवमानना की कार्रवाई करेंगे

अदालत ने एफडीए के अधिकारियों को कड़ी चेतावनी भी दी। बेंच ने कहा कि वह विभाग और उसके अधिकारियों को बार-बार फटकार लगाते-लगाते थक चुकी है और अब कड़ी कार्रवाई वाले आदेश देने का समय आ गया है।

कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी और उन्हें अदालत को संतुष्ट करना होगा, वरना जेल जाने की स्थिति बन सकती है।

इसके बाद एफडीए ने अदालत को बताया कि वह एमसीए परिसर के पांच रेस्टोरेंट का संचालन निलंबित करने वाला आदेश वापस लेगा। साथ ही एमसीए को मेसर्स शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ उसके अनुबंध को लेकर जवाब देने का मौका देते हुए नया नोटिस जारी किया जाएगा।

अदालत ने इस कदम को स्वीकार कर लिया। चूंकि नए निरीक्षण में रेस्टोरेंट खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करते पाए गए थे, इसलिए निलंबन का आदेश हटा दिया गया और पांचों रेस्टोरेंट को दोबारा खोलने की अनुमति मिल गई।

रेस्टोरेंट के लाइसेंस को लेकर क्या था विवाद?

पूरा विवाद इस बात को लेकर था कि रेस्टोरेंट के फूड लाइसेंस एमसीए के नाम पर जारी किए गए थे, जबकि उनका संचालन मेसर्स शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर कर रहा था।

अदालत ने कहा कि कानून में ऐसी व्यवस्था पर रोक लगाने वाला कोई प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि एफडीए ने कानून को ठीक से समझे बिना ऐसे आदेश क्यों जारी किए।

बेंच ने यह भी कहा कि वह कई बार विभाग को मामले में संतुलन बनाने और व्यावहारिक नजरिया अपनाने के लिए समझा चुकी है। इसी दौरान अदालत ने सवाल किया कि “मच्छर को तलवार से क्यों मारना?”

इसे भी पढ़ें: Maharashtra FDA ने कहा- खुले खाद्य तेल पर रोक नया फैसला नहीं, 2011 से है नियम

सिप्ला के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने का आदेश भी वापस

दूसरे मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एफडीए को सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड की पुणे के वाडकी स्थित कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग सुविधा के ड्रग बिक्री लाइसेंस रद्द करने का आदेश भी वापस लेना पड़ा।

एफडीए ने कथित तौर पर रिएक्टिन प्लस टैबलेट की पैकेजिंग और रिकॉल से जुड़ी जांच के दौरान कुछ उल्लंघन पाए थे। इसके बाद लाइसेंस को 27 अगस्त से रद्द करने का आदेश दिया गया था।

कोर्ट ने इस कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। खास तौर पर अदालत ने उस ईमेल का जिक्र किया, जिसमें कंपनी के प्रतिनिधि को सुनवाई के लिए ऐसे दिन बुलाया गया था, जो राज्य सरकार द्वारा घोषित सार्वजनिक अवकाश था।

आप हद से आगे जा रहे हैं

एफडीए की कार्रवाई पर कोर्ट ने कहा कि विभाग अच्छा काम कर रहा है, लेकिन अब वह हद से आगे जा रहा है। अदालत ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है और विभाग ने इस मामले में गलत किया है, इसलिए अब उसे इसे ठीक करना होगा।

कोर्ट ने एफडीए की कार्रवाई को ‘मनमाना और अधिकारपूर्ण’ बताया और कहा कि लाइसेंस रद्द करने के लिए गलत प्रक्रिया अपनाई गई। अदालत ने कहा कि यह आदेश ‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ’ है। कोर्ट की दखल के बाद एफडीए ने सिप्ला का लाइसेंस रद्द करने वाला आदेश भी वापस ले लिया।

तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में एफडीए की कार्रवाई पर सवाल

ये दोनों मामले महाराष्ट्र एफडीए के व्यापक कार्रवाई अभियान के बीच सामने आए हैं। तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में एफडीए खाद्य और दवा सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर रेस्टोरेंट और अन्य कारोबारों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है।

हालांकि, इन दो मामलों में बॉम्बे हाईकोर्ट ने विभाग की कार्रवाई के तरीके, कानून की व्याख्या और संबंधित पक्षों को सुनवाई का उचित मौका देने को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

All the updates here:

अन्य न्यूज़