Pune से Delhi तक CJP की पदयात्रा, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े छात्र

पुणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि संगठन आज ही अपना शिक्षा घोषणापत्र जारी करेगा। यह सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी (SPPU) कैंपस से शुरू होने वाले देशव्यापी आंदोलन के साथ ही किया जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भी शामिल होने की उम्मीद है; दिपके ने कहा कि यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से किया जाएगा।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने गुरुवार को परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ़ देशव्यापी विरोध अभियान शुरू करने की घोषणा की। इसके तहत आज शाम 4 बजे पुणे में विरोध प्रदर्शन होगा। CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की अपनी मांग भी दोहराई। पुणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि संगठन आज ही अपना शिक्षा घोषणापत्र जारी करेगा। यह सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी (SPPU) कैंपस से शुरू होने वाले देशव्यापी आंदोलन के साथ ही किया जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भी शामिल होने की उम्मीद है; दिपके ने कहा कि यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से किया जाएगा।
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परीक्षा सुधारों पर ध्यान
डिपके के अनुसार, घोषणापत्र में कई ऐसे सुधारों का ज़िक्र है जिनका मकसद छात्रों की लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करना है। उन्होंने कहा कि घोषणापत्र में प्रश्न-पत्र लीक रोकने, परीक्षा के नतीजे समय पर घोषित करने, भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने, परीक्षा अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और परीक्षा आयोजित करने में देरी व अनियमितताओं के कारण छात्रों को होने वाली दिक्कतों को दूर करने पर ध्यान दिया गया है। ये प्रस्तावित उपाय देश भर में कथित पेपर लीक, नतीजों में देरी और भर्ती व प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सामने आए हैं।
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पुणे से शुरू होकर दिल्ली में खत्म होगी पदयात्रा
डिपके ने बताया कि यह अभियान पुणे से शुरू होगा और जयपुर, लखनऊ, अमृतसर और बेंगलुरु जैसे कई शहरों से होकर गुज़रेगा। उम्मीद है कि यह आंदोलन 20 जून को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर खत्म होगा। समूह की मांग को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं दे देते। उन्होंने कहा कि हम तब तक वापस नहीं लौटेंगे जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं मिल जाता, जो एक करोड़ से ज़्यादा छात्रों का भविष्य खतरे में डालने के लिए ज़िम्मेदार हैं।
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