Indonesia के Central Bank Governor Perry Warjiyo का अचानक इस्तीफा, Rupiah में भारी गिरावट से हिला Market

Perry Warjiyo
प्रतिरूप फोटो
X
Ankit Jaiswal । Jul 27 2026 8:09PM

इंडोनेशिया के केंद्रीय बैंक गवर्नर पेरी वारजियो का इस्तीफा वित्तीय स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल उठाता है जिसके कारण रुपिया में भारी गिरावट देखी गई है। बाजार विश्लेषक इसे राजनीतिक दबाव और केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता के हनन के रूप में देख रहे हैं जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है। इंडोनेशियाई अर्थव्यवस्था के लिए यह नेतृत्व परिवर्तन अस्थिरता और अनिश्चितता का नया दौर शुरू कर सकता है।

इंडोनेशिया के वित्तीय बाजारों में सोमवार को उस समय हलचल बढ़ गई जब देश के केंद्रीय बैंक के गवर्नर पेरी वारजियो ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस अप्रत्याशित फैसले के बाद निवेशकों के बीच केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को लेकर नई चिंताएं सामने आने लगीं। मौजूद जानकारी के अनुसार इस्तीफे की खबर के बाद इंडोनेशियाई मुद्रा रुपिया में कमजोरी आई और शेयर बाजार में भी गिरावट दर्ज की गई।

बता दें कि कारोबार समाप्त होने तक रुपिया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 0.36 प्रतिशत कमजोर होकर 18,000 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गई, जो एक सप्ताह से अधिक समय का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है। वहीं देश के प्रमुख शेयर इंडेक्स में भी गिरावट देखने को मिली। हालांकि सरकार ने निवेशकों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि वित्तीय व्यवस्था सामान्य रूप से काम करती रहेगी।

मौजूद जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने पेरी वारजियो का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके बाद केंद्रीय बैंक की वरिष्ठ उप गवर्नर डेस्ट्री दमायंती को अंतरिम गवर्नर नियुक्त किया गया है। डेस्ट्री दमायंती ने बताया कि पेरी वारजियो ने शनिवार को निजी कारणों का हवाला देते हुए अपना इस्तीफा सौंपा था। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक की प्राथमिकता पहले की तरह ही रुपिया की स्थिरता और वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना रहेगी।


गौरतलब है कि हाल के महीनों में इंडोनेशिया का केंद्रीय बैंक सरकार की आर्थिक विकास योजनाओं को समर्थन देने के दबाव में रहा है। जून में रुपिया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गई थी। इसके पीछे सरकारी वित्तीय प्रबंधन और केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को लेकर उठी चिंताओं को प्रमुख कारण माना गया था। पिछले महीने संसद ने एक नया कानून भी पारित किया था, जिसके तहत केंद्रीय बैंक की आर्थिक विकास में भूमिका को और मजबूत किया गया है। साथ ही सांसदों को स्वतंत्र वित्तीय नियामकों और केंद्रीय बैंक को बाध्यकारी सुझाव देने का अधिकार भी मिला है।


इसी वजह से कई अर्थशास्त्रियों ने पेरी वारजियो के इस्तीफे को लेकर चिंता जताई है। उनका मानना है कि अब निवेशकों का भरोसा बनाए रखना आसान नहीं होगा। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि केंद्रीय बैंक की नीतियों पर राजनीतिक प्रभाव बढ़ता है तो इसका असर देश की वित्तीय विश्वसनीयता पर पड़ सकता है।


बता दें कि पेरी वारजियो ने वर्ष 1984 में केंद्रीय बैंक में अपना कार्यकाल शुरू किया था। उन्हें पहली बार वर्ष 2018 में गवर्नर बनाया गया और वर्ष 2023 में उन्हें दूसरा कार्यकाल मिला था। उनके नेतृत्व में केंद्रीय बैंक ने रुपिया को स्थिर रखने के लिए कई बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की थी। हाल ही में केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था, बल्कि विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए नई प्रोत्साहन योजनाओं की घोषणा की थी।


मौजूद जानकारी के अनुसार अब राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो अधिकतम तीन नाम संसद को भेजेंगे। इसके बाद संसद प्रक्रिया पूरी कर नए स्थायी गवर्नर का चयन करेगी। इस बीच डेस्ट्री दमायंती ने भरोसा दिलाया है कि केंद्रीय बैंक अपनी सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन पहले की तरह करता रहेगा और मुद्रा तथा वित्तीय प्रणाली की स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते रहेंगे।


विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में नए गवर्नर की नियुक्ति और केंद्रीय बैंक की नीतियां यह तय करेंगी कि निवेशकों का भरोसा कितनी जल्दी लौटता है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार और निवेशक इंडोनेशिया के आर्थिक और वित्तीय घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

All the updates here:

अन्य न्यूज़