CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई अटकी, SEM को धमकी मिलने पर दर्ज हुई FIR

मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई को लेकर पांच घंटे के इंतजार के बाद सुनवाई महज दस मिनट में खत्म हो गई। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने धमकियों और मानसिक उत्पीड़न का हवाला देकर कार्यवाही रोक दी। पुलिस ने मजिस्ट्रेट को मिली धमकी के आधार पर एफआईआर दर्ज की है।
'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेता रविवार को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में लगभग पांच घंटे तक इंतजार करते रहे। वे पार्टी के संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रंका की रिहाई के मामले में सुनवाई का इंतजार कर रहे थे, जो 14 अक्टूबर से न्यायिक हिरासत में हैं। हालांकि, मामले की सुनवाई करने वाले विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) ने धमकियों और मानसिक उत्पीड़न का हवाला देते हुए कार्यवाही को महज 8-10 मिनट में ही खत्म कर दिया। इस वजह से, लगातार पांचवें दिन भी उनकी रिहाई का मामला अनसुलझा ही रह गया।
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CJP प्रतिनिधियों के अनुसार, SEM दोपहर करीब 1.30 से 2 बजे के बीच पुलिस स्टेशन पहुंचे, लेकिन सुनवाई शाम करीब 5 बजे शुरू हुई। संगठन का आरोप है कि 15 अक्टूबर से बार-बार ज़मानत बॉन्ड जमा करने और ज़रूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद, उनके सदस्यों को इंतज़ार करना पड़ा, क्योंकि अलग-अलग चरणों में नई आपत्तियां उठाई गईं। सुनवाई के दौरान, पुलिस ने आरोप लगाया कि CJP नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका एक और विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे थे।
पुलिस ने रविवार को एयरपोर्ट पर दिपके द्वारा दिए गए उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी अपनी आगे की रणनीति तय करेगी। हालांकि, CJP के एक प्रवक्ता ने कहा कि उनकी कोई विरोध प्रदर्शन करने की योजना नहीं है और वे सोशल मीडिया पर भी इसके बारे में कुछ पोस्ट नहीं कर रहे हैं। संक्षिप्त कार्यवाही के दौरान, एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि SEM (पुलिस अधिकारी) महेश कुमार मीना को इन दो लोगों को न्यायिक हिरासत में रखने के कारण धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है और उन्हें खतरा भी है।
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वहां मौजूद लोगों के अनुसार, जब SEM जाने की तैयारी कर रहे थे, तब सरकारी वकील ने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए। CJP सदस्यों का आरोप है कि सरकारी वकील तब सामने आए, जब इन दोनों की रिहाई को लेकर तीन दिनों तक कार्यवाही चली थी। बाद में पुलिस ने पुष्टि की कि SEM को मिली धमकियों की शिकायत के आधार पर एक FIR दर्ज की गई है।
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