उत्तराखण्ड को अवैध मजारों से मुक्ति दिलाने के मिशन को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

Pushkar Singh Dhami
ANI

हम आपको बता दें कि एक दिन पहले पौड़ी जिले के सतपुली क्षेत्र में भी सतपुली-देवप्रयाग मोटर मार्ग पर घोड़ा कोड़ी में प्रशासन ने कथित तौर पर सड़क से सटी सरकारी भूमि पर कब्जा करके बनाई गयी सालों पुरानी एक अवैध मजार को हटा दिया गया था।

देश के अलग-अलग राज्य विभिन्न प्रकार के मुद्दों में उलझे हुए हैं मगर दूसरी ओर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देवभूमि कहे जाने वाले अपने राज्य को अवैध मजारों से मुक्ति दिलाने के मिशन को तेजी से आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। हम आपको बता दें कि उत्तराखंड में सरकारी भूमि पर अवैध धार्मिक निर्माण के ध्वस्तीकरण की जारी कार्रवाई के तहत पौड़ी जिले के कोटद्वार में पिछले दो दशक से अधिक पुरानी कथित अवैध मजार को बुलडोजर चलाकर ढहा दिया गया है। कोटद्वार के उपजिला अधिकारी प्रमोद कुमार ने बताया कि गिवाई स्रोत में वन भूमि पर बनी बाबा गयासुउद्दीन औला-ए-करीम शाह की अवैध मजार पर किसी के द्वारा कोई दावा प्रस्तुत नहीं किए जाने के बाद वन विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा इसे ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने बताया कि कुछ दिनों पहले प्रशासन की ओर से मजार पर एक सार्वजनिक नोटिस चिपकाकर इस भूमि और मजार पर 15 दिनों के भीतर दावा प्रस्तुत करने को कहा गया था। प्रमोद कुमार ने कहा, ‘‘दावा प्रस्तुत नहीं करने का मतलब है कि यह मजार अवैध रूप से वन विभाग की जमीन पर अतिक्रमण करके बनाई गई थी। आज इस अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर सरकार की भूमि को मुक्त करा दिया गया।’’ अधिकारी ने बताया कि यह मजार दो बीघे से अधिक भूमि को कब्जा करके बनाई गयी थी। हम आपको बता दें कि एक दिन पहले पौड़ी जिले के सतपुली क्षेत्र में भी सतपुली-देवप्रयाग मोटर मार्ग पर घोड़ा कोड़ी में प्रशासन ने कथित तौर पर सड़क से सटी सरकारी भूमि पर कब्जा करके बनाई गयी सालों पुरानी एक अवैध मजार को हटा दिया गया था।

उधर, नैनीताल जिले के रामनगर में कार्बेट टाइगर रिजर्व के अंतर्गत वन क्षेत्रों में अवैध धार्मिक अतिक्रमण को चिह्नित करके हटाने की कार्रवाई जारी है। रिजर्व के अधिकारियों ने बताया कि ढेला रेंज में वन विभाग की टीम ने तीन अवैध रूप से निर्मित धार्मिक निर्माण को रविवार को ध्वस्त कर दिया। इससे पूर्व रिजर्व की बिजरानी रेंज से भी अवैध धार्मिक संरचनाओं को हटाया जा चुका है। कार्बेट टाइगर रिजर्व के उप निदेशक दिगंत नायक ने बताया कि वन क्षेत्रों में हुए अवैध धार्मिक निर्माण को चिह्नित कर उन्हें हटाया जा रहा है और किसी भी अवैध धार्मिक निर्माण को छोड़ा नहीं जायेगा।

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हरिद्वार में भी अवैध धार्मिक निर्माण को ध्वस्त करने की कार्रवाई चल रही है। हरिद्वार के ज्वालापुर में रविवार को सड़क पर अवैध रूप से बनी पांच दशक पुरानी मजार तथा एक फलाइओवर के नीचे बना मंदिर ध्वस्त किया गया था। हरिद्वार के कांग्रेस विधायकों (रवि बहादुर और फुरकान अहमद) ने जिलाधिकारी विनय शंकर पांडे से मिलकर मजारों को बिना समय दिए ध्वस्त करने का विरोध किया और कहा कि प्रशासन इस मामले में अपनी मनमानी पर उतर आया है। हालांकि, जिलाधिकारी ने कहा कि अवैध धार्मिक निर्माण के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई उच्चतम न्यायालय के आदेश पर की जा रही है और उन्हें ढहाए जाने से पहले एक सप्ताह का नोटिस दिया जा रहा है।

उधर, साधु-संतों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया और कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाया। बड़ा अखाड़ा उदासीन के महामंडलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश ने कहा कि संत सरकार के समर्थन में हैं और देवभूमि को इस्लामी भूमि नहीं बनने दिया जाएगा। प्रकाश ने कहा कि अतिक्रमण अवैध होता है, चाहे वह मंदिर हो या मजार। उन्होंने कहा कि मंदिरों को हटाने का हिंदुओं द्वारा विरोध नहीं किया गया, लेकिन इन मुद्दों पर सिर्फ एक संप्रदाय विशेष के लोग ही विरोध करते हैं। भाजपा के पूर्व विधायक संजय गुप्ता ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का विरोध कर रहे कांग्रेस नेताओं पर अदालत की अवमानना का आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की।

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