संवैधानिक अधिकारों के हनन पर Congress आक्रामक, Sapkal ने उठाया सवाल

Prabhasakshi Image
Prabhasakshi

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने नागपुर में आरोप लगाया कि देश में संवैधानिक और मतदान अधिकारों का अनादर किया जा रहा है। उन्होंने अपने रुख के समर्थन में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां के हालिया बयान का हवाला दिया। सपकाल ने निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान पर भी आपत्ति जताई।

नागपुर, पांच अक्टूबर वोट देने के अधिकार पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की टिप्पणी का हवाला देते हुए, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सोमवार को दावा किया कि देश में संवैधानिक अधिकारों को “कुचला जा रहा है और उनका अनादर किया जा रहा है”। उनकी यह टिप्पणी जस्टिस भुइयां के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोई भी ऐसी प्रक्रिया जो लाखों भारतीय नागरिकों को मताधिकार से वंचित करती है, वह “मूल रूप से मनमानी” है और संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है, जिसे किसी भी तरह की “दलीलों” से सही नहीं ठहराया जा सकता। हैदराबाद स्थित ‘नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ’ में आयोजित एक कार्यक्रम में न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि भारत का संविधान नागरिकों को दो वर्गों में नहीं बांटता, जिनमें से एक वर्ग मताधिकार प्राप्त हो और दूसरा मताधिकार से वंचित हो।

इस पर उनकी टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर, सपकाल ने कहा, “अब यह व्यापक रूप से ज्ञात है कि हमारे अधिकारों को कुचला जा रहा है, संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का अनादर किया जा रहा है और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश ने जो कहा है वह वास्तव में एक तथ्य है।” कांग्रेस नेता ने नागपुर हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इस देश का मालिक प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि आम आदमी है, जिसके बारे में संविधान स्पष्ट रूप से बताता है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर (मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण) रूपी जो “बुलडोजर” चल रहा है, उसका इस्तेमाल निर्वाचन आयोग द्वारा मतदान के अधिकारों, शक्तियों और दलों को बाधित करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। समाचारपत्र ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस खबर के बाद कांग्रेस मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर निशाना साध रही है, जिसमें कहा गया था कि निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े फैसलों और आदेशों पर बीते 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी।

अपने दो आयुक्तों द्वारा उठायी गई आपत्तियों को लेकर आलोचनाओं के घेरे में आए निर्वाचन आयोग ने कहा है कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां किसी भी संस्था में विचार-विमर्श का हिस्सा होती हैं और उसके सभी आदेशों को पूर्ण कानूनी मान्यता प्राप्त है तथा वे स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हैं। सपकाल ने दावा किया कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों द्वारा उठाई गई चिंताएं सही हैं और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा उठाई गई आपत्तियां भी वैध हैं। उन्होंने कहा, “अब यह देखना होगा कि (केंद्रीय गृह मंत्री) अमित शाह और प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) में कोई नैतिकता बची है या नहीं।” केरलम सरकार द्वारा 2006 की एक सड़क निर्माण परियोजना में सतर्कता जांच के आदेश दिए जाने पर, जब ज्ञानेश कुमार राज्य में पीडब्ल्यूडी सचिव थे, सपकाल ने दावा किया कि यह साबित हो गया है कि “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वोट चोर हैं”।

कांग्रेस नेता ने कहा कि जैसे धर्मेंद्र प्रधान ने (छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से) इस्तीफा दिया, ज्ञानेश कुमार को भी इस्तीफा देना होगा।

डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


All the updates here:

अन्य न्यूज़