कोरोना वायरस साल 2020 से नहीं बल्कि 25 हजार साल पहले से इंसानों को बना रहा अपना शिकार! रिसर्च में खुलासा

कोरोना वायरस साल 2020 से नहीं बल्कि 25 हजार साल पहले से इंसानों को बना रहा अपना शिकार! रिसर्च में खुलासा

जानकारी के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के असिस्टेंट प्रोफेसर डेविड एनार्ड ने कोरोना महामारी को लेकर रिसर्च की है और उनका यह रिसर्च bioRxiv में भी पब्लिश हुआ है। हालांकि, अब साइंस जर्नल में पब्लिश कराने के लिए रिव्यू किया जा रहा है।

कोरोना महमारी से लोगों की जिंदगी पहले जैसी नहीं रही है। अब आपको बाहर ही नहीं बल्कि घरों के अंदर भी मास्क पहनना काफी जरूरी हो गया है। इस महामारी से लोगों के अंदर एक डर बैठ गया है क्योंकि देश में जिस तरह के हालात है उससे लोगों का डरना स्वाभाविक है। वहीं अस्पतालों में बेड औऱ ऑक्सीजन की भारी मात्रा में कमी होने से आम लोगों की जिंदगी दाव पर लग गई है। सब यही दुआ कर रहे है कि यह कठिन वक्त जल्द से जल्द गुजर जाए लेकिन चीन के शहर वुहान से आया साल 2020 में यह वायरस जो अब पूरे दुनियाभर में अपना कहर बरपा रहा है आज से धरती पर नहीं है। जी हां, आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन यह जो कोरोना महामारी है जिसकी वजह से आज पूरी दुनिया में डर का माहौल है वह लगभग 25 साल पहले से लोगों को परेशान कर रहा है। 

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जानकारी के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के असिस्टेंट प्रोफेसर डेविड एनार्ड ने कोरोना महामारी को लेकर रिसर्च की है और उनका यह रिसर्च bioRxiv में भी पब्लिश हुआ है। यहां देखिए यह लिंक- https://www.biorxiv.org/content/10.1101/2020.11.16.385401v2 हालांकि, अब साइंस जर्नल में पब्लिश कराने के लिए रिव्यू किया जा रहा है। प्रोफेसर डेविड के मुताबिक, यह वायरस हमेशा रहा है, जिससे लोग बिमार भी हुए और मरे भी। डेविड के मुताबिक, इंसान की तरह वायरस भी अपने नए जीनोम से बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा, हर तरीके के बेक्टेरिया अपनी पीढ़ियों में बदलाव करते रहते हैं, जिससे वह प्रकृति में सर्वाइव कर सकें। प्रोफेसर डेविड के अनुसार, उनकी टीम ने प्राचीन कोरोना महामारी की खोज के लिए दुनियाभर के 26 अलग-अलग 2504 लोगों के जीनोम का टेस्ट लिया जिससे यह पता चला कि कोरोना वायरस जैसे पैथोजेन इंसानों के डीएनए में प्राकृतिक चयन करके पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ते रहते  हैं।

 

कैसे संपर्क में आता है कोरोना?

साइटिंस्ट के मुताबिक, कोरोना वायरस इंसान के शरीर में 420 टाइप के प्रोटीन से संपर्क करता है जिसके बाद उनमें से 332 प्रोटीन जो होते है वह खुद कोरोना से इंटरैक्ट होते है। बता दें कि इस इस रिसर्च से और नए वायरस की जानकारी मिल सकती है।  बता दें कि अभी भी पूर्वी एशिया के इंसानो से मिले जींस जिनका संपर्क प्राचीन कोरोना वायरस से हुआ था वह अब भी उनके शरीर में मौजुद है। पीढ़ी दर पीढ़ी कोरोना वायरस बनते जा रहे है जिससे लोग बीमार हो रहे है, इसमें होने वाले म्युटेशन के कारण  पूर्वी एशिया के लोगों की इम्युनिटी मजबूत हो गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि, यह लोग सबसे ज्यादा कोरोना की चपेट में आए है जिससे उनके शरीर में इस वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बन गई है। प्रोफ्सर डेविड के मुताबिक, कोरोना की चपेट में आए इंसान के शरीर के 420 प्रोटीन के 42 कोड्स होते हैं और आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन यह 25 साल पहले से ही लगातार खुद को म्युटेट कर रहा है। इससे आप समझ गए होंगे की कोरोना साल 2020 से नहीं बल्कि बहुत पहले से ही लोगों को अपना शिकार बना रहा है।





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