अर्थी उठाने को पूरे नहीं पड़े लोग, चौथे ने हाथ लगाने के लिए पैसे

अर्थी उठाने को पूरे नहीं पड़े लोग, चौथे ने हाथ लगाने के लिए पैसे

ईस्ट दिल्ली के कृष्णा नगर में 65 साल की महिला की लंबी बीमारी के मौत के बाद कंधा देने के लिए बेटे के आलावा कोई आगे नहीं आया। निगमबोध घाट में रिश्तेदार की मौजुदगी के बावजूद बेटे के अलावा उसके दो दोस्त कंधा देने को तैयार हुए लेकिन एक शख्स की कमी पड़ गई।

नई दिल्ली।  कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया में अब तक मरने वालों का आंकड़ा 2,06,567 तक पहुंच गया है। तेजी से बढ़ रहे कोरोना संकट से पूरी दुनिया की हालत खराब हो चुकी है। छुआछुत जैसी इस बीमारी से लोगों के अंदर डर बना हुआ है। इस वायरस का इतना ज्यादा खौफ बना हुआ है कि लोग अब आखिरी समय पर मरने वालों को कंधा देने से भी डर रहे है। इस कोरोना संकट के बीच कंधा देने के लिए चार लोगों को जुटाना काफी मुशिकल साबित हो रहा है।

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ऐसी ही एक घटना मंगलवार रात ईस्ट दिल्ली के कृष्णा नगर से आई है जहां  65 साल की महिला की लंबी बीमारी के मौत के बाद कंधा देने के लिए बेटे के आलावा कोई आगे नहीं आया। रिश्तेदार की मौजुदगी के बावजूद बेटे के अलावा उसके दो दोस्त कंधा देने को तैयार हुए लेकिन एक शख्स की कमी होने की वजह से कफन उठाने वाले को पैसे देकर कंधा देने के लिए तैयार किया गया। घरवालों  के मुताबिक महिला तीन-चार साल से किडनी-लिवर की समस्या से दो महीने से अस्पताल में थीं। उनकी मंगलवार शाम 7:30 बजे मौत हुई। परिवार में एक बेटे के अलावा सिर्फ दो बेटियां है। 

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महिला की मौत के बाद बेटा जब ऐंबुलेंस से शव को देर शाम घर लाया तब पड़ोसी वालों ने रात को ही महिला का अंतिम संस्कार करने का कहा। लेकिन रात को कोई भी शमशान घाट जाने को तैयार नहीं हुआ जिसके बाद  बेटा शव को निगमबोध घाट लेकर गया। इस बात की खबर मिलने के बाद कृष्णा नगर में ‘नर सेवा, नारायण सेवा मित्र मंडल’ से जुड़े संजय शर्मा घाट पहुंचे। शर्मा ने बताया कि महिला को कंधा देने के लिए बेटे के अलावा कोई रिशतेदार आगे नहीं आया जिसके बाद बेटे के दो दोस्त और कफन उठाने वाले से कंधा उठाने की गुजारिश की गई। 





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