दिल्ली के 500 पेट्रोल पंपों पर ANPR कैमरों से निगरानी, बिना PUCC नहीं मिलेगा Fuel

सर्दियों में बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने राजधानी में नो पीयूसीसी नो फ्यूल नियम लागू किया है। इसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र न होने पर वाहनों को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं दी जा रही है। लगभग 500 पेट्रोल पंपों पर एएनपीआर कैमरों और स्वचालित प्रणाली से इसकी सख्त निगरानी की जा रही है।
सर्दियों में होने वाले स्मॉग और गाड़ियों से निकलने वाले धुएं की समस्या से निपटने के लिए, दिल्ली सरकार ने 1 अक्टूबर, गुरुवार से पूरी राजधानी में "नो PUCC, नो फ्यूल" (PUCC नहीं तो फ्यूल नहीं) का सख्त नियम लागू किया है। नए नियमों के तहत, शहर के सभी पेट्रोल पंप उन गाड़ियों को पेट्रोल, डीज़ल, CNG और LPG नहीं बेच रहे हैं जिनके पास वैलिड 'पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट' (PUCC) नहीं है। इस नियम का ठीक से पालन हो, इसके लिए इस पहल में एडवांस्ड मॉनिटरिंग टेक्नोलॉजी और इंटीग्रेटेड डिस्पेंसिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह अभियान दिल्ली के लगभग 500 ऐसे फ्यूल स्टेशनों पर चलाया जा रहा है, जहाँ ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरा सिस्टम लगे हैं। जैसे ही कोई गाड़ी फ्यूल भरने वाली नोज़ल के पास आती है, ANPR कैमरे उसकी रजिस्ट्रेशन की जानकारी रिकॉर्ड कर लेते हैं और नेशनल व्हीकल डेटाबेस रिकॉर्ड से उसका मिलान करते हैं। अगर किसी गाड़ी का PUCC एक्सपायर हो गया है या नहीं है, तो ऑटोमेटेड सिस्टम फ्यूल भरने की प्रक्रिया को तब तक रोक देता है जब तक कि वैलिड सर्टिफिकेट न मिल जाए।
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स्थानीय भारत पेट्रोलियम स्टेशन के मैनेजर दिनेश कुमार ने ANI से बात करते हुए पुष्टि की कि फ्यूल पंपों पर गुरुवार सुबह से ही सख्ती से नियम लागू कर दिए गए हैं। दिनेश कुमार ने कहा आज सुबह से ही हम किसी भी ऐसी गाड़ी को फ्यूल नहीं दे रहे हैं जिसके पास पॉल्यूशन सर्टिफिकेट नहीं है। यहाँ पॉल्यूशन सिस्टम को भी लिंक किया गया है, इसलिए अगर सिस्टम दिखाता है कि गाड़ी के पास वैलिड पॉल्यूशन सर्टिफिकेट नहीं है, तो मालिक फ्यूल लेने आने से पहले उसे रिन्यू करवा लेता है... अब लोग जागरूक हो गए हैं। आने वाले दिनों में इसका पॉल्यूशन पर असर पड़ेगा क्योंकि सर्दियों का मौसम आ रहा है... यही वजह है कि सरकार ने इसे 1 अक्टूबर से ही लागू कर दिया है ताकि भविष्य में कोई दिक्कत न हो। स्थानीय फ्यूल स्टेशनों पर गाड़ी चलाने वालों और कमर्शियल ट्रांसपोर्टरों ने प्रदूषण रोकने के इस उपाय का काफी हद तक समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ऑन-साइट टेस्टिंग की सुविधा होने से नियमों का पालन करना आसान हो गया है।
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हापुड़ के ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर जय भगवान गौतम ने बताया कि नियम के बारे में पता चलने पर उन्होंने पेट्रोल पंप पर ही अपना एक्सपायर हो चुका सर्टिफिकेट रिन्यू करवा लिया। उन्होंने कहा, "हम इसका पूरा स्वागत करते हैं। हम ट्रांसपोर्टर हैं; सरकार ट्रकों को लेकर जो भी कर रही है, वह अच्छा ही कर रही है, इसमें कोई शक नहीं।" आने-जाने वाले लोगों ने भी इस पॉलिसी की ज़रूरत को माना। उन्होंने कहा कि सख्ती से लागू करने पर लोग प्रदूषण के सबसे ज़्यादा स्तर वाले महीनों से पहले ही गाड़ियों की देखभाल और मरम्मत करवाने के लिए प्रेरित होते हैं। सर्दियों के महीनों में दिल्ली में हवा की क्वालिटी अक्सर खतरनाक स्तर तक खराब हो जाती है। ऐसा पड़ोसी राज्यों में खेतों में पराली जलाने, हवा की कम गति, तापमान में गिरावट और शहर में गाड़ियों की भारी भीड़ के कारण होता है।
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